Bihar Jamui Viral Video Case: जमुई में नाबालिग छात्र-छात्रा के साथ बदसलूकी के वायरल वीडियो मामले में पुलिस ने अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई की है। पुलिस के मुताबिक, मुख्य आरोपी नंदन यादव को पकड़ने की कोशिश के दौरान मुठभेड़ हुई, जिसमें उसके पैर में गोली लगी और इसके बाद उसे गिरफ्तार कर लिया गया। हरेराम यादव को भी पुलिस ने गिरफ्तार किया है। पुलिस का कहना है कि अब मामले में कोई आरोपी फरार नहीं है और सभी आरोपियों को पकड़ लिया गया है। इससे पहले वायरल वीडियो के आधार पर आरोपियों की पहचान के लिए SIT बनाई गई थी और कई गिरफ्तारियां हुई थीं।
अब सवाल सिर्फ गिरफ्तारी तक सीमित नहीं है। इस मामले में कुछ आरोपी नाबालिग भी बताए गए हैं। ऐसे में उनके लिए कानून की प्रक्रिया बालिग आरोपियों से अलग होगी। आखिर नाबालिग आरोपियों को जेल भेजा जाएगा या सुधारात्मक व्यवस्था में रखा जाएगा? क्या 16 से 18 साल की उम्र के आरोपी का बालिग की तरह ट्रायल हो सकता है? बालिग आरोपियों पर कौन-सी धाराएं लागू हो सकती हैं और एनकाउंटर के बाद नंदन यादव के खिलाफ आगे क्या कानूनी प्रक्रिया होगी? आइए, पूरा मामला आसान भाषा में समझते हैं।
नंदन यादव के एनकाउंटर से लेकर सभी आरोपियों की गिरफ्तारी तक क्या हुआ?
जमुई में 19 सितंबर की शाम दो नाबालिग छात्र-छात्रा के साथ कथित बदसलूकी का मामला सामने आया था। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद पुलिस ने जांच शुरू की। पुलिस ने वीडियो फुटेज और उसमें दिखाई दे रहे दूसरे सुरागों के आधार पर आरोपियों की पहचान करने की कार्रवाई शुरू की। इसके बाद SIT का गठन किया गया और आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए छापेमारी की गई। अब पुलिस के मुताबिक, मुख्य आरोपी नंदन यादव को पकड़ने के दौरान उसने भागने की कोशिश की और इसी दौरान पुलिस के साथ मुठभेड़ हुई। नंदन के पैर में गोली लगने के बाद उसे गिरफ्तार कर अस्पताल भेजे जाने की जानकारी सामने आई है। हरेराम यादव की गिरफ्तारी की भी बात सामने आई है। इस कार्रवाई के बाद पुलिस का कहना है कि मामले में सभी आरोपी गिरफ्तार किए जा चुके हैं। हालांकि मुठभेड़ से जुड़े पूरे घटनाक्रम की कानूनी जांच और आधिकारिक रिकॉर्ड अपनी जगह महत्वपूर्ण रहेंगे।
वायरल वीडियो से खुला मामला, पुलिस ने ऐसे शुरू की कार्रवाई
यह मामला तब सामने आया जब घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से फैलने लगा। पुलिस के अनुसार, वीडियो में दिखाई दे रहे लोगों की पहचान करने की कोशिश की गई और पीड़ितों तक भी पुलिस पहुंची। रिपोर्टों के मुताबिक, वीडियो में दिख रहे आरोपियों की पहचान के लिए तकनीकी और जमीनी जांच की गई। इसी आधार पर पहले कुछ आरोपियों को गिरफ्तार किया गया और बाकी की तलाश के लिए SIT बनाई गई। पुलिस ने मामले में POCSO एक्ट और भारतीय न्याय संहिता यानी BNS की संबंधित धाराओं के तहत FIR दर्ज किए जाने की जानकारी दी थी। रिपोर्टों के मुताबिक, POCSO की धारा 8 और 12 तथा BNS की धारा 74, 76 और 3(5) का उल्लेख FIR में किया गया है। हालांकि किसी आरोपी के खिलाफ अंतिम आरोप और अदालत में दोष साबित होना अलग-अलग कानूनी चरण हैं।
अब नाबालिग आरोपियों के साथ क्या होगा?
