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‘द कश्मीर फाइल्स’ विवाद: इजरायली राजदूत ने लापिड के बयान की निंदा की तो मैसेज मिला-“हिटलर महान थे”

नई दिल्ली। इजरायली फिल्म निर्माता नादव लापिड द्वारा फिल्म ‘द कश्मीर फाइल्स’ को अश्लील बताए जाने की भारत में इजराइल के राजदूत नौर गिलोन ने निंदा की थी। नौर गिलोन ने लापिड की सार्वजनिक रूप से आलोचना की थी, जिसके बाद उन्हें सोशल मीडिया पर हेट मैसेज का सामना करना पड़ा है।

गिलोन ने शनिवार को ट्विटर पर मिले एक कमेंट का स्क्रीनशॉट शेयर किया। इसमें लिखा था, “हिटलर महान थे। उन्होंने तुम जैसे मैल को जला दिया। हिटलर एक महान व्यक्ति था।” गिलोन ने लिखा, “मुझे नफरत भरे कई मैसेज मिले हैं। प्रोफाइल के अनुसार नफरत भरा मैसेज भेजने वाले व्यक्ति के पास पीएचडी की डिग्री है। भले ही वह मेरे द्वारा सुरक्षा दिए जाने के लायक नहीं है फिर भी मैंने उसकी पहचान की जानकारी को हटाने का फैसला किया है।”

भारतीयों ने किया गिलोन का समर्थन
गिलोन द्वारा ट्वीट किए जाने के बाद बड़ी संख्या में भारतीयों ने उनका समर्थन किया। एक अन्य ट्वीट में गिलोन ने समर्थन के लिए धन्यवाद दिया। बता दें कि भारत में इजरायल के राजदूत गिलोन ने इजरायली फिल्म निर्माता नदव लापिड द्वारा ‘द कश्मीर फाइल्स’ को एक प्रचार और अश्लील फिल्म कहने के जवाब में कहा था, “ऐतिहासिक घटनाओं का गहराई से अध्ययन करने से पहले उनके बारे में बात करना असंवेदनशील और अक्खड़पन है।”

लैपिड ने मांगी माफी
नादव लैपिड ने भारत के अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव में इंटरनेशनल जूरी अध्यक्ष थे। उन्होंने विवेक अग्निहोत्री फिल्म को “vulgar” और “propaganda” कहा था। विवाद खड़ा होने पर लैपिड ने माफी मांग ली थी। लैपिड ने कहा था, “मैं किसी का अपमान नहीं करना चाहता था। मेरा उद्देश्य कभी भी लोगों या उनके रिश्तेदारों का अपमान करना नहीं था, जो पीड़ित हैं। मैं पूरी तरह से माफी मांगता हूं, अगर मेरे कथन से कोई भी कम्युनिटी आहत हुई है तो मैं इसके लिए माफी मांगता हूं।”

सिंगापुर में ट्रांसप्लांट की जाएगी लालू की किडनी, जानिए भारत में क्या है इलाज का खर्च और नियम

काफी लंबे समय से बीमार चल रहे राष्ट्रीय जनता दल के अध्यक्ष लालू प्रसाद का किडनी ट्रांसप्लांट होना है और ये ऑपरेशन भारत में नहीं बल्कि सिंगापुर में होगा और लालू प्रसाद यादव को उनकी छोटी बेटी किडनी डोनेट करेंगी. ऐसे में ये जानना जरूरी है कि भारत में किडनी ट्रांसप्लांट को लेकर क्या नियम हैं और इसमें कितना खर्च आता है.

किडनी ट्रांसप्लांट क्या है ? 
किडनी ट्रांसप्लांट क्या होता है? और इसकी जरूरत कब पड़ती है. दरअसल जब किसी व्यक्ति के शरीर में दोनों किडनी काम करना बंद कर देती हैं, तो उसके शरीर में पुरानी किडनी की जगह नई किडनी ट्रांसप्लांट की जाती है. जिसे किडनी ट्रांसप्लांट कहा जाता है. 

दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल के नेफ्रोलॉजी और किडनी ट्रांसप्लांट विभाग के प्रो एंड हेड डॉक्टर हिमांशु वर्मा के मुताबिक किसी भी जीवित या ब्रेन डेड व्यक्ति की किडनी ट्रांसप्लांट की जा सकती है. ऐसा व्यक्ति जिसका ब्रेन डेड हो चुका है, वो आईसीयू में है, और उसके शरीर के बाकी अंग काम कर रहे हैं, तो उसकी किडनी किसी अन्य मरीज को ट्रांसप्लांट की जा सकती है. 

लेकिन ब्रेन डेड शख्स के परिजनों की मंजूरी के बाद ही ये पूरी प्रक्रिया की जाती है या फिर जिस शख्स का ब्रेन डेड हुआ है उसने इससे पहले अपनी इच्छा जताई हो. उस स्थिति में उसके अंगों को किसी जरूरतमंद मरीज को दान किया जाता है.

ब्रेन डेड व्यक्ति कौन होता है?
डॉक्टर हिमांशु बताते हैं कि मेडिकल भाषा में ब्रेन डेड व्यक्ति ऐसे मरीज को कहा जाता है जिसका दिमाग मेडिकली तौर पर काम करना बंद कर चुका है, उसके शरीर में रक्त तो है और दिमाग को छोड़कर बाकि अंगों तक रक्त पहुंच रहा हैं यानि उसके शरी के बाकि अंग काम कर रहे हैं जैसे की किडनी, हार्ट. आदि ऐसे व्यक्ति की किडनी या हार्ट ट्रांसप्लांट किया जा सकता है. लेकिन किसी मृत व्यक्ति की किडनी ट्रांसप्लांट नहीं की जा सकती.

