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क्या रिश्ता था पूर्व प्रधानमंत्री नेहरू और कोठेवाली गंगूबाई काठियावाड़ी के बीच,जिसका रोल आलिया भट्ट निभा रही हैं

क्या रिश्ता था पूर्व प्रधानमंत्री नेहरू और कोठेवाली गंगूबाई काठियावाड़ी के बीच,जिसका रोल आलिया भट्ट निभा रही हैं

जब से बॉलीवुड एक्ट्रेस आलिया भट्ट (Alia Bhatt) की आने वाली फिल्म ‘गंगूबाई काठियावाड़ी’ (Gangubai Kathiawadi) का ट्रेलर रिलीज हुआ है, तभी से यह फिल्म सुर्खियों में बनी हुई है। संजय लीला भंसाली के डायरेक्श में बनी इस फिल्म में आलिया ने मुंबई के रेड लाइट एरिया कमाठीपुरा की एक माफिया क्वीन की भूमिका निभा रही हैं। इस नए अवतार में लोग आलिया को काफी पसंद कर रहे हैं।

आपकी जानकारी के लिए बता दे कि,यह कहानी एस हुसैन जैदी की किताब ‘माफि या क्वीन ऑफ मुंबई’ पर आधारित है। गंगूबाई का प्रभाव सिर्फ अंड वर्ल्ड और गैं गस्टर्स तक ही नहीं था बल्कि बड़े राजनेता भी उनसे प्रभावित थे। गंगूबाई ने वुमन इम्पावरमेंट समिट में वैश्या वृत्ति के पक्ष में ऐसा स्पीच दिया था जो सुर्खियों में आ गया। धीरे-धीरे गंगूबाई के चर्चे उस वक्त प्रधानमंत्री रहे पंडित जवाहर लाल नेहरू तक पहुंचे।

कौन थी गंगूबाई काठियावाड़ी?

गंगूबाई का असली नाम गंगा हरजीवनदास काठियावाड़ी था. उनका जन्म गुजरात के काठियावाड़ में हुआ था और वो वहीं पलीं-बढ़ीं.
‘माफ़िया क्वीन्स ऑफ मुंबई’ के सह-लेखक एस. हुसैन ज़ैदी गंगूबाई के बारे में कई चीज़ें विस्तार से बताते हैं.
वो कोठा चलाती थीं. उन्हें धोखा देकर इस धंधे में लाया गया था. वो काठियावाड़ के सम्पन्न परिवार से थीं. परिवार के लोग पढ़े-लिखे थे और वकालत से जुड़े थे. गंगा को रमणीकलाल नाम के एक अकाउंटेंट से प्यार हो गया. उनका परिवार इस रिश्ते के लिए राज़ी नहीं था तो वो मुंबई भाग आईं.
लेकिन उस आदमी ने उन्हें धोखा दिया और कमाठीपुरा में बेच दिया. तब उन्हें अहसास हुआ कि अब वो अपने परिवार के पास वापस नहीं लौट सकतीं क्योंकि उनका परिवार उन्हें स्वीकार नहीं करेगा. इसलिए उन्होंने हालात को अपनाया और बतौर सेक्स वर्कर काम करने लगीं.
वो गैंगस्टर नहीं थीं. वो अंडरवर्ल्ड का हिस्सा भी नहीं थीं लेकिन ऐसे धंधे में थीं, जिसे नीची नज़रों से देखा जाता था. जैसे-जैसे वक़्त गुज़रा, वो कमाठीपुरा रेड लाइट एरिया की प्रमुख बन गईं. इस तरह से वह पहले ‘गंगा’ से ‘गंगू’ बनीं और गंगू से ‘मैडम’ बन गईं.
गंगूबाई ने कमाठीपुरा में हुए घरेलू चुनावों में हिस्सा लिया और जीत हासिल की. गंगू सेक्स वर्कर से गंगूबाई काठेवाली बन गईं. काठेवाली दरअसल कोठेवाली से जुड़ा है. कोठा का मतलब है वेश्यालय और कोठा की प्रमुख को कोठेवाली कहा जाता था. उनके नाम के साथ जुड़ा काठियावाड़ी यह भी दिखाता था कि उनका परिवार से कैसा जुड़ाव था.

