Jamui Girl Harassment Case: बिहार के जमुई में 10वीं कक्षा के एक छात्र और छात्रा के साथ सड़क पर कथित बदसलूकी और लड़की से छेड़छाड़ का मामला सामने आया है। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आने के बाद पुलिस ने जांच शुरू की। ताजा रिपोर्टों के मुताबिक, तीन लोगों को गिरफ्तार किया गया है, जबकि वीडियो में नजर आ रहे अन्य संदिग्धों की पहचान और उनकी भूमिका की जांच जारी है। पुलिस ने मामले में POCSO Act के तहत कार्रवाई की है। घटना को लेकर कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने बिहार सरकार से सार्वजनिक स्थानों पर लड़कियों की सुरक्षा को लेकर सवाल पूछा है।
आखिर जमुई में क्या हुआ?
रिपोर्टों के मुताबिक, घटना 19 सितंबर 2026 की शाम की है। 10वीं कक्षा में पढ़ने वाला छात्र और छात्रा कोचिंग से लौट रहे थे। दोनों कथित तौर पर स्कूटर से मड़वा पहाड़ की तरफ गए थे और वापस लौटते समय जमुई-लखीसराय रोड के आसपास कुछ लोगों ने उन्हें रोक लिया। इसके बाद दोनों को घेरकर पूछताछ और कथित तौर पर बदसलूकी की गई। सामने आए वीडियो में कई लोगों को दोनों को घेरे हुए देखा जा सकता है। रिपोर्टों के अनुसार, छात्र को थप्पड़ मारा गया और उसका कॉलर पकड़कर खींचा गया, जबकि छात्रा के साथ कथित तौर पर आपत्तिजनक व्यवहार किया गया।
वायरल वीडियो में क्या दिखाई दे रहा है?
सोशल मीडिया पर सामने आई वीडियो क्लिप में नाबालिग छात्र और छात्रा को कुछ लोगों के बीच घिरा हुआ देखा जा सकता है। रिपोर्टों के मुताबिक, छात्रा लोगों से उन्हें जाने देने की अपील करती दिखाई देती है। एक अन्य वीडियो में एक व्यक्ति द्वारा लड़की को पकड़ने और उठाने की कोशिश किए जाने का दृश्य बताया गया है। छात्र भीड़ से बचकर लड़की की मदद करने की कोशिश करता दिखाई देता है और दोनों अपने स्कूटर की तरफ जाने की कोशिश करते हैं। इसके बाद भी कुछ लोग उनका पीछा करते और उन्हें रोकने की कोशिश करते नजर आते हैं। पुलिस ने वीडियो और अन्य उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर जांच शुरू की है।
कहां की है यह घटना?
पुलिस और मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, घटना जमुई के सदर/नगर थाना क्षेत्र से जुड़े इलाके में हुई। रिपोर्टों में बताया गया है कि दोनों नाबालिग कोचिंग के बाद स्कूटर से बाहर गए थे और लौटते समय उन्हें रास्ते में रोका गया। पुलिस ने वायरल वीडियो सामने आने के बाद पीड़ितों से संपर्क किया और घटना की परिस्थितियों की जांच शुरू की। पुलिस के मुताबिक, वीडियो में दिखाई दे रहे लोगों की पहचान वीडियो फुटेज और अन्य उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर की जा रही है।
पुलिस ने अब तक क्या कार्रवाई की?
वीडियो वायरल होने के बाद जमुई पुलिस ने मामले का संज्ञान लिया और जांच शुरू की। ताजा रिपोर्टों के मुताबिक तीन लोगों को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस अन्य संदिग्धों की पहचान और उनकी भूमिका की भी जांच कर रही है। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, वीडियो की सत्यता, घटना की जगह और उसमें दिखाई दे रहे लोगों की भूमिका को उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर जांचा जा रहा है। चूंकि दोनों पीड़ित नाबालिग हैं, इसलिए मामले में POCSO Act के तहत भी कार्रवाई की गई है।
सबसे बड़ा सवाल- शाम 7 बजे सड़क पर नाबालिग लड़की सुरक्षित क्यों नहीं?