व्यक्ति एक किडनी के साथ जीवित रह सकता है?
इसके जवाब में  सफदरजंग अस्पताल के किडनी ट्रांसप्लांट विभाग के प्रो डॉक्टर हिमांशु कहते हैं कि कई बार कुछ लोगों के शरीर में जन्म से एक ही किडनी होती है. वो बेहद ही स्वस्थ जीवन जीते हैं. एक किडनी होने से उनके शरीर पर इसका कोई बुरा प्रभाव नहीं पड़ता. भगवान ने हमें दो किडनियां दी हैं, जिनका काम हमारे शरीर में बेहद ही महत्वपूर्ण होता है. किडनी शरीर का एक ऐसा अंग है जिसका मुख्य काम शरीर से अपशिष्ट निकालना होता है. किडनी ही हमारे खून से अपशिष्ट, आदि अलग कर उसे पेशाब के जरिए बाहर निकालती है. 

लेकिन जब किसी व्यक्ति की किडनी खराब हो जाती है तो उसके शरीर में ये प्रक्रिया नहीं हो पाती, जिसके बाद किडनी ट्रांसप्लांट की जरूरत पड़ती है. जिसमें शरीर से खराब किडनी निकालकर नयी किडनी को प्रत्यापित या ट्रांसप्लांट किया जाता है. लेकिन व्यक्ति एक किडनी के साथ भी स्वस्थ जीवन जी सकता है. एक किडनी भी उसके शरीर में वहीं काम करेगी जो दो किडनियां करती हैं.

इसलिए जिस व्यक्ति की दोनों किडनी खराब हो जाती हैं उसी के शरीर में नयी किडनी ट्रांसप्लांट की जाती है. एक किडनी के खराब होने के बाद किडनी ट्रांसप्लांट नहीं किया जाता क्योंकि एक किडनी के खराब होने के बाद दूसरी किडनी उसका काम करती है. इसलिए जो शख्स किडनी देता है उसको भी शारीरिक तौर पर कोई परेशानी नहीं होती केवल कुछ मेडिकल टेस्ट कराने होते हैं. अपने ब्लड प्रेशर को ध्यान रखना होता है, ताकि ये पता चल सके कि उसके मूत्र में प्रोटीन तो नहीं आ रहा. इसके लिए उसे हर 6 महीने से 1 साल में जांच करानी होती है..

देश में क्या है किडनी ट्रांसप्लांट के लिए कानून?
देश में किसी भी मरीज में कोई भी अंग ट्रांसप्लांट करने के लिए एक एक्ट हैं. इसका पालन करके अंगों का प्रत्यारोपण किया जा सकता है, जिसे मानव अंग और प्रत्यारोपण अधिनियम 1994 (HUDA)का नाम दिया गया है. एचयूडीए 1994 के तहत ही सभी अस्पतालों में अंगों का ट्रांसप्लांट किया जाता है. देश के हर एक नागरिक को इसका पालन करना होता है और यदि कोई व्यक्ति या अस्पताल इस एक्ट का पालन नहीं करता तो उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई हो सकती है.

देश के सभी राज्यों में ये एक्ट लागू होता है, और देश के किसी भी अस्पताल में काई भी अंग ट्रांसप्लांट किया जाता है तो इसी नियम का पालन करना होता है. इस एक्ट के तहत ब्रेन डेड व्यक्ति के अंग किसी अन्य जरूरतमंद मरीज को ट्रांसप्लांट किए जा सकते हैं. इसके लिए ब्रेन डेड शख्स के परिजनों से अनुमति लेनी होती है. 

लालू प्रसाद यादव का किडनी ट्रांसप्लांट देश से बाहर सिंगापुर में होना है. जहां उनकी बेटी उनको किडनी डोनेट कर रही हैं. ऐसे में उस देश में इसे लेकर जो नियम और कानून हैं उसका पालन किया जाएगा, लेकिन क्योंकि वो भारत के नागरिक हैं तो उन्हें एचयूडीए 1994 एक्ट का भी पालन करना होगा.  

कौन कर सकता है मरीज को अंग दान?
इस एक्ट को लेकर दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल के नेफ्रोलॉजी और किडनी ट्रांसप्लांट विभाग के हेड बताते हैं कि देश में अंग ट्रांसप्लांट के लिए बने कानून के मुताबिक किसी मरीज को उसके खून के रिश्तेदार अंग दान कर सकते हैं, जिसमें माता-पिता, भाई-बहन, दादा-दादी और पत्नी शामिल हैं. 

इसके अलावा यदि कोई अन्य जीवित व्यक्ति अपने अंग डोनेट करता है, तो उसे ये सिद्ध करना होता है कि जिस शख्स को वो अंग डोनेट कर रहा है उसके साथ उसके भावनात्मक रिश्ते हैं. वो अपनी इच्छा से कर रहा है जिसके लिए उसे किसी तरीके का कोई आर्थिक लाभ नहीं मिल रहा.

अंग ट्रांसप्लांट में कितना आता है खर्चा?
एचयूडीए 1994 के तहत देश में अंग को खरीदा या बेचा नहीं जा सकता. केवल दान किया जा सकता है, इसलिए ये एक्ट लाया गया है. तो यदि किसी मरीज का कोई अंग काम करना बंद कर देता है तो इस एक्ट के तहत अंग ट्रांसप्लांटकिए जा सकते हैं. किसी भी अस्पताल में जहां अंग ट्रांसप्लांट की सभी मेडिकल सुविधाएं हैं वहां ट्रांसप्लांट किया जा सकता है. 

सरकारी अस्पतालों में इसके लिए डॉक्टर या अस्पताल कोई फीस नहीं लेते, लेकिन दवाईयों आदि को लेकर 3 से 4 लाख रुपये तक का खर्चा आता है, वहीं दूसरी तरफ प्राइवेट अस्पतालों में भी अंग निशुल्क होता है, लेकिन उसे ट्रांसप्लांट करने में डॉक्टर की फीस और अस्पताल का खर्चा, ओपीडी की फीस, दवाइयों आदि का शुल्क लिया जाता है. जिसे कुल मिलाकर लाखों रुपये में किडनी ट्रांसप्लांट होता है एक मरीज के किडनी ट्रांसप्लांट में 30 से 35 लाख रुपये खर्च हो जाते हैं.

