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नई दिल्ली, 5 अप्रैल 2021

सर्वोच्च न्यायालय ने सोमवार को मौखिक रूप से कहा कि एक कार्यवाहक सीबीआई निदेशक लंबे समय तक नहीं चल सकता है और केंद्र से कहा कि वह सीबीआई निदेशक की नियुक्ति के लिए प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में एक उच्चाधिकार प्राप्त समिति का गठन करने पर विचार करे। गौरतलब है कि 12 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने अधिवक्ता प्रशांत भूषण के प्रतिनिधित्व वाले गैर सरकारी संगठन कॉमन कॉज द्वारा दायर याचिका पर केंद्र से जवाब मांगा था। इस याचिका में यथाशीघ्र एक नियमित सीबीआई निदेशक नियुक्त करने के लिए केंद्र सरकार को निर्देश देने की मांग की गई थी।

भूषण ने कहा है कि संविधान के अनुच्छेद 14 और 21 के तहत कानून के शासन को बनाए रखने और नागरिकों के अधिकारों को लागू करने के लिए वैधानिक कानून के अनुसार एक उचित नियुक्ति आवश्यक है।

एल. नागेश्वर राव की अध्यक्षता वाली पीठ ने मौखिक रूप से अटॉर्नी जनरल के.के. वेणुगोपाल से कहा, “भूषण ने जो कहा उसमें कुछ बात तो है।”

अटॉर्नी जनरल ने जवाब दिया कि वरिष्ठतम व्यक्ति को सीबीआई अंतरिम निदेशक के रूप में नियुक्त किया गया है। उन्होंने अदालत को यह भी सूचित किया कि उच्चाधिकार प्राप्त समिति की बैठक 2 मई के बाद बुलाई जाएगी। शीर्ष अदालत ने केंद्र से कहा कि वह सीबीआई निदेशक की नियुक्ति पर निर्णय लेने पर विचार करे।

भूषण ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार उच्चाधिकार प्राप्त समिति में देरी कर रही है, क्योंकि वह वर्तमान मुख्य न्यायाधीश को दरकिनार करना चाहती है, जो समिति का हिस्सा भी हैं और 23 अप्रैल को सेवानिवृत्त होने वाले हैं।

सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने भूषण की दलीलों को बेतुका करार दिया और यह बैठक मई में जारी राज्य चुनावों की पृष्ठभूमि में बुलाई गई है। बहरहाल, शीर्ष अदालत ने कहा कि वह इस मामले पर अगले सप्ताह शुक्रवार को सुनवाई जारी रखेगी।