बजट सत्र में NEP पर घमासान, विपक्ष ने केंद्र को घेरा, सत्तापक्ष ने बताया राजनीतिक एजेंडा

नई दिल्ली: संसद के बजट सत्र के दौरान राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) में तीन-भाषा नीति को लेकर जबरदस्त हंगामा जारी है। विपक्षी दलों ने इस मुद्दे पर सरकार को घेरने की कोशिश की, जबकि सत्तापक्ष ने विपक्ष पर राजनीतिकरण का आरोप लगाया। संसद के दोनों सदनों—राज्यसभा और लोकसभा—में इस विषय पर तीखी बहस हो रही है।

तीन-भाषा नीति पर विपक्ष हमलावर
कांग्रेस सांसद प्रमोद तिवारी ने NEP को लेकर सरकार पर निशाना साधते हुए कहा, “कल केंद्रीय शिक्षा मंत्री ने सदन को गुमराह करने की कोशिश की। यह एक संवेदनशील मुद्दा है। केंद्र को राज्यों की भावनाओं का सम्मान करना चाहिए। हम राज्यों की मांगों के साथ खड़े हैं।” विपक्ष का कहना है कि सरकार भाषा नीति को थोपने का प्रयास कर रही है, जिससे क्षेत्रीय भाषाओं को नुकसान पहुंचेगा।

तमिलनाडु के कई सांसदों ने भी इस नीति के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया। डीएमके सांसदों ने काली शर्ट पहनकर विरोध जताया और कहा कि तीन-भाषा नीति दक्षिण भारतीय राज्यों की संस्कृति के खिलाफ है। तमिलनाडु की सत्तारूढ़ पार्टी डीएमके ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान की टिप्पणी को लेकर भी उन पर निशाना साधा।

सरकार की सफाई, विपक्ष पर राजनीतिकरण का आरोप
केंद्रीय मंत्री जुएल ओराम ने विपक्ष के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि कांग्रेस के शासनकाल में ही हिंदी को राष्ट्रीय भाषा के रूप में मान्यता दी गई थी। उन्होंने कहा, “यह पूरी तरह से व्यक्तिगत पसंद का मामला है कि कोई व्यक्ति किस भाषा में पढ़ना, बोलना या काम करना चाहता है। विपक्ष केवल राजनीतिक लाभ के लिए NEP का विरोध कर रहा है।”

बीजेपी नेता दिनेश शर्मा ने डीएमके के विरोध को आधारहीन बताते हुए कहा कि यह मुद्दा केवल राजनीतिक लाभ उठाने के लिए उठाया जा रहा है। उन्होंने कहा, “तीन भाषा फॉर्मूला एक वरदान है, जिससे तमिल भाषा को भी फायदा हुआ है। विपक्ष को इस नीति का स्वागत करना चाहिए।”

मणिपुर हिंसा और परिसीमन विवाद पर भी हंगामा
तीन-भाषा नीति के अलावा, मणिपुर हिंसा और परिसीमन विवाद को लेकर भी संसद में हंगामा जारी है। मंगलवार को तमिलनाडु के सांसदों ने परिसीमन में निष्पक्षता की मांग को लेकर विरोध जताया।

वहीं, बीते दिन केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने गृह मंत्री अमित शाह की ओर से आव्रजन और विदेशी नागरिक विधेयक 2025 लोकसभा में पेश किया था। इस विधेयक का उद्देश्य भारत के आव्रजन कानूनों को आधुनिक और मजबूत बनाना है।

सत्र के आगे के दिन भी गरमाने के आसार
तीन-भाषा नीति, मणिपुर हिंसा और अन्य मुद्दों को लेकर संसद का माहौल अभी और गरमाने के आसार हैं। विपक्षी दल सरकार पर हमलावर बने हुए हैं, जबकि सत्तापक्ष विपक्ष पर राजनीति करने का आरोप लगा रहा है। अब देखना यह होगा कि सरकार और विपक्ष के बीच इस गतिरोध का क्या समाधान निकलता है।

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