शरीर से निकलने के बाद कितनी देर में हो सकता है ट्रांसप्लांट? 
ब्रेन डेड शख्स की किडनी 24 से 48 घंटों के भीतर ट्रांसप्लांट की जाती है जबकि जीवित शख्स की किडनी उसकी कुछ मेडिकल जांच पूरी होने के बाद ट्रांसप्लांट की जा सकती है. कोई भी स्वस्थ व्यक्ति 65 साल की उम्र तक किडनी डोनेट कर सकता है.

इसके साथ जिस व्यक्ति को किडनी दी जानी है, इसके लिए उसके स्वास्थ्य को देखना होता है. कई लोग 80 साल की उम्र के बाद भी किडनी ट्रांसप्लांट कराते हैं.  इसलिए कई बार डॉक्टर सलाह देते हैं कि ट्रांसप्लांट से बेहतर डायलिसिस कराया जाए. क्योंकि उस उम्र में डायलिसिस भी उतना की काम करता है, जितना की किडनी ट्रांसप्लांट में नई किडनी करेगी. दो से तीन हफ्तों में रोजाना डायलिसिस कराना होता है. जिसमें शरीर में मौजूद रक्त को मशीन की मदद से साफ किया जाता है.

किन अस्पतालों में होता है किडनी ट्रांसप्लांट?
देश में किडनी ट्रांसप्लांट के लिए सरकारी और प्राइवेट दोनों ही तरह के बेहतर अस्पताल हैं जिसमें दिल्ली का एम्स, सफदरजंग अस्पताल, राम मनोहर लोहिया अस्पताल और इंस्टीट्यूट ऑफ लीवर एंड बिलिअरी साइंसेस है. इसके साथ ही देश भर में कई बड़े प्राइवेट अस्पताल भी हैं जहां बेहतर तरीके से किडनी ट्रांसप्लांट किया जा सकता है.

लालू की बेटी ने कहा,”ये तो बस एक छोटा सा मांस का टुकड़ा”
बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव की छोटी बेटी रोहिणी आचार्य उन्हें किडनी डोनेट कर रही हैं, जिसको लेकर उन्होंने खुद ट्वीट करते हुए जानकारी दी. उन्होंने लिखा कि “जिस पिता ने इस दुनिया में मुझे आवाज दी, जो मेरे सबकुछ हैं. उनके लिए अगर मैं अपने जीवन का छोटा सा भी योगदान दे पाती हूं, तो ये मेरा परम सौभाग्य होगा. धरती पर भगवान माता- पिता होते हैं इनकी पूजा, सेवा हर बच्चे का फर्ज है…”

इतना ही नहीं पिता को किडनी डोनेट करने के फैसले को लेकर बेटी रोहिणी ने कई भावनात्मक ट्वीट किए. एक ट्वीट में उन्होंने लिखा कि ‘मेरा तो मानना है की ये तो बस एक छोटा सा मांस का टुकड़ा है जो मैं अपने पापा के लिए देना चाहती हूं..पापा के लिए मैं कुछ भी कर सकती हूं, आप सब दुआ कीजिए कि सब बेहतर तरीके से हो जाए, और पापा सभी लोगों की आवाज बुलंद करे…

Shraddha Murder Case: आफताब को सजा दिलाने के लिए दिल्ली पुलिस के हाथ लगा अहम सबूत! श्रद्धा के फोन की लास्ट लोकेशन को लेकर बड़ा खुलासा

Shraddha Murder Case: श्रद्धा हत्याकांड (Shraddha Murder Case) को लेकर रोज नए खुलासे हो रहे हैं. दिल्ली पुलिस ने श्रद्धा के फोन की सीडीआर (कॉल डिटेल रिकॉर्ड) रिपोर्ट निकाली है. दिल्ली पुलिस (Delhi Police) के सूत्रों की मानें तो रिपोर्ट में सामने आया है कि श्रद्धा के फोन की लास्ट लोकेशन 18 और 19 मई को महरौली के छतरपुर में थी. 18 मई को आफताब ने श्रद्धा के मोबाइल से कई फोन भी किए थे और सामने से भी कई फोन आए थे. वहीं, 19 मई को फोन से कोई कॉल या मैसेज नहीं हुआ. 

मोबाइल की सीडीआर से ही पुलिस को लास्ट लोकेशन के बारे में पता चला. हालांकि, सूत्रों ने यह साफ नहीं किया है कि आफताब ने श्रद्धा के फोन से किसको फोन किया था और उस फोन पर किसके फोन आए थे. एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि जांच में साफ हुआ है कि श्रद्धा के फोन की लोकेशन कत्ल वाले दिन, जिस घर में वारदात हुई उसके पास की ही थी. 

आफताब ने OLX पर बेचा था फोन 

सूत्रों ने बताया कि 19 मई की रात को ही श्रद्धा का फोन बंद हो गया था. पुलिस इसे श्रद्धा हत्याकांड में बड़ा एविडेंस मान रही है. यह आफताब को सजा दिलाने में बड़ा सबूत साबित हो सकता है. वहीं, आरोपी आफताब ने हत्या के चार महीने बाद अपना मोबाइल बदला था. आरोपी ने पुराना मोबाइल ओएलएक्स (OLX) पर बेच दिया था और उसी नंबर का सिम लिया था. पुलिस ने इस मोबाइल को भी बरामद कर लिया है. हालांकि, अभी श्रद्धा का मोबाइल बरामद नहीं हुआ है.

हथियार को लेकर किया खुलासा 

इससे पहले मामले में खुलासा हुआ था कि श्रद्धा (Shraddha Walkar) की डेड बॉडी के टुकड़े करने के लिए आरोपी आफताब पूनावाला ने चाइनीज चौपर (Chinese Chopper) का इस्तेमाल किया था. उसने नार्को टेस्ट के दौरान कथित तौर पर बताया था कि जिस आरी से श्रद्धा के शव को काटा, उस आरी को गुरुग्राम में दफ्तर के पास झाड़ियों में कहीं फेक दिया था. 

