US-Iran War: अमेरिका और ईरान के बीच जारी संघर्ष को लेकर तेहरान की नई चेतावनी ने भारत समेत पूरे हिंद महासागर क्षेत्र की चिंता बढ़ा दी है। ईरान के सुप्रीम लीडर के सलाहकार याह्या रहीम सफवी ने कहा है कि अगर अमेरिका या इजरायल की ओर से दोबारा हमला होता है तो युद्ध का दायरा हिंद महासागर तक फैल सकता है। उनका कहना है कि संघर्ष पहले ही फारस की खाड़ी, होर्मुज जलडमरूमध्य और लाल सागर तक पहुंच चुका है। ऐसे में सवाल है कि ईरान ने हिंद महासागर का नाम क्यों लिया, इसका भारत पर क्या असर पड़ सकता है और क्या वाकई युद्ध का दायरा इतना बढ़ सकता है?
ईरान ने हिंद महासागर तक युद्ध फैलाने की चेतावनी क्यों दी?
ईरान के सुप्रीम लीडर के सलाहकार याह्या रहीम सफवी ने कहा है कि अगर अमेरिका या इजरायल की तरफ से फिर हमला किया गया तो ईरान संघर्ष का मोर्चा और आगे बढ़ा सकता है। ईरानी समाचार एजेंसी फार्स की ओर से जारी वीडियो में सफवी ने कहा कि युद्ध पहले ही फारस की खाड़ी और होर्मुज जलडमरूमध्य से लाल सागर तक पहुंच चुका है और आगे यह हिंद महासागर तथा उससे भी आगे तक फैल सकता है। इस बयान को ईरान की ओर से सैन्य दबाव के बीच दी गई चेतावनी के तौर पर देखा जा रहा है। खास बात यह है कि मौजूदा संघर्ष के संदर्भ में किसी वरिष्ठ ईरानी अधिकारी की ओर से हिंद महासागर का स्पष्ट जिक्र सामने आया है। हालांकि, यह बयान फिलहाल एक चेतावनी है और इससे यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि हिंद महासागर में तत्काल कोई सैन्य कार्रवाई होने वाली है।
हिंद महासागर का जिक्र क्यों महत्वपूर्ण है?
हिंद महासागर भारत के लिए रणनीतिक और आर्थिक दोनों लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण समुद्री क्षेत्र है। इसी इलाके में अमेरिका और ब्रिटेन का अहम सैन्य अड्डा डिएगो गार्सिया भी मौजूद है, जो ईरान से करीब 4,000 किलोमीटर दूर है। अगर अमेरिका और ईरान के बीच संघर्ष इस इलाके तक फैलता है तो सैन्य गतिविधियों के साथ-साथ समुद्री व्यापार और जहाजों की सुरक्षा पर भी असर पड़ सकता है। पहले से ही फारस की खाड़ी, होर्मुज जलडमरूमध्य और लाल सागर में तनाव के कारण समुद्री मार्गों को लेकर चिंता बनी हुई है। हिंद महासागर तक तनाव पहुंचने की स्थिति में एशिया, यूरोप और अफ्रीका के बीच आने-जाने वाले समुद्री व्यापार पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है। हालांकि, अभी ऐसा कोई प्रमाण नहीं है कि युद्ध का मोर्चा वास्तव में हिंद महासागर तक पहुंच गया है।
भारत के लिए सबसे बड़ा खतरा क्या है?
भारत के लिए सबसे बड़ी चिंता कच्चे तेल और समुद्री व्यापार को लेकर है। पश्चिम एशिया भारत की ऊर्जा आपूर्ति का महत्वपूर्ण स्रोत है। ऐसे में फारस की खाड़ी और होर्मुज जलडमरूमध्य जैसे रास्तों में लंबे समय तक व्यवधान आने पर कच्चे तेल की कीमत और भारत का आयात खर्च बढ़ सकता है। अगर हिंद महासागर में भी सैन्य तनाव बढ़ता है तो जहाजों के लिए जोखिम बढ़ने के साथ समुद्री बीमा और माल ढुलाई की लागत भी बढ़ सकती है। इसका असर केवल तेल तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि भारत के विदेश व्यापार और कई आयातित सामानों की लागत पर भी पड़ सकता है। हालांकि, वास्तविक असर इस बात पर निर्भर करेगा कि संघर्ष कितना फैलता है, समुद्री मार्ग कितने समय तक प्रभावित होते हैं और अंतरराष्ट्रीय बाजार किस तरह प्रतिक्रिया देते हैं।
होर्मुज और लाल सागर से हिंद महासागर तक कैसे जुड़ता है मामला?
अमेरिका-ईरान संघर्ष का असर पहले ही पश्चिम एशिया के प्रमुख समुद्री रास्तों तक पहुंच चुका है। होर्मुज जलडमरूमध्य खाड़ी क्षेत्र से तेल और गैस की आवाजाही के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। वहीं लाल सागर और बाब-अल-मंदेब मार्ग एशिया और यूरोप के बीच व्यापार के लिए अहम हैं। इन क्षेत्रों में तनाव बढ़ने पर जहाजों को कई बार लंबे वैकल्पिक रास्तों का इस्तेमाल करना पड़ता है, जिससे समय और परिवहन लागत बढ़ती है। ईरान की नई चेतावनी इसी व्यापक समुद्री तनाव को और बड़े क्षेत्र तक ले जाने की संभावना की ओर इशारा करती है। हालांकि, ईरान की चेतावनी को वास्तविक युद्ध विस्तार से अलग रखना जरूरी है। अभी तक हिंद महासागर में संघर्ष फैलने की पुष्टि नहीं हुई है।
युद्ध के बीच कूटनीतिक बातचीत और भारत के लिए बढ़ती समुद्री चिंता
युद्ध के बीच कूटनीतिक स्तर पर बातचीत की कोशिशें भी जारी हैं। संयुक्त राष्ट्र महासभा के दौरान अमेरिका और ईरान के अधिकारियों के बीच बातचीत हुई है। ईरान ने युद्ध समाप्त करने के लिए आर्थिक प्रतिबंध हटाने और विदेशों में फ्रीज की गई अपनी संपत्तियों को जारी करने जैसी शर्तें रखी हैं। ईरान की ओर से यमन में युद्ध खत्म करने का मुद्दा भी बातचीत की शर्तों में उठाया गया है। इसलिए फिलहाल तस्वीर दो दिशाओं में जाती दिख रही है। एक तरफ ईरान की ओर से संघर्ष का दायरा बढ़ाने की चेतावनी है, दूसरी तरफ युद्ध खत्म करने के लिए कूटनीतिक कोशिशें भी चल रही हैं। भारत के लिए आने वाले दिनों में सबसे महत्वपूर्ण चीज होर्मुज जलडमरूमध्य, लाल सागर और हिंद महासागर में समुद्री गतिविधियों पर नजर रखना होगा। अगर तनाव केवल चेतावनी तक सीमित रहता है तो असर सीमित रह सकता है, लेकिन अगर सैन्य संघर्ष वास्तव में हिंद महासागर तक पहुंचता है तो भारत की ऊर्जा सुरक्षा, शिपिंग और समुद्री व्यापार पर इसका प्रभाव काफी व्यापक हो सकता है।




