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यूक्रेन मामले के बीच रूस-चीन के गठजोड़ से US और यूरोप में खलबली, जानें कैसे फायदा उठाने की ताक में हैं जिनपिंग

यूक्रेन मामले के बीच रूस-चीन के गठजोड़ से US और यूरोप में खलबली, जानें कैसे फायदा उठाने की ताक में हैं जिनपिंग

नई दिल्ली, यूक्रेन-रूस के बीच विवाद से आज दुनिया में खतरे का अलार्म बज रहा है। रूस ने जिस तरह से यूक्रेन से लगी सीमाओं पर सैन्य तैनाती की है उससे स्थिति की भयावहता का अंदाजा लगाया जा सकता है। दुनिया दो खेमों में बंट चुकी है। एक तरफ रूस और चीन हैं तो दूसरी तरफ यूक्रेन के साथ अमेरिका, ब्रिटेन सहित नाटो देश हैं। रूस और चीन के गठजोड़ से अमेरिका समेत सारी दुनिया में खलबली मच गई है।

रूस और चीन के बीच उभरते नए गठजोड़ से अमेरिका के साथ यूरोप भी चिंता में आ गया है। समूचे यूरोप को अधिकतर गैस और तेल की सप्‍लाई रूस से होती है। रूस और चीन के बीच नजदीकी को अमेरिका एक बड़े खतरे के रूप में देख रहा है। बीजिंग ओलंपिक गेम्‍स समारोह का हिस्‍सा बनने गए रूसी राष्‍ट्रपति व्‍लादिमीर पुतिन और चीन के राष्‍ट्रपति शी जिनपिंग के बीच एक बड़ी डील हुई है। ये गैस, तेल सप्‍लाई को लेकर है। हालांकि, आर्थिक प्रतिबंधों की आड़ लेकर अमेरिका रूस की घेराबंदी करने में लगा है। लेकिन दो राय नहीं कि और ज्‍यादा प्रतिबंध लगते हैं तो वह चीन के ज्‍यादा करीब चला जाएगा।

उधर, यूक्रेन को लेकर रूस और अमेरिका समेत नाटो देशों में जंग के मंडराते काले बादलों के बीच चीन ने बड़ा खेल कर दिया है। दक्षिण चीन सागर में चल रहे तनाव के बीच चीन के विदेश मंत्री वांग यी ने इस पूरे विवाद में खुलकर रूस का समर्थन किया है। वांग यी ने कहा है कि अमेरिका को रूस की चिंताओं को गंभीरता के साथ लेना चाहिए। चीन के इस कदम को रूस की सहानुभूति हासिल करने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है। ड्रैगन के दांव से भारत भी परेशान है।

भारत का चीन के साथ सीमा विवाद चल रहा है। LAC पर दोनों देशों की सेना ने भारी तादाद में सैनिक तैनात कर रखे हैं। भारत चीन से निपटने के लिए बड़े पैमाने पर हथियार रूस से खरीद रहा है। भारतीय सेना के करीब 60 फीसदी हथियार रूसी मूल के हैं। रूसी ने हाथ झटका तो भारत को दिक्कत होनी तय है। मोदी सरकार खतरे को भांप रही है। सारी स्थितियों को देखते हुए अब भारत अमेरिका से बात कर रहा है।

चीन फायदा उठाने की कोशिश में

चीन ने अमेरिका के खिलाफ नया मोर्चा खोलकर हालातों को और जटिल बना दिया है। चीन के सुपरपावर बनने की राह में अमेरिका ही सबसे बड़ा रोड़ा है। अगर यूक्रेन विवाद के चलते रूस और अमेरिका युद्ध के मैदान में आमने-सामने आए तो अमेरिका रूस-यूरोप के बॉर्डर पर उलझकर रह जाएगा और दक्षिण चीन सागर सहित कई इलाकों में चीन अमेरिका की गैरमौजूदगी का फायदा उठाकर खुद को मजबूत कर लेगा।

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