Parliament Winter Session 2022: संसद के शीतकालीन सत्र में शामिल नहीं होंगे राहुल गांधी समेत कांग्रेस के ये बड़े नेता, जानें क्या है कारण

Parliament Winter Session 2022: 7 दिसंबर यानी बुधवार से संसद का शीतकालीन सत्र शुरू होने वाला है. इस बार संसद के शीतकालीन सत्र में कांग्रेस के तमाम दिग्गज नेता दिखाई नहीं देंगे. सूत्रों के मुताबिक, कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी, वरिष्ठ नेता जयराम रमेश और दिग्विजय सिंह सहित पार्टी के तमाम बड़े नेता शीतकालीन सत्र में हिस्सा नहीं लेंगे.

राहुल गांधी सहित पार्टी के कई बड़े नेता अभी भारत जोड़ो यात्रा में व्यस्त हैं. इसी बीच संसद का शीतकालीन सत्र भी शुरू हो रहा है. सूत्रों के मुताबिक पार्टी नेतृत्व नहीं चाहता है कि ‘भारत जोड़ो यात्रा’ से लोगों का ध्यान भटके, इसलिए आलाकमान ने फैसला किया है कि राहुल सहित कई बड़े नेता यात्रा को जारी रखेंगे. 

सोनिया गांधी की उपस्थिति पर भी संशय

सूत्रों के मुताबिक, राहुल गांधी इस बार संसद के शीतकालीन सत्र से दूर रहेंगे. शीतकालीन सत्र में शामिल होने को लेकर कांग्रेस पार्टी की पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी पर भी संशय है. पार्टी सूत्रों का कहना है कि कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे को फ्री हैंड देने के लिए सोनिया अब पार्टी से संबंधित मामलों से दूरी बनाने की सोच रही हैं. यही कारण है कि वह इस बार संसद में पार्टी की अगुवाई करती नहीं दिखेंगी. 

राज्यसभा में विपक्ष के नेता पर होगी बैठक!

मल्लिकार्जुन खरगे के कांग्रेस अध्यक्ष बनने के बाद, पार्टी के सामने राज्यसभा में विपक्ष का नेता चुनना भी एक बड़ी चुनौती है. सूत्रों के मुताबिक, संसद का शीतकालीन सत्र शुरू होने से पहले ही पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे एक अहम बैठक करने वाले हैं. इस बैठक में राज्यसभा में विपक्ष का नेता चुनने को लेकर चर्चा हो सकती है. खरगे की जगह अब पी चिदंबरम या दिग्विजय सिंह को यह जिम्मेदारी दी जा सकती है. 

शीतकालीन सत्र में आयोजित होंगी 17 बैठकें

केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री प्रह्लाद जोशी ने मीडिया को बताया है कि इस बार संसद का शीतकालीन सत्र 7 से 29 दिसंबर तक चलेगा. इस दौरान 23 दिनों में 17 बैठकें आयोजित की जाएंगी. अमृत काल के बीच सत्र के दौरान विधायी कार्य और अन्य मुद्दों पर चर्चा की उम्मीद है. केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री ने कहा कि सरकार रचनात्मक बहस के लिए तैयार है.

दुनियाभर में सुर्खियां बटोर रहा चीन का ‘ब्लैंक पेज रिवोल्यूशन’, जानें क्या है प्रदर्शन का ये अनोखा तरीका

China Blank Page Revolution: चीन में कोरोना (Coronavirus In China) के मामले बीते दिनों तेजी से बढ़े और सरकार ने अपनी जीरो कोविड पॉलिसी (Zero Covid Policy) को पूरे देश में सख्ती से लागू किया. उन क्षेत्रों में कड़ाई और ज्यादा देखी गई, जहां कोविड के मामले ज्यादा थे. हालांकि, सख्त प्रतिबंधों के कारण लोगों की आजीविका प्रभावित हो रही थी और यही कारण है कि पूरे चीन ने बीते हफ्ते व्यापक विरोध प्रदर्शनों को अनुभव किया. शंघाई से लेकर बीजिंग और वुहान से शिनजियांग तक प्रदर्शन की आग फैल गई. इस प्रदर्शन में लोगों ने ‘ब्लैंक पेज’ यानी कोरे कागजों का सहारा लिया. चलिए अब आपको बताते हैं कि आखिर यह ब्लैंक पेज रेवोल्यूशन क्या है, जो इस वक्त पूरी दुनिया में सुर्खियां बटोर रहा है.

सबसे पहले यह जान लेते हैं कि ब्लैक पेज रिवोल्यूशन आखिर है क्या? चीन में विरोध प्रदर्शनों का दिखना बिल्कुल भी आम नहीं है. सत्तारूढ़ कम्युनिस्ट पार्टी के खिलाफ धरना देना काफी मुश्किल माना जाता है, लेकिन इस बार चीनी नागरिकों ने इसके लिए एक अनोखा तरीका निकाला. प्रदर्शनकारियों ने अपना विरोध दर्ज कराने के लिए सफेद कोरे कागज लिए और सड़कों पर रैलियां निकाली.

क्यों इस्तेमाल किए जा रहे ब्लैंक पेपर?

ब्लैंक A4 पेपर में कोई सिंबल, फोटो या टेक्स्ट नहीं लिखा गया. यह  सत्ताधारी चीनी कम्युनिस्ट पार्टी की असहमति की सेंसरशिप की प्रतीकात्मक रूप से आलोचना करता है. प्रदर्शनकारियों का ऐसा भी मानना है कि सिर्फ कोरे कागज पकड़ने के लिए सरकार उनको गिरफ्तार नहीं कर सकती. यही कारण है कि वो इसका इस तरह से उपयोग कर रहे हैं. ‘ब्लैंक पेज रिवोल्यूशन’ के अलावा, लोग इसमें इस्तेमाल किए जा रहे कोरे कागज के आकार का हवाला देते हुए इसे ‘श्वेत पत्र क्रांति’ और ‘A4 क्रांति’ भी कह रहे हैं.

