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जानिए युद्ध अपराध के लिए क्या है अंतर्राष्ट्रीय क़ानून, कैसे होती है इसकी सुनवाई

जानिए युद्ध अपराध के लिए क्या है अंतर्राष्ट्रीय क़ानून, कैसे होती है इसकी सुनवाई

नई दिल्‍ली/कीव, यूक्रेन में जारी युद्ध में रूस पर आम नागरिकों को निशाना बनाने का आरोप लग रहा है। हालांकि, दूसरी ओर रूस ने आम नागरिकों को निशाना बनाने के आरोपों से इन्‍कार किया है। इन आरोपों के बाद रूस पर संभावित युद्ध अपराध के मामले में जांच शुरू हुई है। ऐसे में यह सवाल उठता है कि युक्रेन-रूस युद्ध में कितने आम नागर‍िक हताहत हुए हैं। यह युद्ध अपराध क्‍या है? किस अंतरराष्‍ट्रीय कानून के तहत यह आरोप तय किया जाता है? इस बाबत अंतरराष्‍ट्रीय संधियां क्‍या हैं? युद्ध अपराध की सुनवाई कैसे होती है?

जिनेवा कन्‍वेशन के पहले तीन कन्‍वेंशन युद्ध में लड़ने वाले सैनिकों और युद्ध बंदियों की सुरक्षा के लिए प्रावधान निर्धारित करते हैं। दूसरे विश्‍व युद्ध के बाद चौथा कन्‍वेंशन अस्तित्‍व में आया। इसके तहत युद्ध क्षेत्र के आम नागरिकों की सुरक्षा की जाती है। वर्ष 1949 के ज‍िनेवा कन्‍वेंशन को रूस सहित संयुक्‍त राष्‍ट्र के सभी सदस्‍य देशों ने अनुमोदित किया था। चौथे कन्‍वेंशन में युद्ध अपराधों की परिभाषा निर्धारित की गई है। इसके तहत जंग के दौरान जानबूझ कर हत्‍या शामिल है। इसमें अत्‍याचार या अमानवीय व्‍यवहार को शामिल किया गया है। इसके तहत जानबूझ कर गंभीर शारीरिक चोट या स्‍वास्‍थ्‍य को नुकसान पहुंचाना शामिल है।

बता दें कि रूस के खारकीव पर हवाई हमले के बाद आम लोगों को निशाना बनाए जाने को लेकर यूक्रेन के राष्ट्रपति जेलेंस्की ने रूस पर युद्ध अपराध का आरोप लगाया है। रूस पर खारकीव के अंदर क्लस्टर बम के इस्तेमाल करने का आरोप है। क्लस्टर बम ऐसे हथियार हैं, जिसके इस्तेमाल से छोटे छोटे हथियारों के इस्तेमाल से हमला किया जाता है। वर्ष 2008 में कलस्टर युद्ध सामग्रियों के इस्तेमाल पर हुई कन्वेंशन के बाद कई देशों में इस बम के इस्तेमाल पर पाबंदी है, लेकिन समझौते में शामिल नहीं होने के चलते रूस और यूक्रेन में इसके इस्तेमाल पर पाबंदी नहीं है। हालांकि ,पुतिन प्रशासन ने युद्ध अपराध करने या क्लस्टर और वैक्यूम बम का उपयोग करने से इनकार किया है और इन आरोपों को फेक न्‍यूज कहा है।

39 देशों द्वारा जांच की मांग उठाए जाने के बाद उठाया कदम

यूक्रेन संघर्ष का मामना अंतरराष्‍ट्रीय अदालत में पहुंच चुका है। अंतरराष्‍ट्रीय अपराध अदालत के मुख्‍य अभियोजक ने कहा कि कथित युद्ध अपराधों, मानवता के खिलाफ अपराध और नरसंहार के सबूत एकत्रित किए जा रहे हैं। अदालत ने यह कदम 39 देशों द्वारा जांच की मांग उठाए जाने के बाद उठाया है। वहीं, दूसरी ओर रूस ने आम नागरिकों को निशाना बनाने के आरोपों से इनकार किया है, लेकिन बड़ा सवाल यही है कि रूस पर जिसका आरोप लग रहा है वह युद्ध अपराध क्या हैं?

क्‍या है रोम अधिनियम

वर्ष 1998 का रोम अधिनियम भी सशस्त्र संघर्ष के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय संधि है। इसे संधि के मुताबिक युद्ध अपराध है। अतरराष्ट्रीय कानून और उसके उल्लंघन को समझने के लिए उपयोगी गाइड माना जाता है। इसके तहत जानबूझ कर आम लोगों पर सीधे हमले करना या युद्ध में जो लोग शामिल नहीं हैं उन पर जानबूझ कर हमले करना अपराध की श्रेणी में रखा गया है। इस संधि के तहत बिना रक्षा कवच वाले गांवों, आवासों या इमारतों पर किसी भी तरह से हमला या बमबारी अपराध की श्रेणी है। इसके मुताबिक अस्पताल, धार्मिक आस्था या शिक्षा से जुड़ी इमारतों को जानबूझ कर निशाना नहीं बनाया जा सकता है। यह संधि कुछ हथियारों के साथ-साथ जहरीली गैसों के उपयोग पर भी प्रतिबंध लगाता है।

कैसे होती है युद्ध अपराध की सुनवाई

रोम अधिनियम 1998 के तहत अंतरराष्‍ट्रीय अपराध अदालत की स्‍थापना 1998 में नीदरलैंड्स के हेग में हुई थी। यह सबसे गंभीर अपराधों के अभियुक्तों पर मुकदमा चलाने वाली और सुनवाई करने वाली एक स्वतंत्र संस्था है। यह युद्ध अपराधों, नरसंहार, मानवता के खिलाफ अपराध और आक्रामकता के अपराध की जांच करता है। यह अदालत केवल उस क्षेत्राधिकार का प्रयोग कर सकता है जहां कोई देश ऐसा करने के लिए तैयार नहीं हैं या नहीं कर सकते हैं। यह न्याय के लिए अंतिम उपाय की व्यवस्था है। अंतरराष्‍ट्रीय अपराध अदालत के 123 सदस्य देश हैं। रूस और यूक्रेन इसके सदस्य नहीं हैं। हालांकि, यूक्रेन ने अदालत के न्याय क्षेत्र को स्वीकार किया है, यानी अब अंतरराष्‍ट्रीय अपराध अदालत यूक्रेन में कुछ निश्चित कथित अपराधों की जांच कर सकती है। अमेरिका, चीन और भारत भी इसके सदस्यों में शामिल नहीं हैं।

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