जमुई की घटना के बाद सबसे बड़ा सवाल सार्वजनिक स्थानों पर नाबालिगों की सुरक्षा और पुलिस व्यवस्था को लेकर उठ रहा है। अगर दो नाबालिग छात्र-छात्रा कोचिंग से लौटते समय सड़क पर एक समूह द्वारा रोके जाते हैं और उनके साथ कथित तौर पर मारपीट व छेड़छाड़ की जाती है, तो उस इलाके में पुलिस पेट्रोलिंग और निगरानी व्यवस्था को लेकर सवाल उठना स्वाभाविक है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने भी इसी मुद्दे को उठाया। उन्होंने बिहार सरकार से पूछा कि शाम 7 बजे सार्वजनिक सड़क पर कोई लड़की सुरक्षित क्यों नहीं है और आरोपियों के खिलाफ जल्द कार्रवाई की मांग की।
वीडियो वायरल होने के बाद ही क्यों सक्रिय हुई पुलिस?
इस मामले में पुलिस की शुरुआती प्रतिक्रिया को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। पुलिस के अनुसार, घटना के समय पीड़ितों या उनके परिवार की ओर से तत्काल सूचना नहीं दी गई थी और सोशल मीडिया पर वीडियो सामने आने के बाद पुलिस ने मामले का संज्ञान लिया। इसके बाद पुलिस ने पीड़ितों से संपर्क किया और वीडियो के आधार पर आरोपियों की पहचान शुरू की। जमुई के एसपी ने कहा है कि जांच में वीडियो और दूसरे साक्ष्यों को देखा जा रहा है। ऐसे में अब यह भी महत्वपूर्ण होगा कि जांच में घटना की पूरी परिस्थितियों और पुलिस तक सूचना पहुंचने में हुई देरी को किस तरह दर्ज किया जाता है।
तीन गिरफ्तारियां हुईं, लेकिन बाकी संदिग्धों पर कार्रवाई कब?
तीन लोगों की गिरफ्तारी के बाद जांच का अगला चरण वीडियो में दिखाई दे रहे बाकी लोगों की पहचान और उनकी भूमिका तय करना है। पुलिस का कहना है कि आरोपियों की भूमिका उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर तय की जाएगी। ऐसे में सवाल यह है कि वीडियो में दिखाई देने वाले प्रत्येक व्यक्ति की पहचान कैसे की जा रही है और किसकी भूमिका क्या थी, इसे जांच एजेंसी किस तरह स्थापित करेगी। चूंकि मामले में नाबालिग शामिल हैं, इसलिए उनके बयान, वीडियो फुटेज और अन्य साक्ष्यों को कानूनी प्रक्रिया के तहत सुरक्षित तरीके से जांचना महत्वपूर्ण होगा।
सड़क पर ‘मोरल पुलिसिंग’ की इजाजत किसने दी?
वीडियो में कथित तौर पर एक समूह दोनों नाबालिगों को घेरकर उनसे सवाल-जवाब करता दिखाई देता है। रिपोर्टों के अनुसार, छात्र के साथ मारपीट और लड़की को पकड़ने-खींचने की कोशिश की गई। इससे कानून-व्यवस्था से जुड़ा एक बुनियादी सवाल सामने आता है—किसी व्यक्ति या समूह को सड़क पर खुद फैसला करने और किसी दूसरे व्यक्ति के साथ इस तरह व्यवहार करने का अधिकार किसने दिया? अगर किसी को किसी गतिविधि पर आपत्ति थी, तो कानून के मुताबिक पुलिस को सूचना देना उचित प्रक्रिया है। राहुल गांधी ने भी अपने बयान में ऐसी भीड़-आधारित निगरानी और लड़की के शरीर व उसकी गतिविधियों पर नियंत्रण की मानसिकता की आलोचना की है।
POCSO के तहत कार्रवाई
दोनों पीड़ितों के नाबालिग होने के कारण मामले में POCSO Act के प्रावधान महत्वपूर्ण हैं। पुलिस ने POCSO के तहत केस दर्ज कर कार्रवाई शुरू की है। अब जांच सिर्फ गिरफ्तारी तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भी महत्वपूर्ण है कि प्रत्येक आरोपी की भूमिका साक्ष्यों के आधार पर तय हो, पीड़ित नाबालिगों की पहचान और निजता सुरक्षित रखी जाए और उनके बयान कानूनी प्रक्रिया के अनुसार दर्ज किए जाएं। आगे की धाराएं और कानूनी कार्रवाई जांच में सामने आने वाले तथ्यों और अदालत की प्रक्रिया के आधार पर तय होगी।
राहुल गांधी ने सरकार से क्या पूछा?
