रूस और पश्चिमी देशों के बीच यूक्रेन युद्ध को लेकर तनाव लगातार बढ़ा हुआ है। इसी बीच यूरोप की सुरक्षा को लेकर सामने आई एक नई रिपोर्ट ने एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। क्या दुनिया किसी बड़े सैन्य टकराव की ओर बढ़ रही है? क्या रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन NATO देशों को निशाना बनाने की तैयारी कर रहे हैं? स्पेनिश अखबार El Mundo की एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि अमेरिकी खुफिया एजेंसियों ने यूरोपीय देशों को रूस की संभावित ड्रोन कार्रवाई को लेकर चेतावनी दी है। रिपोर्ट के मुताबिक, रूस भूमध्यसागर में मौजूद व्यापारिक जहाजों से ड्रोन लॉन्च कर सकता है और इनका इस्तेमाल स्पेन, फ्रांस या इटली जैसे NATO देशों के खिलाफ किया जा सकता है। हालांकि, इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। फ्रांस और इटली के अधिकारियों ने भी कथित CIA चेतावनी की पुष्टि नहीं की है। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या यह वास्तव में NATO पर रूसी हमले की तैयारी है या फिर यूरोप में बढ़ते सुरक्षा खतरे को लेकर एक खुफिया आशंका?
क्या रूस NATO देशों पर हमला करने की तैयारी कर रहा है?
फिलहाल रूस की ओर से NATO पर हमला करने की किसी निश्चित योजना की सार्वजनिक पुष्टि नहीं हुई है। लेकिन यूरोपीय सुरक्षा और खुफिया अधिकारियों की हालिया चेतावनियों ने इस संभावना को लेकर चर्चा जरूर बढ़ा दी है। यूक्रेन युद्ध के बाद रूस और NATO के बीच तनाव अपने सबसे गंभीर दौरों में बना हुआ है। अमेरिका और यूरोप के कई NATO देश यूक्रेन को हथियार और दूसरी सैन्य सहायता दे रहे हैं, जबकि रूस लगातार पश्चिमी देशों की भूमिका पर सवाल उठाता रहा है। यूरोप के कुछ सुरक्षा अधिकारियों का आकलन है कि रूस आने वाले महीनों में NATO की प्रतिक्रिया और एकजुटता को परखने के लिए सीमित कार्रवाई कर सकता है। इसका मतलब जरूरी नहीं कि रूस सीधे किसी NATO देश के खिलाफ पूर्ण युद्ध शुरू करे। यह ड्रोन, साइबर हमले, तोड़फोड़ या दूसरी हाइब्रिड गतिविधियों के रूप में भी हो सकता है। यही वजह है कि यूरोपीय देशों में इस बात को लेकर चिंता है कि कहीं कोई छोटी घटना आगे चलकर बड़े सैन्य टकराव का कारण न बन जाए।
क्या है रूस के कथित ड्रोन हमले का प्लान?
El Mundo की रिपोर्ट में दावा किया गया है कि रूस छोटे Gerbera ड्रोन का इस्तेमाल कर सकता है। इन ड्रोन को सामान्य व्यापारिक जहाजों में मौजूद कंटेनरों के भीतर छिपाकर भूमध्यसागर के अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र से लॉन्च किए जाने की बात कही गई है। रिपोर्ट के अनुसार, ऐसे ड्रोन करीब 600 किलोमीटर तक की दूरी तय कर सकते हैं। इनकी क्षमता बड़े सैन्य ठिकानों को तबाह करने जैसी नहीं है, लेकिन इनका इस्तेमाल आग लगाने, खुले में मौजूद उपकरणों को नुकसान पहुंचाने या किसी महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे के कामकाज में अस्थायी व्यवधान पैदा करने के लिए किया जा सकता है। रिपोर्ट में किसी खास लक्ष्य की सार्वजनिक रूप से पुष्टि नहीं की गई है। लेकिन इसमें स्पेन, फ्रांस और इटली को संभावित खतरे वाले देशों के तौर पर बताया गया है। ये तीनों NATO के सदस्य हैं और यूक्रेन को अलग-अलग स्तर पर समर्थन देने वाले यूरोपीय देशों में शामिल हैं। अगर इस तरह की किसी योजना की पुष्टि होती है, तो इसका असर सिर्फ भौतिक नुकसान तक सीमित नहीं रहेगा। किसी बंदरगाह, एयरपोर्ट या दूसरे महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे के आसपास ड्रोन हमला सुरक्षा व्यवस्था, आर्थिक गतिविधियों और लोगों के बीच डर पर भी असर डाल सकता है।
Gerbera ड्रोन को लेकर क्यों बढ़ी चिंता?