इस मामले का सबसे अहम कानूनी पहलू यह है कि कुछ आरोपी नाबालिग बताए गए हैं। नाबालिग आरोपी के साथ सामान्य वयस्क अपराधी की तरह जेल और ट्रायल की प्रक्रिया सीधे लागू नहीं होती। किशोर न्याय अधिनियम के तहत ऐसे आरोपी को Child in Conflict with Law माना जाता है और उसके मामले की सुनवाई Juvenile Justice Board यानी JJB के सामने होती है। जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड यह देखता है कि आरोपी की उम्र कितनी है, उस पर किस तरह का अपराध आरोपित है और कानून के तहत उसके मामले में कौन-सी प्रक्रिया लागू होगी। नाबालिग होने का मतलब यह नहीं है कि मामले में कोई कार्रवाई नहीं होगी। कार्रवाई होती है, लेकिन उसका उद्देश्य बच्चे की उम्र और परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए न्याय के साथ-साथ सुधार और पुनर्वास को भी महत्व देना होता है।
क्या 16 से 18 साल के आरोपी का बालिग की तरह ट्रायल हो सकता है?
अगर किसी नाबालिग की उम्र 16 से 18 साल के बीच है और उस पर किशोर न्याय कानून के तहत heinous offence का आरोप बनता है, तो मामला थोड़ा अलग हो सकता है। ऐसी स्थिति में Juvenile Justice Board कानून के मुताबिक preliminary assessment कर सकता है। इसमें यह देखा जाता है कि बच्चे की मानसिक और शारीरिक क्षमता क्या है, वह कथित अपराध के परिणामों को समझने की क्षमता रखता था या नहीं और घटना किन परिस्थितियों में हुई। इसके बाद कानून के तहत कुछ मामलों में मामला Children’s Court तक भेजे जाने की प्रक्रिया हो सकती है। लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि 16 से 18 साल का हर आरोपी अपने आप बालिग मान लिया जाएगा। यह एक कानूनी प्रक्रिया है, जिसमें संबंधित बोर्ड को निर्धारित मानकों के आधार पर फैसला लेना होता है।
अगर नाबालिगों का ट्रायल JJB में ही चला तो क्या होगा?
अगर मामला किशोर न्याय व्यवस्था के तहत ही आगे बढ़ता है, तो आरोपी को सुधारात्मक व्यवस्था में रखा जा सकता है। इसमें शिक्षा, काउंसलिंग, स्किल डेवलपमेंट और व्यवहार सुधार जैसी व्यवस्थाएं शामिल हो सकती हैं। गंभीर आरोपों वाले मामलों में बच्चे को कानून के अनुसार Place of Safety में रखने की व्यवस्था भी हो सकती है। इसलिए जमुई मामले में गिरफ्तार नाबालिगों के बारे में अभी सीधे यह कहना कि उन्हें जेल भेजा जाएगा या उन्हें निश्चित अवधि तक सुधार गृह में रखा जाएगा, जल्दबाजी होगी। यह उनकी उम्र, आरोपों और JJB की आगे की कानूनी प्रक्रिया पर निर्भर करेगा।
बालिग आरोपियों पर क्या होगी कार्रवाई?
18 साल या उससे अधिक उम्र के आरोपियों के खिलाफ सामान्य आपराधिक कानून के तहत कार्रवाई होगी। इस मामले में पुलिस द्वारा दर्ज FIR में POCSO और BNS की संबंधित धाराओं का उल्लेख किया गया है। POCSO की धारा 8 यौन उत्पीड़न से संबंधित है, जबकि धारा 12 बच्चे के यौन उत्पीड़न से जुड़े प्रावधानों से संबंधित है। BNS की धारा 74 महिला की गरिमा भंग करने के इरादे से हमला या आपराधिक बल प्रयोग से जुड़ी है और धारा 76 महिला को निर्वस्त्र करने के प्रयास से संबंधित है। हालांकि अंतिम सजा अभी से तय नहीं की जा सकती। जांच पूरी होने, चार्जशीट दाखिल होने, अदालत में सबूत पेश होने और आरोप साबित होने के बाद ही न्यायालय यह तय करेगा कि कौन-सी धाराएं लागू होती हैं और किस आरोपी को कितनी सजा दी जानी है।
नंदन यादव के एनकाउंटर के बाद अब क्या होगा?