दुनियाभर में बटोरी सुर्खियां

चीन के ब्लैंक पेज रिवोल्यूशन ने पूरी दुनिया का ध्यान खींचा. ग्लोबल कम्युनिटी ने भी विरोध प्रदर्शनों का समर्थन किया और चीनी सरकार की आलोचना की. अमेरिकन मैगजीन नेशनल रिव्यू के लिए लिखते हुए जियानली यांग और ब्रैडली थायर ने तर्क दिया कि ब्लैंक पेज रिवोल्यूशन की विरासत लंबी होगी. उन्होंने यह भी तर्क दिया कि इसका परिणाम बहुआयामी है और यह एक ऐसी क्रांति को जन्म देगा, जिससे एक वक्त में चीन भी आजाद महसूस करेगा.

यांग और थायर ने कहा कि शी जिनपिंग (Xi Jinping) अपने साथियों और लोगों में भय पैदा करने के लिए और एक अजेय महान नेता के रूप में अपनी छवि को बढ़ावा देने के लिए अपनी शक्ति में सब कुछ करने की कोशिश करेंगे. उन्होंने कहा, “अंतरराष्ट्रीय समुदाय को लोकतंत्र समर्थक ताकतों का समर्थन करने और बीजिंग शासन को बल का सहारा लेने से रोकने के लिए सभी उपलब्ध साधनों का उपयोग करना चाहिए.”

‘चीन में बड़े बदलाव हो सकते हैं’

उन्होंने आगे कहा, “दुनिया उत्सुकता से कम्युनिस्ट चीन के अकल्पनीय पतन को देख रही है, क्योंकि विश्लेषकों का मानना ​​है कि अगर शी जिनपिंग ने जीरो कोविड पॉलिसी नहीं छोड़ी तो इससे बड़े बदलाव हो सकते हैं और इस वक्त चीन एक बड़े मोड़ के बीच में है.”

उल्लेखनीय है कि ह्यूमन राइट्स वॉच (HRW) के अनुसार, सप्ताहांत में चीन के सबसे बड़े शहर और वित्तीय केंद्र शंघाई में हजारों लोगों ने सार्वजनिक रूप से सरकार के सख्त कोविड-19 प्रतिबंधों का विरोध करना शुरू कर दिया था और चीनी कम्युनिस्ट पार्टी (CCP) के सत्तावादी शासन की निंदा की थी. देश भर के विश्वविद्यालय के छात्र प्रदर्शन करने के लिए अपने परिसरों में एकत्र हुए वुहान, चेंगदू, बीजिंग और अन्य बड़े शहरों में सैकड़ों लोग सड़कों पर उतर आए.

गुजरात चुनाव में दूसरे चरण की वो 5 सीट और उनके प्रत्याशियों का जानिए हाल, कहां-कौन-किसे दे रहा टक्कर

गांधीनगर। Gujarat Assembly Election 2022: गुजरात विधनसभा चुनाव में दूसरे चरण की वोटिंग के लिए चुनाव प्रचार अभियान का आज अंतिम दिन है। शाम 5 बजे के बाद प्रचार अभियान थम जाएगा। इसके बाद 5 दिसंबर की सुबह 8 बजे वोटिंग होगी, जो उस दिन शाम पांच बजे तक चलेगी। भाजपा इस राज्य में बीते 27 साल से यानी 1995 से काबिज है और सातवीं बार सत्ता में आकर नया रिकॉर्ड कायम कर सकती है। पिछले चुनाव में भाजपा ने राज्य की कुल 182 विधानसभा सीट में से 99 पर जीत दर्ज की थी। कांग्रेस के खाते में 77 सीट गई थी, जबकि दो सीट बीटीपी और एक सीट एनसीपी को मिली। 3 सीट पर निर्दलीय उम्मीदवार भी जीते। अब राज्य में जहां मामला दो ध्रुवीय होता था, वहीं इस बार आम आदमी पार्टी के भी मैदान में आने से लड़ाई त्रिकोणीय हो गई है। आइए दूसरे चरण की 5 प्रमुख सीटों पर आंकड़ों के जरिए एक नजर डालते हैं। 

इन 5 सीट पर रहेगी सबकी नजर 

  • घाटलोदिया से भूपेंद्र पटेल प्रत्याशी हैं 
  • वडगाम से जिग्नेश मेवाणी उम्मीदवार हैं 
  • वीरमगाम से हार्दिक पटेल प्रत्याशी है 
  • गोधरा से सीके राउलजी उम्मीदवार हैं 
  • गांधीनगर दक्षिण से अल्पेश ठाकोर प्रत्याशी हैं 

घाटलोदिया: भूपेंद्र पटेल (BJP) बनाम अमि याग्निक (Congress) 
अहमदाबाद की 21 सीटों में से एक घाटलोडिया सीट पर भूपेंद्र पटेल मैदान में हैं। पिछला चुनाव उन्होंने इसी सीट से एक लाख 17 हजार 750 वोटों के अंतर से जीता था। अहमदाबाद नगर निगम की स्थायी समिति के अध्यक्ष रह चुके भूपेंद्र पटेल ने 12 सितंबर 2021 को विजय रूपानी से मुख्यमंत्री पद का कार्यभार संभाला। कांग्रेस से पहली बार विधायक का चुनाव लड़ रहे अमि याग्निक को पार्टी ने 2018 में सांसद बनाकर राज्यसभा भेजा था। आम आदमी पार्टी ने मुख्यमंत्री से मुकाबले के लिए विजय पटेल को मैदान में उतारा है। 

वडगाम: जिग्नेश मेवाणी (Congress) बनाम मणिलाल वाघेला (BJP)
पिछली बार इस सीट से जिग्नेश मेवाणी जीते थे, मगर निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर। हालांकि, कांग्रेस ने प्रत्याशी नहीं उतारा और अपना पूरा समर्थन उन्हें दे दिया था। इस बार मेवाणी सीधे कांग्रेस के टिकट पर ही चुनाव लड़ रहे हैं। वहीं, भाजपा ने जिसे मैदान में उतारा है, वे पुराने कांग्रेसी ही हैं और नाम है उनका मणिलाल वाघेला। वाघेला इस सीट से 2012 में कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़े थे और भाजपा प्रत्याशी को 21 हजार 839 वोटों से हराकर विधानसभा पहुंचे थे। हालांकि, इस सीट पर आम आदमी पार्टी और एआईएमआईएम ने भी प्रत्याशी उतारे हैं और ये दोनों भी कांग्रेस के लिए चुनौती बने हुए हैं। 

