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India AI Impact Summit 2026: मैक्रों ने सराहा भारत का डिजिटल मॉडल, बच्चों के लिए सोशल मीडिया बैन की अपील

India AI Impact Summit 2026: मैक्रों ने सराहा भारत का डिजिटल मॉडल, बच्चों के लिए सोशल मीडिया बैन की अपील

द फ्रंट डेस्क: राजधानी के भारत मंडपम में आयोजित India AI Impact Summit 2026 में फ्रांस के राष्ट्रपति Emmanuel Macron ने भारत की डिजिटल क्रांति, तकनीकी आत्मनिर्भरता और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) क्षमता की खुलकर सराहना की। अपने संबोधन की शुरुआत ‘नमस्ते’ से करते हुए मैक्रों ने कहा कि पिछले दस वर्षों में भारत ने टेक्नोलॉजी और डिजिटल गवर्नेंस के क्षेत्र में अभूतपूर्व बदलाव दर्ज किया है।

उन्होंने कहा कि भारत ने जिस पैमाने पर डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर खड़ा किया है, वह दुनिया के लिए एक मिसाल है। मैक्रों ने उदाहरण देते हुए बताया कि एक समय मुंबई का एक स्ट्रीट वेंडर बैंक खाता खोलने में असमर्थ था, क्योंकि उसके पास आवश्यक दस्तावेज नहीं होते थे। लेकिन आज वही व्यक्ति मोबाइल फोन के जरिए तुरंत डिजिटल पेमेंट स्वीकार कर रहा है। उन्होंने इसे ‘समावेशी डिजिटल क्रांति’ का परिणाम बताया।

मैक्रों ने कहा कि भारत हर साल लाखों एआई इंजीनियर तैयार कर रहा है और लगभग पांच लाख डेवलपर्स के साथ दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी डेवलपर कम्युनिटी बन चुका है। उनके मुताबिक, यह न केवल भारत की युवा शक्ति का प्रमाण है, बल्कि वैश्विक टेक इकोसिस्टम में भारत की बढ़ती भूमिका का संकेत भी है।

बच्चों की डिजिटल सुरक्षा पर विशेष जोर

अपने संबोधन में फ्रांस के राष्ट्रपति ने बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा का मुद्दा प्रमुखता से उठाया। उन्होंने प्रधानमंत्री से 15 वर्ष से कम आयु के बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर प्रतिबंध लगाने की अपील की।
मैक्रों ने कहा कि फ्रांस इस दिशा में पहले ही कदम उठा चुका है और वहां 15 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर नियंत्रण लागू किया गया है। उन्होंने जोर देते हुए कहा, “बच्चों की सुरक्षा कोई साधारण नियम नहीं, बल्कि एक सभ्य समाज की पहचान है।” उन्होंने उम्मीद जताई कि भारत भी बच्चों और किशोरों को डिजिटल खतरों से बचाने के लिए ठोस नीति पर विचार करेगा। उनके मुताबिक, एआई और डिजिटल प्लेटफॉर्म का विकास जितना जरूरी है, उतना ही जरूरी है कि युवा पीढ़ी को सुरक्षित डिजिटल वातावरण उपलब्ध कराया जाए।

इंडिया स्टैक और डिजिटल पहचान मॉडल की सराहना

मैक्रों ने भारत के डिजिटल आइडेंटिटी सिस्टम और पेमेंट इंफ्रास्ट्रक्चर की भी खुलकर तारीफ की। उन्होंने कहा कि 1.4 अरब लोगों के लिए डिजिटल पहचान तैयार करना अपने आप में ऐतिहासिक उपलब्धि है।

उन्होंने भारत के पेमेंट सिस्टम का जिक्र करते हुए कहा कि हर महीने अरबों ट्रांजैक्शन प्रोसेस करने की क्षमता किसी भी देश के लिए बड़ी उपलब्धि है। साथ ही करोड़ों डिजिटल हेल्थ आईडी जारी कर हेल्थ सेक्टर में टेक्नोलॉजी का प्रभावी इस्तेमाल भारत की दूरदर्शी सोच को दर्शाता है। मैक्रों के मुताबिक, भारत का “इंडिया स्टैक” मॉडल कई देशों के लिए प्रेरणा बन सकता है, खासकर उन देशों के लिए जो डिजिटल समावेशन की दिशा में काम कर रहे हैं।

‘विभाजन नहीं, सहयोग की राह’

अपने भाषण के अंत में मैक्रों ने वैश्विक सहयोग पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि आज के समय में जब दुनिया कई तरह के तनावों और चुनौतियों का सामना कर रही है, तब डिजिटल तकनीक का इस्तेमाल विभाजन के बजाय जुड़ाव के लिए होना चाहिए। उन्होंने कहा कि हमें विनाश के बजाय सृजन, प्रतिस्पर्धा के बजाय साझेदारी और अलगाव के बजाय सहयोग पर ध्यान देना होगा। फ्रांस और भारत मिलकर एआई के भविष्य को सकारात्मक और मानव-केंद्रित दिशा दे सकते हैं।

मैक्रों का यह संबोधन न केवल भारत की डिजिटल उपलब्धियों की अंतरराष्ट्रीय मान्यता था, बल्कि बच्चों की डिजिटल सुरक्षा और वैश्विक सहयोग जैसे अहम मुद्दों पर भी एक स्पष्ट संदेश देता है।

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