द फ्रंट डेस्क: बिहार में कानून-व्यवस्था को लेकर एक बार फिर सियासी बहस तेज हो गई है। पटना में पूर्व नगर पार्षद और जन सुराज नेता अनिल यादव पर हुए जानलेवा हमले ने इस बहस को और हवा दे दी है। बुधवार शाम बुद्धा कॉलोनी इलाके में अनिल यादव पर कई राउंड फायरिंग की गई। CCTV फुटेज में हमलावरों को वारदात के बाद मौके से भागते देखा गया। पुलिस ने जांच शुरू कर दी है और हमलावरों की पहचान की कोशिश की जा रही है। घटना के बाद प्रशांत किशोर ने कानून-व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए इसे ‘जंगलराज’ से जोड़ा, जबकि तेजस्वी यादव ने भी सरकार से सख्त कार्रवाई की मांग की।
पटना में पूर्व पार्षद पर फायरिंग, CCTV में कैद हुई वारदात
पटना के बुद्धा कॉलोनी थाना क्षेत्र में अनिल यादव अपने अपार्टमेंट के निचले हिस्से में बैठे थे। पुलिस के मुताबिक, इसी दौरान बाइक सवार हमलावर पहुंचे और उन पर कई गोलियां चलाईं। अनिल यादव को कई जगह गोली लगी और उन्हें पहले एक निजी अस्पताल ले जाया गया, बाद में बेहतर इलाज के लिए मेदांता अस्पताल ले जाने की जानकारी सामने आई। पुलिस CCTV फुटेज और घटनास्थल से मिले सबूतों के आधार पर हमलावरों की पहचान में जुटी है। हमले के पीछे की वजह अभी स्पष्ट नहीं है और पुलिस पुरानी दुश्मनी समेत अलग-अलग एंगल से जांच कर रही है। इस घटना को इसलिए भी गंभीर माना जा रहा है क्योंकि अनिल यादव की पत्नी वर्तमान में वार्ड नंबर 24 की पार्षद हैं और कुछ दिन पहले ही उनके बेटे की भी गोली मारकर हत्या की गई थी। पुलिस अब दोनों घटनाओं के बीच किसी संभावित संबंध की भी जांच कर रही है।

‘ये जंगलराज नहीं तो क्या है?’ प्रशांत किशोर ने उठाए सवाल
अनिल यादव से मिलने अस्पताल पहुंचे जन सुराज के संस्थापक और बांकीपुर विधायक प्रशांत किशोर ने बिहार की कानून-व्यवस्था पर सवाल उठाए। उन्होंने मुख्यमंत्री और गृह मंत्री सम्राट चौधरी से जवाब मांगते हुए पूछा कि अगर पटना जैसे शहर में दिनदहाड़े जनप्रतिनिधि से जुड़े व्यक्ति पर हमला हो सकता है तो इसे कानून-व्यवस्था की स्थिति के तौर पर कैसे देखा जाए। प्रशांत किशोर ने इसे ‘जंगलराज’ बताया। यह उनका राजनीतिक आरोप है, जबकि घटना की जांच और हमलावरों की गिरफ्तारी की प्रक्रिया पुलिस के स्तर पर जारी है।

जमुई कांड ने भी कानून-व्यवस्था पर बढ़ाई बहस
पटना फायरिंग से कुछ दिन पहले जमुई में एक नाबालिग लड़की और उसके साथ मौजूद लड़के को सड़क पर रोककर कथित तौर पर बदसलूकी और मारपीट का मामला सामने आया था। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद पुलिस ने POCSO समेत संबंधित धाराओं में कार्रवाई शुरू की। पुलिस ने मामले में तीन नाबालिगों समेत कई आरोपियों को हिरासत में लिया और बाद में मुख्य आरोपियों में शामिल बताए जा रहे नंदन यादव तथा हरिराम यादव को भी गिरफ्तार किया गया। पुलिस के मुताबिक नंदन के पैर में गोली लगी, जबकि हरिराम भागने की कोशिश में घायल हुआ। इस घटना ने इसलिए भी राजनीतिक तूल पकड़ा क्योंकि वीडियो सार्वजनिक होने के बाद विपक्ष ने कानून-व्यवस्था को लेकर सरकार पर निशाना साधा। हालांकि, पुलिस की ओर से मामले में कार्रवाई किए जाने की बात भी सामने आई है। इसलिए इस घटना को लेकर सवाल सिर्फ अपराध होने का नहीं, बल्कि अपराध रोकने और पीड़ितों को समय पर सुरक्षा देने की व्यवस्था का भी है।