नंदन यादव के पैर में गोली लगने के बाद उसकी गिरफ्तारी हुई है, लेकिन एनकाउंटर अपने आप में किसी आरोपी के खिलाफ मामले का अंत नहीं है। घायल आरोपी का इलाज, गिरफ्तारी की औपचारिकता, पुलिस जांच, पूछताछ, रिमांड और उसके बाद न्यायिक प्रक्रिया जैसे चरण आगे बढ़ सकते हैं। मुठभेड़ में गोली लगने की परिस्थितियों का आधिकारिक रिकॉर्ड भी महत्वपूर्ण होगा। यानी पुलिस की कार्रवाई के बाद अब पूरा फोकस जांच और न्यायिक प्रक्रिया पर रहेगा। पुलिस को यह साबित करने के लिए सबूत जुटाने होंगे कि आरोपियों की घटना में क्या भूमिका थी। वायरल वीडियो, प्रत्यक्षदर्शी या अन्य डिजिटल साक्ष्य, पीड़ितों के बयान और जांच में सामने आने वाली दूसरी सामग्री आगे की कार्रवाई में महत्वपूर्ण हो सकती है।
वीडियो वायरल करने वालों पर भी कार्रवाई क्यों?
जमुई मामले में सिर्फ घटना के आरोपियों पर ही कार्रवाई नहीं हो रही है, बल्कि नाबालिग पीड़ितों से संबंधित वीडियो को फैलाने वालों पर भी पुलिस ने कार्रवाई की है। बिहार पुलिस ने नाबालिग की पहचान उजागर करने और वीडियो को सोशल मीडिया पर प्रसारित करने को लेकर लोगों को चेतावनी दी है। एक रिपोर्ट के मुताबिक, पुलिस ने करीब 120 सोशल मीडिया अकाउंट ऑपरेटरों के खिलाफ FIR दर्ज किए जाने की जानकारी दी है। कानून में नाबालिग पीड़ित की पहचान की सुरक्षा का विशेष प्रावधान है। इसलिए किसी भी वायरल वीडियो को दोबारा पोस्ट, शेयर या फॉरवर्ड करना कानूनी परेशानी पैदा कर सकता है। पुलिस ने भी लोगों से ऐसे वीडियो को आगे प्रसारित नहीं करने की अपील की है।
अब तक की कार्रवाई से साफ है कि अगला चरण कोर्ट की प्रक्रिया का होगा
जमुई मामले में वायरल वीडियो सामने आने से शुरू हुई जांच अब गिरफ्तारी और पुलिस कार्रवाई के अगले चरण में पहुंच चुकी है। पुलिस ने आरोपियों की पहचान, SIT की जांच और गिरफ्तारी के बाद मुख्य आरोपी नंदन यादव को भी पकड़ लिया है। अब आगे जांच पूरी करने, आरोपियों के खिलाफ कानूनी रिकॉर्ड तैयार करने और अदालत के सामने मामले को रखने की प्रक्रिया महत्वपूर्ण होगी। सबसे अहम बात यह है कि नाबालिग और बालिग आरोपियों के लिए कानून अलग-अलग प्रक्रिया तय करता है। नाबालिगों के मामले में उम्र और अपराध की प्रकृति के आधार पर JJB की भूमिका होगी, जबकि बालिग आरोपियों के खिलाफ सामान्य आपराधिक न्याय व्यवस्था के तहत मामला आगे बढ़ेगा। इसलिए अब जमुई केस में अगली बड़ी तस्वीर पुलिस जांच, चार्जशीट और अदालत की कार्यवाही से सामने आएगी।




