Premanand Maharaj Ashram Controversy: वृंदावन स्थित प्रेमानंद महाराज के आश्रम से जुड़े दो मामलों ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। एक परिवार अपने बेटे दीपक लोधी उर्फ रसिक दुलारी शरण की मौत की परिस्थितियों की जांच की मांग कर रहा है, जबकि दूसरा परिवार अपने बेटे अनुज चौधरी से मिलने के लिए आश्रम के बाहर धरने पर बैठा है। आखिर दोनों मामले क्या हैं और इनको लेकर विवाद क्यों बढ़ रहा है? देश के जाने-माने संत प्रेमानंद महाराज के वृंदावन स्थित आश्रम में बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। क्रिकेट, राजनीति और फिल्म जगत से जुड़ी कई चर्चित हस्तियां भी उनसे मुलाकात कर चुकी हैं। इसी बीच आश्रम से जुड़े दो अलग-अलग मामलों ने अब सार्वजनिक बहस को जन्म दिया है। एक मामला दीपक लोधी उर्फ रसिक दुलारी शरण की मौत से जुड़ा है। दूसरा मामला अनुज चौधरी के आश्रम में होने और परिवार से मुलाकात नहीं होने के दावे से संबंधित है। हालांकि, यह स्पष्ट करना जरूरी है कि इन दोनों मामलों में प्रेमानंद महाराज की किसी प्रत्यक्ष आपराधिक भूमिका की पुष्टि अब तक नहीं हुई है। फिलहाल विवाद परिवारों की शिकायतों और मामले की जांच को लेकर है।
रसिक दुलारी शरण की मौत का मामला क्या है?
मध्य प्रदेश के जबलपुर के रहने वाले करीब 25 वर्षीय दीपक लोधी ने प्रेमानंद महाराज से दीक्षा ली थी। इसके बाद उनका नाम रसिक दुलारी शरण हो गया। रिपोर्टों के मुताबिक, वह वृंदावन में रहकर साधु सेवा और बिजली से जुड़े काम करते थे। परिवार का कहना है कि दीक्षा लेने के बाद बेटे से मुलाकात करना पहले की तुलना में मुश्किल हो गया था। परिवार की ओर से यह भी कहा गया कि उनकी मां बेटे से मिलने वृंदावन आई थीं, लेकिन उनकी मुलाकात नहीं हो सकी। इसके बाद 25 सितंबर को रसिक दुलारी शरण की मौत हो गई। रिपोर्टों के मुताबिक, वह गुरु कृपा कुंज नाम की इमारत की चौथी मंजिल से नीचे गिर गए थे। यह इमारत श्रीराधा केली कुंज आश्रम के पास बताई जाती है। स्थानीय रिपोर्टों के अनुसार रसिक दुलारी यहां प्रेमानंद महाराज के एक अन्य शिष्य के साथ रह रहे थे। पुलिस की शुरुआती जांच और सामने आए CCTV फुटेज के आधार पर घटना को आत्महत्या के तौर पर देखा जा रहा है। हालांकि, पुलिस घटना से पहले की परिस्थितियों की भी जांच कर रही है। कुछ रिपोर्टों में रसिक दुलारी के कमरे से ग्राइंडर मिलने और उस पर खून जैसे निशान होने का दावा किया गया है। पोस्टमार्टम को लेकर सामने आई जानकारी में शरीर के कई हिस्सों में गंभीर चोट और अधिक खून बहने की बात भी कही गई है। इन सभी तथ्यों की जांच के बाद ही घटना की वास्तविक परिस्थितियां स्पष्ट होंगी। रसिक दुलारी का परिवार मौत को लेकर सवाल उठा रहा है और मामले की विस्तृत जांच के साथ CBI जांच की मांग किए जाने की बात सामने आई है।
परिवार को क्यों है मौत पर संदेह?
रसिक दुलारी शरण के परिवार के सवाल केवल उनकी मौत को लेकर नहीं हैं, बल्कि घटना से पहले की परिस्थितियों को लेकर भी हैं। परिवार जानना चाहता है कि मौत से पहले रसिक दुलारी किन लोगों के संपर्क में थे, आखिरी बार किससे बात की थी और क्या उन्होंने किसी परेशानी या तनाव का जिक्र किया था। किसी भी संदिग्ध मौत की जांच में पुलिस CCTV फुटेज, मोबाइल फोन, कॉल रिकॉर्ड, घटनास्थल से मिले सामान, फोरेंसिक रिपोर्ट और गवाहों के बयान जैसे पहलुओं को देखती है। यही वजह है कि परिवार जांच पूरी होने का इंतजार कर रहा है। अभी तक सामने आई जानकारी के आधार पर यह निश्चित रूप से नहीं कहा जा सकता कि मौत के पीछे क्या परिस्थितियां थीं। यहां यह अंतर भी महत्वपूर्ण है कि गुरु कृपा कुंज की घटना को सीधे प्रेमानंद महाराज के मुख्य आश्रम परिसर के भीतर हुई घटना बताना सही नहीं होगा। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक घटना पास स्थित इमारत में हुई थी। फिलहाल पुलिस मामले की जांच कर रही है और अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगा।
अब अनुज चौधरी का मामला क्या है?