पटना में 12 साल की बच्ची की हत्या, खेत में मिला था शव
20 सितंबर के आसपास पटना जिले में 12 साल की एक बच्ची का शव खेत में मिला था। रिपोर्टों के मुताबिक बच्ची की गर्दन पर चोट के निशान थे और पुलिस ने हत्या की आशंका में जांच शुरू की। घटना के बाद ग्रामीणों और परिजनों ने सड़क जाम कर आरोपियों की गिरफ्तारी और कड़ी कार्रवाई की मांग की। पुलिस ने मामले में जांच शुरू कर दी और फोरेंसिक पहलुओं की भी पड़ताल की। यह मामला भी उस समय सामने आया जब राज्य में महिलाओं और नाबालिगों की सुरक्षा को लेकर पहले से बहस चल रही थी। ऐसे मामलों में पुलिस की जांच और आरोपियों की गिरफ्तारी के साथ-साथ यह सवाल भी महत्वपूर्ण है कि स्थानीय स्तर पर अपराध की रोकथाम के लिए क्या व्यवस्था मौजूद है।
मुंगेर में 15 साल के किशोर की दिनदहाड़े गोली मारकर हत्या
बिहार के मुंगेर जिले में भी सितंबर के तीसरे सप्ताह में 15 वर्षीय किशोर की गोली मारकर हत्या का मामला सामने आया। पुलिस के मुताबिक, किशोर को एक पुराने विवाद को सुलझाने के बहाने बुलाया गया था और इसके बाद उसे गोली मार दी गई। पुलिस ने दो संदिग्ध आरोपियों की पहचान किए जाने और उनकी गिरफ्तारी के लिए छापेमारी की बात कही। इस मामले में मृतक के परिवार ने यह भी आरोप लगाया कि विवाद की पृष्ठभूमि में उसकी बहन को कथित तौर पर परेशान किए जाने का मामला था। पुलिस ने FIR दर्ज कर जांच शुरू की है। इस तरह की घटनाएं यह सवाल खड़ा करती हैं कि छोटे विवाद किस तरह हिंसक अपराध में बदल रहे हैं और हथियारों की उपलब्धता पर पुलिस की पकड़ कितनी प्रभावी है।
समस्तीपुर में घर में घुसकर गोली मारने का मामला
समस्तीपुर में भी हाल में एक 50 वर्षीय व्यक्ति की घर में गोली मारकर हत्या किए जाने का मामला सामने आया। रिपोर्ट के मुताबिक, व्यक्ति को सिर में तीन गोलियां मारी गई थीं। घटनास्थल से कारतूस बरामद किए गए और पुलिस ने हत्या के कारण का पता लगाने के लिए विशेष जांच टीम बनाई। पुलिस के सामने अभी हत्या की वजह और आरोपियों की पहचान का सवाल था। पटना, मुंगेर और समस्तीपुर की घटनाओं को अलग-अलग मामलों के तौर पर देखा जाना चाहिए, क्योंकि इनके कारण और परिस्थितियां एक जैसी नहीं हैं। लेकिन इन घटनाओं का एक साथ सामने आना राज्य की कानून-व्यवस्था को लेकर सार्वजनिक और राजनीतिक चर्चा को जरूर बढ़ाता है।
तो क्या बिहार में ‘जंगलराज 2.0’ आ गया?
यही वह सवाल है जिस पर फिलहाल बिहार की राजनीति में बहस तेज है। विपक्ष और सरकार के आलोचक हाल की आपराधिक घटनाओं को कानून-व्यवस्था की स्थिति से जोड़ रहे हैं। खासकर पटना में पूर्व पार्षद पर फायरिंग और जमुई की घटना के बाद ‘जंगलराज’ शब्द फिर राजनीतिक चर्चा के केंद्र में आया है। हालांकि, केवल कुछ हालिया घटनाओं के आधार पर पूरे राज्य की कानून-व्यवस्था को ‘जंगलराज 2.0’ कहना एक राजनीतिक निष्कर्ष होगा। इसकी वास्तविक तस्वीर समझने के लिए अपराध के आधिकारिक आंकड़े, पुलिस की कार्रवाई, गिरफ्तारी दर, चार्जशीट और अदालतों में मामलों की स्थिति जैसे कई पहलुओं को साथ देखना जरूरी है।

आंकड़े क्या कहते हैं? 2025 में बड़े अपराधों में कमी का पुलिस का दावा
बिहार पुलिस ने जनवरी 2026 में 2025 के अपराध आंकड़े जारी करते हुए दावा किया था कि 2024 की तुलना में 2025 में हत्या के मामलों में 8.3 प्रतिशत, दुष्कर्म में 8.2 प्रतिशत, डकैती में 26.9 प्रतिशत और दंगों में 21.5 प्रतिशत की कमी आई। पुलिस के मुताबिक 2025 में हत्या के 2,556 मामले दर्ज हुए, जबकि 2024 में यह संख्या 2,786 थी। इसलिए तस्वीर का दूसरा पक्ष भी मौजूद है। एक तरफ सितंबर 2026 में कई गंभीर घटनाओं ने कानून-व्यवस्था पर सवाल खड़े किए हैं, वहीं पुलिस के उपलब्ध पिछले साल के आंकड़े यह दावा करते हैं कि बड़े अपराधों के कुछ वर्गों में कमी आई थी। ऐसे में ‘जंगलराज 2.0’ का सवाल फिलहाल राजनीतिक आरोप और सार्वजनिक बहस का हिस्सा है, जिसका आकलन व्यापक और ताजा अपराध आंकड़ों के आधार पर ही किया जा सकता है।
सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती क्या है?
पटना में अनिल यादव पर हमला, जमुई की घटना और हाल के अन्य आपराधिक मामलों ने बिहार पुलिस के सामने दो बड़ी चुनौतियां रखी हैं—पहली, वारदात के आरोपियों को जल्द गिरफ्तार करना और दूसरी, ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकना। पटना पुलिस ने अनिल यादव मामले में CCTV और फोरेंसिक साक्ष्यों के आधार पर जांच शुरू कर दी है। जमुई मामले में भी पुलिस ने कई आरोपियों को पकड़ा है। ऐसे में आने वाले दिनों में इन मामलों में पुलिस की जांच किस दिशा में जाती है, कितनी जल्दी आरोपियों की गिरफ्तारी होती है और अदालत में केस कितनी मजबूती से आगे बढ़ता है। यही तय करेगा कि इन घटनाओं को सिर्फ अलग-अलग आपराधिक वारदातों के तौर पर देखा जाएगा या बिहार की कानून-व्यवस्था को लेकर बड़े सवालों का आधार माना जाएगा।