Gerbera रूस में विकसित एक छोटा ड्रोन है, जिसके यूक्रेन युद्ध में इस्तेमाल किए जाने की रिपोर्टें सामने आई हैं। इसका अपेक्षाकृत छोटा आकार और लंबी दूरी तक उड़ान भरने की क्षमता इसे अलग तरह की सैन्य रणनीति में इस्तेमाल किए जाने की संभावना से जोड़ती है। यही कारण है कि भूमध्यसागर से ड्रोन लॉन्च किए जाने की कथित योजना में इसका नाम सामने आया है। अगर किसी ड्रोन को व्यापारिक जहाज के कंटेनर से लॉन्च किया जाए तो उसे सीधे किसी सैन्य ठिकाने या लॉन्च साइट से जोड़ना मुश्किल हो सकता है। हालांकि, यह ध्यान रखना जरूरी है कि ये सभी बातें El Mundo की रिपोर्ट में किए गए दावों पर आधारित हैं। इनकी स्वतंत्र पुष्टि अभी सार्वजनिक रूप से नहीं हुई है।
क्या अमेरिका ने सच में यूरोप को रूस के हमले की चेतावनी दी?
यह इस पूरे मामले का सबसे अहम सवाल है। El Mundo ने दावा किया है कि अमेरिकी खुफिया एजेंसियों ने यूरोपीय सरकारों को रूस की कथित ड्रोन योजना को लेकर चेतावनी दी थी। रिपोर्ट में इस घटनाक्रम को CIA निदेशक जॉन रैटक्लिफ की अगस्त में मॉस्को यात्रा के बाद की घटनाओं से जोड़ा गया है। लेकिन यहां तस्वीर पूरी तरह साफ नहीं है। फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने कहा कि CIA ने फ्रांस को ऐसी कोई जानकारी नहीं दी थी। इटली के रक्षा मंत्री गुइडो क्रोसेटो ने भी रिपोर्ट में बताए गए कथित अमेरिकी अलर्ट की पुष्टि नहीं की है। इसलिए अभी यह कहना मुश्किल है कि यूरोपीय देशों को वास्तव में ऐसी कोई औपचारिक अमेरिकी खुफिया चेतावनी दी गई थी या नहीं। यानी एक तरफ मीडिया रिपोर्ट में अमेरिकी खुफिया एजेंसियों के हवाले से दावा है, जबकि दूसरी तरफ संबंधित देशों के अधिकारियों की ओर से इसकी पुष्टि नहीं की गई है।
फिर यूरोप में रूस को लेकर इतना डर क्यों है?