वीरमगाम: हार्दिक पटेल (BJP) बनाम लखाभाई भारवाड़ (Congress) 
भाजपा ने इस सीट से जिस हार्दिक पटेल को मैदान में उतारा है, उन्हीं की वजह से पिछले चुनाव में पार्टी को कई सीटों का नुकसान हुआ। चुनाव के बाद हार्दिक पटेल ने पाटीदार आंदोलन बंद कर दिया और वे 12 मार्च 2019 को कांग्रेस में चले गए। इसके बाद करीब सात महीने पहले वे भाजपा में आ गए। वे पहली चुनावी यात्रा भाजपा के साथ वीरमगाम सीट से शुरू कर रहे हैं। कांग्रेस ने उनसे मुकाबले के लिए लखाभाई भरवाड़ को टिकट दिया है। भरवाड़ यहां से मौजूदा विधायक हैं और पिछले चुनाव में भाजपा के तेजश्री पटेल को करीब साढ़े छह हजार मतों से हरा चुके हैं। 

गांधीनगर दक्षिण: अल्पेश ठाकोर (BJP) बनाम हिमांशु पटेल (Congress)
पिछले विधानसभा चुनाव में हार्दिक के साथ-साथ अल्पेश ठाकोर ने भी भाजपा को नुकसान पहुंचाया था। चुनाव के समय अल्पेश कांग्रेस में चले गए उसके टिकट पर राधनपुर से जीत गए। हालांकि, 2019 में कांग्रेस रास नहीं आई और भाजपा में शामिल हो गए। उपचुनाव हुआ उसी सीट पर मगर हार गए। भाजपा ने इस बार पार्टी की सुरक्षित माने जाने वाली सीट गांधीनगर दक्षिण से टिकट दिया है। कांग्रेस ने इस बार हिमांशु पटेल को मैदान में उतारा है। 

गोधरा: सीके राउलजी (BJP) बनाम रश्मिताबेन चौहान (Congress) 
भाजपा के लिए गोधरा अहम सीट है। पार्टी ने इस बार पूर्व कांग्रेसी नेता सीके राउलजी को मैदान में उतारा है। राउलजी 2007 और 2012 में यह सीट कांग्रेस के टिकट पर जीत चुके हैं। पिछली बार चुनाव से पहले जब वे भाजपा में शामिल हुए तो पार्टी ने उन्हें मैदान में उतारा और तीसरी बार भी जीत दर्ज की। हालांकि, वोटों का अंतर महज 258 था। कांग्रेस ने उनसे मुकाबले के लिए रश्मिताबेन चौहान को टिकट दिया है, जबकि आप ने राजेश पटेल को मैदान में उतारा है। इसके अलावा एआईएमआईएम ने हसन शब्बीर को टिकट दिया है। 

दूसरे चरण के लिए आज शाम 5 बजे खत्म हो जाएगा चुनाव प्रचार अभियान, ये बड़े नेता अंतिम दिन भी दिखाएंगे दम

गांधीनगर।  Gujarat Assembly Election 2022: गुजरात विधानसभा चुनाव में कुल 182 सीटों पर चुनाव इस बार दो चरणों में हो रहे हैं। पहले चरण की वोटिंग 19 जिलों की 89 सीटों पर बीते 1 दिसंबर को हो चुकी है। वहीं, 14 जिले की 93 सीटों पर वोटिंग सोमवार, 5 दिसंबर को होगी। ऐसे में दूसरे चरण के लिए चुनाव प्रचार आज शनिवार शाम पांच बजे थम जाएगा। इस चरण में 833 उम्मीदवार मैदान में हैं, जिनमें निर्दलीय भी शामिल हैं। ये सभी वोटर्स को लुभाने की अंतिम कोशिश में जुटे हैं। 

पहले चरण में सौराष्ट्र-कच्छ और दक्षिण गुजरात की 89 सीट पर वोटिंग हुई, जबकि दूसरे चरण में उत्तर गुजरात और मध्य गुजरात की 93 विधानसभा सीट पर वोटिंग होगी। चुनाव आयोग के अनुसार, पहले चरण में 63.14 प्रतिशत वोटिंग हुई, जबकि पिछले चुनाव में यह आंकड़ा 66.75 प्रतिशत था। पहले चरण में जहां भाजपा, कांग्रेस और आप समेत छोटी-बड़ी 39 पार्टियां मैदान में थीं, वहीं दूसरे चरण में यह आंकड़ा करीब 60 तक पहुंच गया है। इस बार दोनों चरणों का रिजल्ट 8 दिसंबर को आएगा। 

प्रमुख प्रत्याशी कौन-कौन इस चरण में 
दूसरे चरण में जो प्रमुख उम्मीदवार हैं, उनमें घाटलोदिया से भूपेंद्र पटेल, वीरमगाम से हार्दिक पटेल, गोधरा से सीके राउलजी, गांधीनगर दक्षिण से अल्पेश ठाकोर और वडगाम सीट से जिग्नेश मेवाणी मैदान में हैं। सभी राजनीतिक दल एक के बाद रैली और रोड शो कर रहे हैं। वहीं, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 1 दिसंबर को 50 किलोमीटर लंबा रोड शो निकालकर एक रिकॉर्ड कायम कर दिया। 

आज किसकी कहां-कहां रैली-रोड  शो 
हालांकि, चुनाव प्रचार के अंतिम दिन यानी आज भी भाजपा जोरशोर से प्रचार करने में जुटी है। पार्टी ने कई स्टार प्रचारकों को मैदान में उतारा है। इसमें उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ धोलका में, महुधा में और खंभाट में रैली और रोड शो करेंगे। वहीं, केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी मोडासा और सिद्धपुर में रैली और रोड शो करेंगी। 

गलवान की घटना के बाद LAC पर बदले हालात, प्रमुख पहाड़ी दर्रों तक चीनी सैनिकों से पहले पहुंच सकते हैं हमारे जवान

