द फ्रंट डेस्क: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज का एक नया नक्शा साझा किया है, जिसमें इस महत्वपूर्ण समुद्री रास्ते को ‘ट्रंप स्ट्रेट’ लिखा गया है। ट्रंप पहले भी होर्मुज का नाम बदलकर ‘ट्रंप स्ट्रेट’ करने का सुझाव दे चुके हैं। यह कदम ऐसे समय आया है जब अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य तनाव जारी है और होर्मुज से तेल-गैस की आवाजाही को लेकर पूरी दुनिया की नजर इस क्षेत्र पर बनी हुई है। हालांकि, ट्रंप के नक्शे में नाम लिखे जाने का मतलब यह नहीं है कि होर्मुज का अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आधिकारिक नाम बदल गया है।
ट्रंप ने होर्मुज का नाम ‘ट्रंप स्ट्रेट’ क्यों रखा?
डोनाल्ड ट्रंप ने इससे पहले 2 सितंबर को सोशल मीडिया पर सवाल उठाया था कि क्या स्ट्रेट ऑफ होर्मुज का नाम बदलकर ‘ट्रंप स्ट्रेट’ कर देना चाहिए। उस समय उन्होंने दावा किया था कि यह जलडमरूमध्य अमेरिकी नियंत्रण में है। अब 26 सितंबर को साझा किए गए नक्शे में इसे ‘ट्रंप स्ट्रेट’ के नाम से दिखाया गया है। यानी ट्रंप के लिए यह सिर्फ किसी नक्शे में नाम लिखने का मामला नहीं है, बल्कि ईरान के साथ चल रहे विवाद और होर्मुज पर अमेरिकी दबाव के बीच एक राजनीतिक संदेश के तौर पर भी देखा जा रहा है। लेकिन यहां सबसे जरूरी बात यह है कि अमेरिकी राष्ट्रपति के सोशल मीडिया पोस्ट से किसी अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्ग का आधिकारिक वैश्विक नाम अपने आप नहीं बदलता। होर्मुज ईरान और ओमान के बीच स्थित है और इसके इस्तेमाल से जुड़े मुद्दे अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानून तथा दोनों तटीय देशों से जुड़े हैं। इसलिए फिलहाल ‘ट्रंप स्ट्रेट’ को ट्रंप द्वारा इस्तेमाल किए गए नाम के रूप में समझना चाहिए, न कि होर्मुज के आधिकारिक अंतरराष्ट्रीय नाम के रूप में।
आखिर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज इतना महत्वपूर्ण क्यों है?
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री ऊर्जा मार्गों में से एक है। यह ईरान और ओमान के बीच स्थित है और फारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी तथा आगे अरब सागर से जोड़ता है। इसकी भौगोलिक स्थिति ऐसी है कि खाड़ी के प्रमुख तेल उत्पादक देशों से दुनिया के दूसरे हिस्सों तक जाने वाले समुद्री ऊर्जा परिवहन के लिए यह बेहद अहम रास्ता बन जाता है। अमेरिकी ऊर्जा सूचना प्रशासन के अनुसार, 2024 में औसतन करीब 2 करोड़ बैरल प्रतिदिन तेल और पेट्रोलियम उत्पाद होर्मुज से होकर गुजरे थे। यह उस साल दुनिया की पेट्रोलियम तरल खपत के करीब पांचवें हिस्से के बराबर था। 2025 की पहली छमाही में भी यहां से करीब 2.09 करोड़ बैरल प्रतिदिन तेल प्रवाहित हुआ। यही वजह है कि होर्मुज को दुनिया के प्रमुख तेल चोकपॉइंट में गिना जाता है।

होर्मुज बंद होने से भारत और दुनिया पर क्या असर पड़ेगा?
होर्मुज में लंबे समय तक आवाजाही बाधित होती है तो इसका असर केवल अमेरिका और ईरान तक सीमित नहीं रहेगा। तेल और गैस की आपूर्ति प्रभावित होने पर अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतों पर दबाव बढ़ सकता है। खास तौर पर एशियाई देशों के लिए यह चिंता बड़ी है, क्योंकि होर्मुज से गुजरने वाली ऊर्जा का बड़ा हिस्सा एशियाई बाजारों की ओर जाता है। भारत भी इस पूरे घटनाक्रम से प्रभावित हो सकता है, क्योंकि देश अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा कच्चे तेल के आयात से पूरा करता है। होर्मुज से गुजरने वाले तेल और गैस की आपूर्ति में बड़ी रुकावट आने पर वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आ सकती है, जिसका असर भारत के आयात बिल, रुपये और ईंधन की कीमतों पर पड़ सकता है। हाल के दिनों में होर्मुज को दोबारा खोलने की ईरान की पेशकश की खबर के बाद तेल की कीमतों में गिरावट भी दर्ज की गई थी, जो इस मार्ग की वैश्विक आर्थिक अहमियत को दिखाती है।
ईरान होर्मुज को फिर खोलने की बात क्यों कर रहा है?
