हज यात्रा के बीच पीएम मोदी की सऊदी यात्रा: रणनीतिक साझेदारी को मिलेगा नया आयाम, IMEC रहेगा केंद्र में

हज यात्रा के बीच पीएम मोदी की सऊदी यात्रा: रणनीतिक साझेदारी को मिलेगा नया आयाम, IMEC रहेगा केंद्र में

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस अप्रैल के तीसरे सप्ताह में सऊदी अरब की यात्रा पर जा सकते हैं, जो दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने का मार्ग प्रशस्त करेगी। यह यात्रा व्यापार, निवेश, ऊर्जा, रक्षा और क्षेत्रीय सुरक्षा जैसे प्रमुख क्षेत्रों में सहयोग को विस्तार देने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है। इसके साथ ही भारत-मध्य पूर्व-यूरोप आर्थिक गलियारे (IMEC) को लेकर भी गहन चर्चा होने की संभावना है।

सूत्रों के अनुसार, प्रधानमंत्री मोदी की यह यात्रा दो दिवसीय हो सकती है, हालांकि अभी तक आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। यह दौरा लगभग चार साल बाद होगा, जब पीएम मोदी सऊदी अरब की भूमि पर कदम रखेंगे। इससे पहले अप्रैल 2016 में हुई उनकी रियाद यात्रा को भारत-सऊदी संबंधों में एक नया अध्याय माना गया था।

IMEC पर केंद्रित रहेगा दौरा

इस यात्रा का एक प्रमुख उद्देश्य भारत-मध्य पूर्व-यूरोप आर्थिक गलियारे (IMEC) को लेकर ठोस कदम उठाना है। सितंबर 2023 में नई दिल्ली में आयोजित G20 शिखर सम्मेलन के दौरान भारत, सऊदी अरब, अमेरिका, यूएई, फ्रांस, जर्मनी, इटली और यूरोपीय संघ के बीच इस मेगा प्रोजेक्ट को लेकर समझौता हुआ था। IMEC का उद्देश्य एशिया से यूरोप तक व्यापार को तेज और सुगम बनाना है, जो चीन के बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव के विकल्प के तौर पर देखा जा रहा है।

भारत-सऊदी संबंधों में आई मजबूती

पिछले कुछ वर्षों में भारत और सऊदी अरब के बीच द्विपक्षीय संबंधों में उल्लेखनीय प्रगति हुई है। खाड़ी देश में करीब 26 लाख भारतीयों की उपस्थिति दोनों देशों के गहरे संबंधों को दर्शाती है। यह भारतीय प्रवासी समुदाय दोनों देशों के बीच एक सशक्त सेतु का कार्य कर रहा है।

व्यापार और निवेश में दिखी मजबूती

साल 2023-24 के दौरान भारत और सऊदी अरब के बीच द्विपक्षीय व्यापार 42.98 बिलियन डॉलर तक पहुंच गया, जिसमें भारत ने 11.56 बिलियन डॉलर का निर्यात और 31.42 बिलियन डॉलर का आयात किया। भारत, सऊदी अरब का दूसरा सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है, जबकि सऊदी अरब भारत का पांचवां सबसे बड़ा व्यापारिक सहयोगी है।

इसी तरह, सऊदी अरब में भारतीय निवेश भी तेजी से बढ़ा है। अगस्त 2023 तक यह निवेश 3 बिलियन डॉलर के आंकड़े को पार कर गया। भारतीय कंपनियों ने विभिन्न क्षेत्रों जैसे कंसल्टेंसी, निर्माण, दूरसंचार, आईटी, वित्तीय सेवाएं, फार्मास्यूटिकल्स आदि में अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज की है। एलएंडटी, टाटा मोटर्स, टीसीएस, विप्रो, टेक महिंद्रा, शापूरजी पल्लोनजी और वेदांता जैसी प्रमुख कंपनियां इस सूची में शामिल हैं।

रणनीतिक और सुरक्षा सहयोग पर भी होगी बात

पीएम मोदी की इस प्रस्तावित यात्रा के दौरान रक्षा और क्षेत्रीय सुरक्षा सहयोग पर भी चर्चा की उम्मीद है। नवंबर 2023 में सऊदी विदेश मंत्री प्रिंस फैसल बिन फरहान अल सऊद की भारत यात्रा के दौरान इन मुद्दों पर पहले ही सकारात्मक संवाद हो चुका है। अब प्रधानमंत्री मोदी की यात्रा से इन क्षेत्रों में सहयोग को ठोस दिशा मिलने की उम्मीद की जा रही है।

इस बहुप्रतीक्षित दौरे से यह स्पष्ट है कि भारत और सऊदी अरब अपने रिश्तों को केवल ऊर्जा और व्यापार तक सीमित नहीं रखना चाहते, बल्कि उन्हें रणनीतिक साझेदारी के एक व्यापक फ्रेमवर्क में ढालने के लिए प्रतिबद्ध हैं।

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