नई दिल्ली। एलएसी (Line of Actual Control) पर चीन और भारत के सैनिक आमने-सामने हैं। दो साल पहले गलवान घाटी में हुए संघर्ष ( Galwan Valley face off) के बाद तनाव चरम पर पहुंच गया था। सेना के स्तर पर कई दौर की बातचीत के बाद कम हुआ है और कई क्षेत्रों में दोनों देशों के सैनिक पीछे हटे हैं। 

चीन की ओर से एलएसी पर शेल्टर बनाए गए हैं ताकि ठंड के मौसम में भी सैनिकों को तैनात रखा जा सके। दूसरी ओर भारत की ओर से एलएसी के करीब आधारभूत संरचनाओं को विकसित किया जा रहा है ताकि जरूरत पड़ने पर सैनिकों को तेजी से मोर्चे तक पहुंचाया जा सके। 

बदल गई है LAC पर स्थिति
गलवान की घटना के बाद एलएसी पर स्थिति काफी बदल गई है। कई प्रमुख पहाड़ी दर्रों तक चीनी सैनिकों से पहले भारतीय सेना के जवान पहुंच सकते हैं। एलएसी के मध्य क्षेत्र में सड़कों और पुलों के निर्माण सहित कई इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स पर तेजी से काम हो रहा है। इससे भारतीय जवानों को पेट्रोलिंग करने में भी काफी मदद मिल रही है।

चीन ने हाल के वर्षों में उत्तरी क्षेत्र से लेकर पूर्वी क्षेत्र तक एलएसी पर आक्रामक रुख अपनाया है। चीन की ओर से कई बार सीमा का उल्लंघन किया गया। चीनी सैनिकों ने भारतीय क्षेत्र में घुसपैठ की है। इसके साथ ही चीन एलएसी के अपने हिस्से में बड़ी तेजी से सड़क, पुल और अन्य इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स पर काम कर रहा है। इसे देखते हुए भारत भी हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में अपनी सैन्य तैयारियों और बुनियादी ढांचे को मजबूत कर रहा है। 

सीमावर्ती क्षेत्रों में मजबूत है भारत की स्थिति
चीन ने उत्तराखंड के बाराहोती क्षेत्र में कई बार सीमा का उल्लंघन किया है। इसके अलावा पिछले कुछ समय में मध्य क्षेत्र में चीन की ओर से भारतीय क्षेत्र में घुसपैठ की कोशिश नहीं हुई है। रक्षा प्रतिष्ठान के सूत्रों ने कहा है कि गलवान घाटी में आमना-सामना होने के बाद जमीन पर सब कुछ बदल गया है। चीन के साथ सीमाओं पर संवेदनशीलता बहुत अधिक है। भारत ने सीमावर्ती क्षेत्रों में अपनी स्थिति मजबूत कर ली है।

एलएसी के मध्य क्षेत्र को हमेशा से तयशुदा सीमा माना जाता रहा है। मई 2020 में पूर्वी लद्दाख के गलवान घाटी में हुई घटना के बाद चीजें बदल गईं हैं। अग्रिम मोर्चे पर सैनिकों को तेजी से पहुंचाने के लिए सरकार ने मध्य क्षेत्र में भी सड़क और पुल जैसे इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स पर फोकस किया है। विशेष रूप से उत्तराखंड के हर्षिल, माणा, नीती और बाराहोती घाटियों में काम किया गया है। इस क्षेत्र में सड़कों और पुलों का निर्माण किया गया है। इसके साथ ही कई अन्य इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स को तेजी से पूरा किया जा रहा है। इस क्षेत्र के कई महत्वपूर्ण पहाड़ी दर्रे में चीनी सैनिकों के आने से पहले ही भारतीय सैनिक पहुंच सकते हैं। हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में एलएसी पर 20 से अधिक ऐसे दर्रे हैं जहां सड़कें बनाई गईं हैं। 

3,488 किलोमीटर लंबा है LAC
गौरतलब है कि भारत और चीन की सीमा 3,488 किलोमीटर लंबी है। यह सीमा दूसरे अंतरराष्ट्रीय सीमा की तरह निर्धारित नहीं है। इसके चलते इसे वास्तविक नियंत्रण रेखा कहते हैं। एलएसी लद्दाख से लेकर अरुणाचल प्रदेश तक है। लद्दाख को उत्तरी क्षेत्र, अरुणाचल प्रदेश को पूर्वी क्षेत्र और हिमाचल प्रदेश व उत्तराखंड में पड़ने वाली सीमा को मध्य क्षेत्र कहा जाता है। मध्य क्षेत्र के एलएसी की लंबाई 545 किलोमीटर है। चीन के साथ तनातनी के बाद भारत ने पूर्वी लद्दाख में टैंकों को तैनात कर दिया था। चीन की सेना को उम्मीद नहीं थी कि भारत इतने ऊंचे इलाके में टैंक तैनात कर देगा। मध्य क्षेत्र में भी एलएसी के पास बख्तरबंद वाहनों की तैनाती की गई है।

पीएम मोदी की तुलना ‘रावण’ से करने के बाद खड़गे की पहली सफाई आई सामने, बताया क्या मतलब था उनका

गांधीनगर। Gujarat Assembly Election 2022: गुजरात विधानसभा चुनाव के बीच अहमदाबाद की एक रैली में बीते सोमवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तुलना रावण से करने के बाद कांग्रेस के नवनियुक्त राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे आलोचनाओं का सामना कर रहे हैं। इस टिप्पणी के बाद खड़गे ने शनिवार को अपनी पहली सफाई पेश की और इसका मकसद बताया। खड़गे ने एक बार फिर भाजपा पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि भारतीय जनता पार्टी गुजरात में चुनावी लाभ के लिए उनकी टिप्पणी का दुरुपयोग कर रही है। खड़गे ने यह भी कहा कि उनकी टिप्पणी किसी राजनीतिक व्यक्ति के लिए नहीं बल्कि नीतियों को लेकर की गई थी। 