सेक्स वर्कर के लिए माँ जैसी

1960 और 1970 के दशक में गंगूबाई का कमाठीपुरा में काफ़ी नाम रहा. वो अन्य सेक्स वर्कर्स के लिए मां की तरह थीं. उन्होंने कोठा चलाने वालीं ‘मैडमों’ का प्रभाव ख़त्म कर दिया.
गंगूबाई सुनहरे किनारे वाली सफेद साड़ी, सुनहरे बटन वाला ब्लाउज़ और सुनहरा चश्मा भी पहनती थीं. वो कार से चला करती थीं.
उन्हें सोने से बनी चीज़ें पहनने का बहुत शौक़ था. बचपन में उनका सपना अभिनेत्री बनने का था. बाद के सालों में भी फ़िल्मी दुनिया में उनकी दिलचस्पी बनी रही. उन्होंने ऐसी कई लड़कियों को घर वापस भेजने में मदद की, जिन्हें धोखा देकर वेश्यालयों में बेचा गया था.
वो इस काम से जुड़ीं महिलाओं की सुरक्षा के लिए भी काफ़ी सजग थीं. उन्होंने उन महिलाओं के साथ हुए अन्याय के ख़िलाफ़ आवाज़ उठाई और उन लोगों के ख़िलाफ़ भी क़दम उठाए, जिन्होंने इन महिलाओं का शोषण किया.
उनका यह नज़रिया था कि शहरों में सेक्स वर्कर्स के लिए जगह उपलब्ध कराई जानी चाहिए. मुंबई के आज़ाद मैदान में महिला सशक्तीकरण और महिला अधिकारों के लिए आयोजित रैली में उनका भाषण काफ़ी चर्चा में रहा था.
गंगूबाई की मौत के बाद कई वेश्यालयों में उनकी तस्वीरें लगाई गईं और उनकी मूर्तियां भी बनाई गईं.

प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू से गंगूबाई की मुलाकात…

1960 के दशक में कमाठीपुरा में सेंट एंथनी गर्ल्स हाई स्कूल शुरू हुआ. यह आवाज़ उठने लगी कि वेश्यालय को बंद किया जाना चाहिए क्योंकि वेश्याओं के आसपास होने का बुरा असर छोटी बच्चियों पर पड़ेगा. इस फ़ैसले से कमाठीपुरा में क़रीब एक सदी से काम कर रही महिलाओं पर बुरा असर पड़ने वाला था. गंगूबाई ने इसके ख़िलाफ़ आवाज़ उठाई और इसे आगे ले जाने के लिए पूरी ताक़त लगा दी.
अपने राजनीतिक परिचितों की मदद से उन्होंने तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू से मिलने के लिए वक़्त मांगा. हालांकि यह मीटिंग आधिकारिक तौर पर कहीं दर्ज नहीं हुई लेकिन एस. हुसैन ज़ैदी ने अपनी किताब में इस क़िस्से का ज़िक्र किया है.
ज़ैदी ने ‘माफ़िया क्वीन्स ऑफ मुंबई’ में लिखा, ”इस मुलाक़ात में गंगूबाई की सजगता और स्पष्ट विचारों से नेहरू भी हैरान रह गए. नेहरू ने उनसे सवाल किया था कि वो इस धंधे में क्यों आईं जबकि उन्हें अच्छी नौकरी या अच्छा पति मिल सकता था.”
ऐसा कहा जाता है कि गंगूबाई ने उसी मुलाक़ात में तुरंत नेहरू के सामने प्रस्ताव रखा. उन्होंने नेहरू से कहा कि अगर वो उन्हें (गंगूबाई) को पत्नी के रूप में स्वीकार करने को तैयार हैं तो वह ये धंधा हमेशा के लिए छोड़ देंगी.
इस बात से नेहरू दंग रह गए और उन्होंने गंगूबाई के बयान से असहमति जताई. तब गंगूबाई ने कहा, ”प्रधानमंत्री जी, नाराज़ मत होइए. मैं सिर्फ़ अपनी बात साबित करना चाहती थी. सलाह देना आसान है लेकिन उसे ख़ुद अपनाना मुश्किल है.” नेहरू ने इसके ख़िलाफ़ कुछ नहीं कहा.
मुलाक़ात ख़त्म होने पर नेहरू ने गंगूबाई से वादा किया कि वो उनकी मांगों पर ध्यान देंगे. प्रधानमंत्री ने जब ख़ुद इस पर हस्तक्षेप किया तो कमाठीपुरा से वेश्याओं को हटाने का काम कभी नहीं हो पाया.”

नेहरू ने गंगूबाई के बालों में लगाए फूल?

जवाहरलाल नेहरू गंगूबाई से बहुत प्रभावित थे। मुलाकात के दौरान उसने गंगूबाई को बताया कि उसने यह नौकरी क्यों चुनी, जबकि वह एक अच्छा पति चुनकर बेहतर जिंदगी जी सकती थी। इस पर गंगूबाई ने नेहरू से पूछा, क्या आप मुझे मिसेज नेहरू बनाएंगे? जवाहरलाल नेहरू के पास उनके प्रश्न का कोई उत्तर नहीं था। तब गंगूबाई ने कहा कि उपदेश देना बहुत आसान है, लेकिन करना कठिन। इसके अलावा फिल्म में एक सीन भी है जिसमें पूर्व पीएम नेहरू को गंगूबाई के बालों में फूल लगाते हुए दिखाया गया है।

इसी सीन को लेकर पूरी फिल्म विवादों के घेरे में है. इस सीन को हटाने की मांग हो रही

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