रूस को लेकर यूरोप की चिंता सिर्फ इस एक रिपोर्ट की वजह से नहीं है। पिछले कुछ समय से यूरोपीय देशों में ड्रोन, साइबर हमले, कथित तोड़फोड़ और दूसरे हाइब्रिड खतरों को लेकर चिंता बढ़ी है। पूर्वी यूरोप के कई NATO देशों के हवाई क्षेत्र में रूसी ड्रोन से जुड़ी घटनाओं ने भी तनाव बढ़ाया है। पोलैंड, रोमानिया, लिथुआनिया और लातविया जैसे देशों ने रूस की संभावित गतिविधियों को लेकर अपनी सुरक्षा व्यवस्था मजबूत की है। यूरोपीय खुफिया अधिकारियों का एक वर्ग मानता है कि रूस सीधे बड़े युद्ध की बजाय सीमित कार्रवाई करके NATO की प्रतिक्रिया को परख सकता है। ऐसी स्थिति में किसी छोटे ड्रोन हमले या सीमा उल्लंघन को लेकर NATO की प्रतिक्रिया भविष्य के लिए एक बड़ा संकेत बन सकती है। यही वजह है कि यूरोप में अब सिर्फ पारंपरिक युद्ध की तैयारी नहीं बल्कि साइबर हमले, ड्रोन हमले, दुष्प्रचार और बुनियादी ढांचे पर संभावित हमलों को भी सुरक्षा रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।
क्या कुछ ही महीनों में NATO से टकरा सकता है रूस?
कुछ यूरोपीय सुरक्षा अधिकारियों ने आने वाले महीनों में रूस की ओर से NATO को परखने वाली कार्रवाई की संभावना जताई है। चेक गणराज्य की सुरक्षा सेवा के प्रमुख मिशाल कौडेलका ने भी NATO क्षेत्र में रूसी घुसपैठ की संभावना और संभावित फॉल्स-फ्लैग या प्रभाव अभियानों को लेकर चिंता जताई है। लेकिन दूसरी तरफ सभी अधिकारी इस खतरे को एक जैसा नहीं देखते। लातविया की सुरक्षा सेवा के प्रमुख नोरमुंड्स मेज़विट्स ने कहा है कि उन्हें तत्काल हमले के कोई स्पष्ट संकेत नहीं मिले हैं। उन्होंने यह संभावना भी जताई कि रूस का मकसद सीधे युद्ध करने के बजाय पश्चिमी देशों में डर और अनिश्चितता पैदा करना हो सकता है। इसका मतलब है कि यूरोप के भीतर भी रूस के खतरे को लेकर अलग-अलग आकलन मौजूद हैं। कुछ अधिकारी संभावित सैन्य कार्रवाई को लेकर सतर्क हैं, जबकि कुछ तत्काल हमले की संभावना को लेकर सावधानी बरतने की बात कह रहे हैं।
क्या इसका मतलब तीसरा विश्व युद्ध शुरू होने वाला है?
यह कहना अभी जल्दबाजी होगी। रूस और NATO के बीच तनाव निश्चित रूप से गंभीर है, लेकिन अभी तक ऐसी कोई सार्वजनिक पुष्टि नहीं हुई है कि रूस ने NATO देशों पर हमला करने का फैसला किया है या तीसरे विश्व युद्ध की शुरुआत होने वाली है। असल चिंता यह है कि अगर रूस और किसी NATO सदस्य देश के बीच कोई गंभीर सैन्य घटना होती है, तो NATO की सामूहिक रक्षा व्यवस्था के कारण मामला तेजी से बड़ा हो सकता है। इसी वजह से यूरोपीय देश छोटी से छोटी सुरक्षा घटना को भी गंभीरता से ले रहे हैं। फिलहाल भूमध्यसागर से रूसी ड्रोन हमले की खबर एक मीडिया रिपोर्ट पर आधारित है और इसकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। वहीं यूरोपीय खुफिया अधिकारियों की चेतावनियां रूस की संभावित भविष्य की गतिविधियों को लेकर हैं, किसी निश्चित हमले की घोषणा नहीं।
इसलिए अभी सबसे सटीक तस्वीर यही है कि तीसरे विश्व युद्ध का अलार्म बजने की पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन रूस और NATO के बीच बढ़ता तनाव यूरोप को संभावित टकराव के लिए सतर्क जरूर कर रहा है। आने वाले दिनों में NATO, यूरोपीय सरकारों और खुफिया एजेंसियों की ओर से सामने आने वाली जानकारी यह साफ करने में अहम होगी कि खतरा कितना वास्तविक और कितना संभावित है।