ट्रंप के ‘ट्रंप स्ट्रेट’ वाले नक्शे के सामने आने से कुछ दिन पहले ईरान की ओर से होर्मुज को दोबारा खोलने का प्रस्ताव सामने आया था। रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, एक वरिष्ठ ईरानी अधिकारी ने कहा था कि अगर अमेरिका सैन्य दबाव कम करता है और ईरानी बंदरगाहों पर लगी नाकेबंदी हटाता है तो ईरान एक सप्ताह के भीतर होर्मुज को फिर खोलने के लिए तैयार है। ईरान ने यह प्रस्ताव 16 सितंबर को मध्यस्थों के जरिए अमेरिका तक पहुंचाया था। इससे साफ है कि होर्मुज इस समय अमेरिका-ईरान विवाद में सिर्फ एक समुद्री रास्ता नहीं है, बल्कि बातचीत और दबाव दोनों का महत्वपूर्ण हिस्सा बन गया है। ईरान के लिए यह रणनीतिक और आर्थिक रूप से महत्वपूर्ण मार्ग है, जबकि अमेरिका और उसके सहयोगी यहां से वाणिज्यिक जहाजों की सुरक्षित आवाजाही चाहते हैं। इसी बीच फ्रांस ने भी होर्मुज में जहाजों की स्वतंत्र आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में अंतरराष्ट्रीय मिशन से जुड़ा प्रस्ताव तैयार करने पर काम शुरू किया है।

अमेरिका-ईरान तनाव में होर्मुज इतना बड़ा मुद्दा क्यों बन गया?
अमेरिका और ईरान के बीच मौजूदा तनाव का एक बड़ा कारण ईरान का परमाणु कार्यक्रम है। अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप का कहना है कि ईरान को परमाणु हथियार विकसित करने की अनुमति नहीं दी जा सकती। दूसरी ओर ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम को शांतिपूर्ण और नागरिक जरूरतों के लिए इस्तेमाल करने का अधिकार बताता रहा है। इसी विवाद के बीच सैन्य कार्रवाई, प्रतिबंध, बंदरगाहों की नाकेबंदी और समुद्री आवाजाही जैसे मुद्दे भी जुड़ गए हैं। होर्मुज की अहमियत इसलिए और बढ़ गई है क्योंकि इसे बंद या बाधित करने की किसी भी कोशिश का असर वैश्विक ऊर्जा बाजार पर तुरंत पड़ सकता है। अमेरिकी ऊर्जा सूचना प्रशासन के आंकड़ों के अनुसार, 2026 की दूसरी तिमाही में होर्मुज से तेल की आवाजाही 2025 की तुलना में काफी कम रही और एलएनजी की आवाजाही में भी भारी गिरावट दर्ज की गई। यानी इस पूरे विवाद में होर्मुज एक तरह से रणनीतिक दबाव का केंद्र बन चुका है। ईरान के लिए यह अपने क्षेत्रीय प्रभाव और आर्थिक हितों से जुड़ा है, जबकि अमेरिका और दूसरे देशों के लिए यहां से अंतरराष्ट्रीय व्यापार और ऊर्जा की सुरक्षित आवाजाही अहम है।
क्या ट्रंप के नाम रखने से सच में होर्मुज का नाम बदल गया?
नहीं। फिलहाल ऐसा नहीं कहा जा सकता कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज का आधिकारिक अंतरराष्ट्रीय नाम बदलकर ‘ट्रंप स्ट्रेट’ हो गया है। ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट और साझा किए गए नक्शे में इस नाम का इस्तेमाल किया है, लेकिन किसी अमेरिकी राष्ट्रपति के ऐसा करने से ईरान, ओमान, दूसरे देशों या अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं के लिए यह नाम बाध्यकारी नहीं हो जाता। इसलिए इस पूरे मामले को आसान भाषा में समझें तो ‘ट्रंप स्ट्रेट’ फिलहाल ट्रंप की ओर से इस्तेमाल किया गया नाम है, जबकि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जलडमरूमध्य को स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के नाम से ही जाना जाता है। असली बड़ा मुद्दा नाम नहीं, बल्कि इस समुद्री रास्ते पर जारी तनाव है। यहां से दुनिया के तेल और गैस का बड़ा हिस्सा गुजरता है और किसी लंबे व्यवधान की स्थिति में इसका असर भारत समेत पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है। इसलिए ट्रंप का नया नक्शा अमेरिका-ईरान विवाद के बीच एक राजनीतिक संदेश जरूर है, लेकिन आने वाले समय में असली नजर इस बात पर होगी कि क्या होर्मुज में सुरक्षित नौवहन बहाल होता है, क्या ईरान और अमेरिका के बीच बातचीत आगे बढ़ती है और क्या इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग से तेल-गैस की आवाजाही सामान्य हो पाती है।




