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जेडीयू में वक्फ संशोधन विधेयक पर घमासान: विरोध, इस्तीफे और डैमेज कंट्रोल की कोशिशें तेज

जेडीयू में वक्फ संशोधन विधेयक पर घमासान: विरोध, इस्तीफे और डैमेज कंट्रोल की कोशिशें तेज

पटना। संसद से वक्फ संशोधन विधेयक पारित होने के बाद बिहार की राजनीति में भूचाल आ गया है। विधेयक को लेकर जनता दल यूनाइटेड (JDU) के भीतर भारी असहमति देखने को मिल रही है। खासकर पार्टी के मुस्लिम नेताओं ने इस विधेयक का खुलकर विरोध किया, जिससे पार्टी के भीतर मतभेद सतह पर आ गए हैं। पार्टी ने स्थिति संभालने के लिए शनिवार को पटना में प्रेस कॉन्फ्रेंस का आयोजन किया, लेकिन यह दांव उल्टा पड़ता नजर आ रहा है। प्रेस कॉन्फ्रेंस के बीच में ही मीडिया के तीखे सवालों से बचते हुए कार्यक्रम को अचानक खत्म कर दिया गया, जिससे विवाद और गहराता चला गया।

कौन-कौन रहे प्रेस कॉन्फ्रेंस में मौजूद?
इस प्रेस कॉन्फ्रेंस में शिया वक्फ बोर्ड के चेयरमैन अफजल अब्बास, जेडीयू अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ के अध्यक्ष अशरफ अंसारी, एमएलसी गुलाम गौस, पूर्व राज्यसभा सांसद अशफाक करीम, सुन्नी वक्फ बोर्ड की अध्यक्ष अंजुम आरा, कहकशा परवीन और सलीम परवेज जैसे पार्टी के प्रमुख मुस्लिम चेहरे शामिल थे। खास बात यह रही कि इनमें से कई नेता जैसे गुलाम गौस, अफजल अब्बास और अशफाक करीम, पिछले कुछ दिनों से विधेयक का विरोध करते आ रहे थे।

क्या कहा अंजुम आरा ने?
प्रेस कॉन्फ्रेंस में अंजुम आरा ने दावा किया कि जेडीयू द्वारा संयुक्त संसदीय समिति (JPC) में रखे गए पांच सुझावों को केंद्र सरकार ने विधेयक में स्वीकार कर लिया है। इनमें मुख्यतः राज्य सरकार को भूमि मामलों में वरीयता, कानून को पूर्वव्यापी नहीं बनाने, धार्मिक संस्थानों को छेड़छाड़ से सुरक्षा, वक्फ विवादों के समाधान के लिए उच्चाधिकारियों को अधिकृत करना और संपत्तियों को रजिस्टर करने की समयसीमा बढ़ाना शामिल है।

किन नेताओं ने जताई असहमति? कौन दे चुका है इस्तीफा?
बिल पारित होने के बाद जेडीयू के अंदर असंतोष की लहर दौड़ पड़ी। सूत्रों के मुताबिक, पार्टी के वरिष्ठ नेता और विधान परिषद सदस्य गुलाम गौस ने इस बिल को मुस्लिम विरोधी बताते हुए इस्तीफा देने की पेशकश की थी। वहीं, पूर्व सांसद अशफाक करीम और वक्फ बोर्ड के सदस्य अफजल अब्बास भी विधेयक को लेकर नाखुशी जता चुके हैं। हालांकि, इन नेताओं के इस्तीफे को पार्टी ने स्वीकार नहीं किया है और उन्हें मनाने की कोशिश जारी है।

पार्टी सूत्रों का कहना है कि अशफाक करीम ने मौखिक रूप से नेतृत्व को इस्तीफा देने की मंशा जताई थी लेकिन अभी तक लिखित इस्तीफा नहीं सौंपा गया है। वहीं गुलाम गौस ने मीडिया से कहा कि वह पार्टी लाइन से अलग नहीं हैं लेकिन वक्फ बिल पर उन्हें “कुछ बिंदुओं पर आपत्ति” है।

विपक्ष ने साधा निशाना
आरजेडी ने जेडीयू की इस पूरी कवायद को “डैमेज कंट्रोल ड्रामा” करार दिया। पार्टी प्रवक्ता ने कहा कि जेडीयू ने दिखावे के लिए विरोधी नेताओं को मंच पर बैठाया, ताकि यह संदेश दिया जा सके कि पार्टी एकजुट है। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अगर सभी नेता सहमत थे, तो मीडिया के सवालों से बचते हुए प्रेस कॉन्फ्रेंस अचानक क्यों खत्म की गई?

क्या बोले जेडीयू नेता?
इस आलोचना पर जेडीयू प्रवक्ता राजीव रंजन ने कहा, “हमारी पार्टी पूरी तरह लोकतांत्रिक है। कोई भी नेता जबरन मंच पर नहीं बैठाया गया। जब विधेयक को लेकर भ्रांतियां दूर हो चुकी हैं, तो जरूरी है कि सही जानकारी लोगों तक पहुंचे।”

वहीं एमएलसी खालिद ने दावा किया, “पार्टी पूरी तरह से मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व में एकजुट है। कोई भी मुस्लिम नेता पार्टी नहीं छोड़ेगा। जेडीयू धर्मनिरपेक्ष, उदार और प्रगतिशील पार्टी है।”

भाजपा नेताओं का पलटवार
भाजपा नेता रविशंकर प्रसाद ने आरजेडी पर वोट बैंक की राजनीति करने का आरोप लगाते हुए कहा कि वक्फ संशोधन विधेयक पूरी तरह संवैधानिक है और यह पसमांदा, गरीब और मुस्लिम महिलाओं के हित में है। उन्होंने सवाल उठाया कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी और प्रियंका गांधी इस पर चुप क्यों हैं।

जेडीयू की स्थिति इस समय मुश्किलों में फंसी हुई है। एक ओर पार्टी का शीर्ष नेतृत्व केंद्र सरकार के साथ खड़ा दिख रहा है, वहीं दूसरी ओर अल्पसंख्यक नेताओं की नाराजगी पार्टी को भारी पड़ सकती है। आने वाले समय में जेडीयू को स्पष्टता और भरोसे के साथ स्थिति को संभालना होगा, वरना विपक्ष इस मुद्दे को लगातार भुनाने की कोशिश करता रहेगा।

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