घटना का वीडियो सामने आने के बाद लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने वीडियो को बेहद परेशान करने वाला बताया और कहा कि वीडियो में दिखाई देने वाले हर व्यक्ति की पहचान होनी चाहिए। राहुल गांधी ने आरोपियों के खिलाफ POCSO के तहत कार्रवाई की मांग करते हुए सवाल किया कि अगर घटना 19 सितंबर की है तो आरोपी अब तक गिरफ्तार क्यों नहीं हुए और बिहार सरकार को जवाब देना चाहिए कि शाम 7 बजे सड़क पर लड़की सुरक्षित क्यों नहीं है। यह राहुल गांधी की राजनीतिक प्रतिक्रिया है; घटना में आरोपियों की कानूनी जिम्मेदारी जांच और अदालत की प्रक्रिया से तय होगी।
सरकार की ओर से क्या जवाब आया?
राहुल गांधी की प्रतिक्रिया के बाद बिहार सरकार की ओर से भी बयान सामने आया। बिहार के मंत्री सुनील कुमार ने घटना की निंदा करते हुए कहा कि स्थानीय प्रशासन उचित कार्रवाई करेगा और दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए। उन्होंने साथ ही कहा कि एक घटना के आधार पर पूरे बिहार को कानूनविहीन बताना उचित नहीं है। इस तरह मामले में एक तरफ विपक्ष की ओर से कानून-व्यवस्था और लड़कियों की सुरक्षा पर सवाल उठाए गए हैं, जबकि सरकार की ओर से पुलिस कार्रवाई और दोषियों के खिलाफ कदम उठाने की बात कही गई है।
राष्ट्रीय महिला आयोग ने भी लिया संज्ञान
मामले पर राष्ट्रीय महिला आयोग (NCW) ने भी स्वतः संज्ञान लिया है। आयोग ने घटना में शामिल लोगों की पहचान, गिरफ्तारी और समयबद्ध जांच की मांग की है। NCW की कार्रवाई के बाद मामला स्थानीय पुलिस जांच से आगे राष्ट्रीय स्तर पर महिला और बाल सुरक्षा के मुद्दे से भी जुड़ गया है। आयोग ने उपलब्ध वीडियो फुटेज के आधार पर कार्रवाई सुनिश्चित करने की मांग की है।
अब सरकार के सामने ये सीधे सवाल
जमुई की घटना के बाद सरकार और पुलिस के सामने कई सवाल हैं। क्या घटना वाले इलाके में पर्याप्त पुलिस पेट्रोलिंग थी? क्या पुलिस को घटना की जानकारी पहले मिल सकती थी? वीडियो सामने आने के बाद कार्रवाई कितनी तेजी से हुई? वीडियो में दिखाई देने वाले बाकी लोगों की पहचान कब तक होगी? प्रत्येक आरोपी की भूमिका किस साक्ष्य के आधार पर तय होगी? नाबालिग पीड़ितों की सुरक्षा और काउंसलिंग के लिए क्या व्यवस्था की गई है? और सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि क्या इस मामले की जांच सिर्फ वायरल वीडियो तक सीमित रहेगी या घटना की पूरी परिस्थितियों की भी पड़ताल होगी? फिलहाल तीन गिरफ्तारियां हो चुकी हैं और जांच जारी है। पुलिस बाकी संदिग्धों की भूमिका की जांच कर रही है, जबकि राहुल गांधी और राष्ट्रीय महिला आयोग की प्रतिक्रिया के बाद मामले में जवाबदेही का सवाल भी प्रमुखता से सामने आया है। अंतिम तौर पर किस व्यक्ति की क्या भूमिका थी और किन धाराओं में दोष साबित होता है, यह पुलिस जांच और अदालत की कानूनी प्रक्रिया से तय होगा।
जमुई की इस शर्मनाक घटना, कानून-व्यवस्था पर उठते सवालों और समाज की खामोशी पर वरिष्ठ पत्रकार राणा यशवंत का खास विश्लेषण यहां देखें।