एक समाचार एजेंसी से बात करते हुए इस टिप्पणी के बाद उपजे विवाद पर अपना पहला रिएक्शन देते हुए खड़गे ने कहा कि वह प्रदर्शन की राजनीति में भरोसा करते हैं। मगर भाजपा की राजनीतिक शैली में अक्सर लोकतांत्रिक भावनाओं की कमी होती है। ऐसा इसलिए क्योंकि वे इसे केवल एक व्यक्ति के बारे में बनाते और प्रदर्शित करते हैं, जो कि हर जगह है। खड़गे ने कहा कि भाजपा चुनावी लाभ के लिए राज्य में रावण वाली टिप्पणी का दुरुपयोग कर रही है। 

यह किसी राजनीतिक व्यक्ति के बारे में नहीं था 
खड़गे ने कहा कि उनकी यह टिप्पणी किसी राजनीतिक व्यक्ति के लिए नहीं बल्कि, नीतियों को लेकर की गई थी। यह भाजपा के शो ऑफ यानी दिखावे और प्रदर्शन को लेकर कही गई थी। यह उस तरह की राजनीति को लेकर कही गई, जिसे भाजपा अमल में लाती है। हालांकि, पार्टी इसे केवल उस एक व्यक्ति के बारे में बता रही है, जो हर जगह दिख रहा है। खड़गे ने कहा कि भाजपा और प्रधानमंत्री राजनीति की शैली में अक्सर लोकतंत्र की भावना का अभाव होता है। मैंने अपनी टिप्पणी में चुनाव के सभी स्तर पर उनके प्रचार की शैली को लेकर उदारहण दिए, मगर वे चुनावी फायदे के लिए इसे दूसरे तरह से देख रहे और इसका दुरुपयो कर रहे हैं। 

आप केवल कांग्रेस के वोट बांट रही 
यहीं नहीं, खड़गे ने गुजरात चुनावों में आम आदमी पार्टी के आने या मजबूत होने की संभावनाओं को खारिज कर दिया। खड़गे ने यह आरोप भी लगाया कि आम आदमी पार्टी भाजपा के इशारे पर कांग्रेस के वोट बांटने के लिए काम कर रही है। बता दें कि राज्य में दूसरे चरण की वोटिंग 5 दिसंबर को हैं। मतदान प्रक्रिया सुबह 8 बजे से शुरू हो जाएगी, जो शाम 5 बजे तक जारी रहेगी। रिजल्ट 8 दिसंबर को जारी होगा, जबकि प्रचार अभियान आज शाम पांच बजे से थम जाएगा। 

टैक्सपेयर्स का पैसा कांग्रेस ने परिवार-रिश्तेदार-निजी जरूरत पर खर्च किया, अब भारत के अरब देशों से अच्छे संबंध

गांधीनगर। Gujarat Assembly Election 2022: गुजरात विधानसभा चुनाव में दूसरे और अंतिम चरण के लिए प्रचार अभियान का आज अंतिम दिन है। शाम 5 बजे प्रचार अभियान समाप्त हो जाएगा। इसके बाद सोमवार, 5 दिसंबर को वोटिंग है। इस बीच, सभी राजनीतिक दलों ने जोरशोर से प्रचार किया और घोषणा पत्र में जनता को लुभाने वाले दावे तथा वादे किए हैं। हालांकि, कांग्रेस की ओर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निजी टिप्पणी भी की गई, जिसे सत्ताधारी दल ने अपमानजनक भी बताया। कांग्रेस को इन टिप्पणियों की वजह से आलोचनाओं का सामना भी करना पड़ा है। 

दूसरी ओर, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पाटन में रैली को संबोधित करते हुए शुक्रवार को कहा कि 2014 में एनडीए के नेतृत्व वाली भाजपा की सरकार बनने के बाद से सऊदी अरब जैसे इस्लामिक देशों के साथ भारत के संबंध मजबूत हुए हैं। अब जबकि अंतिम चरण की वोटिंग में केवल दो दिन हैं, कांग्रेस वोटिंग मशीन यानी ईवीएम के साथ छेड़छाड़ के आरोप लगा रही है। पार्टी का यह दावा साबित करता है कि गुजरात विधानसभा चुनाव में इन्होंने हार स्वीकार कर ली है। 

भारत ने इस्लामिक देशों से संबंध मजबूत किए  
प्रधानमंत्री मोदी ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए दावा किया कि कांग्रेस और उसकी सरकारों ने परिवार, रिश्तेदारों और निजी जरूरतों के लिए टैक्सपेयर्स यानी कर दाताओं का पैसा उड़ाया है। प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत ने 2014 के बाद इस्लामिक राष्ट्रों से संबंध मजबूत किए हैं। यह मेरे लिए और साथ ही हर गुजराती के लिए गर्व की बात है कि संयुक्त अरब अमीरात यानी यूएई, सऊदी अरब और बहरीन जैसे इस्लामिक देशों ने मुझे अपने सर्वोच्च पुरस्कारों से सम्मानित भी किया है। प्रधानमंत्री ने कहा कि अब तक सऊदी अरब में योग वहां के ऑफिशियल सेलाबस यानी आधिकारिक पाठ्यक्रम का हिस्सा भी है। 

कांग्रेस के शासन में अर्थव्यस्था काफी गिर गई 
प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में कहा बहरीन और अबू धाबी जैसे इस्लामिक देशों में भव्य हिंदू मंदिर भी बन रहे हैं। उन्होंने कहा कि कांग्रेस पहले परिवार को प्राथमिकता देती है, जबकि भाजपा इसके विपरित पार्टी की जगह पहले देश को आगे रखती है। प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत जब 1947 में आजाद हुआ तब यहां की अर्थव्यवस्था छठें स्थान पर थी, मगर 2014 में जब कांग्रेस से सत्ता ली गई, तब यह अर्थव्यवस्था 10वें स्थान पर आ गई थी। हालांकि, भाजपा के शासन में आने के बाद 2014 से यानी बीते 8 साल में भारत की अर्थव्यवस्था 10वें से 5वें स्थान पर आ चुकी है। कांग्रेस ऐसा नहीं कर सकी, क्योंकि वह वंशवादी राजनीति कर रही थी। घोटालों में लिप्त थी और तुष्टिकरण को बढ़ावा दे रही थी।