दूसरा मामला हाथरस के सादाबाद क्षेत्र के रहने वाले अनुज चौधरी से जुड़ा है। अनुज की उम्र को लेकर अलग-अलग रिपोर्टों में अलग-अलग जानकारी सामने आई है। कुछ रिपोर्टों में उसे 16 साल का बताया गया है, जबकि कुछ जगह उम्र 18 साल बताई गई है। अनुज के पिता राजवीर चौधरी का कहना है कि उनके बेटे ने 26 जून को दीक्षा ली थी और इसके बाद वह घर लौट आया था। परिवार के मुताबिक, 3 जुलाई को अनुज प्रेमानंद महाराज के दर्शन करने की बात कहकर घर से निकला था। इसके बाद वह वापस घर नहीं लौटा। परिवार का आरोप है कि उन्होंने अनुज की तलाश शुरू की और आश्रम पहुंचकर उससे मिलने की कोशिश की, लेकिन उन्हें मुलाकात नहीं करने दी गई। इसके बाद 2 अक्टूबर को परिवार और गांव के कुछ लोग श्रीराधा केली कुंज के बाहर धरने पर बैठ गए। परिवार की मांग है कि अगर अनुज आश्रम में है तो उसे उनके सामने लाया जाए और उनसे मुलाकात कराई जाए। वे यह भी जानना चाहते हैं कि उनका बेटा इस समय कहां है और किस स्थिति में है। कुछ रिपोर्टों में आश्रम प्रबंधन की ओर से अनुज के आश्रम में सुरक्षित होने की बात कही गई है। ऐसे में परिवार का सवाल है कि अगर वह आश्रम में है तो उसे परिजनों से मिलने क्यों नहीं दिया जा रहा? अगर अनुज खुद परिवार से नहीं मिलना चाहता तो उसकी इच्छा की स्वतंत्र पुष्टि कैसे होगी? साथ ही उसकी वास्तविक उम्र क्या है, यह भी स्पष्ट होना जरूरी है।
दोनों मामलों को एक साथ क्यों देखा जा रहा है?
रसिक दुलारी शरण और अनुज चौधरी के मामले अलग-अलग हैं। अभी तक ऐसा कोई प्रमाण सामने नहीं आया है जिससे दोनों घटनाओं के बीच सीधा संबंध स्थापित हो। लेकिन दोनों मामलों में एक समान बात जरूर है। दोनों परिवार अपने परिवार के सदस्य से संपर्क और मुलाकात को लेकर शिकायत कर रहे हैं। रसिक दुलारी के परिवार का कहना है कि दीक्षा के बाद बेटे से मिलना मुश्किल हो गया था और बाद में उनकी मौत हो गई। अब परिवार मौत की परिस्थितियों की जांच चाहता है। वहीं अनुज चौधरी का परिवार दावा कर रहा है कि उनका बेटा आश्रम में है, लेकिन उनसे उसकी मुलाकात नहीं कराई जा रही। रसिक दुलारी की मौत के कुछ ही दिन बाद अनुज के परिवार के धरने पर बैठने से दोनों मामलों की चर्चा एक साथ होने लगी। इससे परिवार की चिंता और बढ़ी है, लेकिन केवल इस आधार पर दोनों मामलों को आपस में जोड़ना उचित नहीं होगा। प्रेमानंद महाराज के प्रति बड़ी संख्या में लोगों की श्रद्धा है। लेकिन किसी व्यक्ति या संस्था की लोकप्रियता किसी शिकायत को अपने आप सही या गलत साबित नहीं करती। इसी तरह परिवार की शिकायत के आधार पर किसी व्यक्ति या संस्था को दोषी मान लेना भी उचित नहीं होगा।
जांच से ही सामने आएगा पूरा सच
इस पूरे मामले में फिलहाल दो परिवार अपनी-अपनी मांग को लेकर सामने हैं। रसिक दुलारी शरण का परिवार अपने बेटे की मौत की परिस्थितियों की निष्पक्ष और विस्तृत जांच चाहता है। वहीं अनुज चौधरी का परिवार अपने बेटे की स्थिति स्पष्ट होने और उससे मुलाकात कराने की मांग कर रहा है। रसिक दुलारी की मौत के मामले में CCTV फुटेज, पोस्टमार्टम रिपोर्ट, फोरेंसिक जांच, मोबाइल और दूसरे इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य तथा गवाहों के बयान महत्वपूर्ण हो सकते हैं। वहीं अनुज के मामले में उसकी मौजूदगी, उम्र, उसकी इच्छा और परिवार से मुलाकात को लेकर स्थिति स्पष्ट करना अहम होगा। सबसे जरूरी बात यह है कि इन दोनों मामलों में जांच पूरी होने से पहले किसी व्यक्ति या संस्था को दोषी ठहराना उचित नहीं होगा। आखिरकार जवाब रिकॉर्ड से आएगा, गवाहों से आएगा और जांच से आएगा। फिलहाल सबसे बड़े सवाल यही हैं कि रसिक दुलारी शरण की मौत किन परिस्थितियों में हुई और अनुज चौधरी इस समय कहां है? इन दोनों सवालों का आधिकारिक जवाब जांच और संबंधित अधिकारियों की कार्रवाई के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।




