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जंगल में ताकतवर रहने के लिए जनसंख्या बढ़ाई जाती, जो ताकतवर वही जिंदा रहता: मोहन भागवत

जंगल में ताकतवर रहने के लिए जनसंख्या बढ़ाई जाती, जो ताकतवर वही जिंदा रहता: मोहन भागवत

नई दिल्ली। जनसंख्या को लेकर भारत में शुरू हुई बहस में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख मोहन भागवत (Mohan Bhagwat) भी उतर चुके हैं। संघ प्रमुख ने जनसंख्या को लेकर बड़ा बयान देकर हलचल मचा दिया है। मोहन भागवत ने कहा कि जनसंख्या बढ़ाने और खाने का काम तो जानवर भी करते हैं। जंगल में सबसे ताकतवर रहने के लिए यह सब जरूरी है। जंगल का कानून है कि जो ताकतवर रहेगा वही जिंदा रहेगा। इंसानों में ऐसा नहीं होता। उन्होंने कहा कि इंसान जब ताकतवर होकर दूसरों की मदद करता है तो वह इंसानियत की निशानी है।

दीक्षांत समारोह में भाषण दे रहे थे संघ प्रमुख

संघ प्रमख मोहन भागवत कर्नाटक के चिक्कबल्लापुर में श्री सत्य साईं यूनिवर्सिटी फॉर ह्यून एक्सीलेंस के पहले दीक्षांत में भाग लेने पहुंचे थे। उन्होंने भारतीय विकास, मानवता समेत कई मुद्दों पर अपनी बात रखी।

इतिहास से सबक लेकर भारत ने किया विकास

देश के विकास पर बात करते हुए संघ प्रमुख मोहन भागवत ने कहा कि भारत ने इतिहास से सबक लेकर विकास किया है। भागवत ने कहा कि देश हाल ही में काफी तरक्की कर चुका है। देशवासियों ने विकास देखा है। हमने इतिहास से सबक लेकर भविष्य की ओर देखते हुए विकास किया है। कोई 10-12 साल पहले ऐसा कहता तो इसे गंभीरता से नहीं लिया जाता। जो विकास आज दिखाई दे रहा है, उसकी नींव 1857 में रखी गई थी। हालांकि, इन सबके बीच विज्ञान और बाहरी दुनिया में संतुलन का अभाव साफ दिखाई देता है।

श्रेष्ठता अध्यात्म के जरिए ही मिल सकेगी

आरएसएस चीफ ने कहा कि अगर किसी की भाषा अलग है, धर्म अलग है, यहां तक कि देश भी अलग है तो यह विवाद की जड़ है। पर्यावरण और विकास के बीच हमेशा से ही विवाद होता रहा है। श्रेष्ठता अध्यात्म के जरिए ही मिल सकती है क्योंकि विज्ञान अभी तक सृष्टि का मूल नहीं समझ सका है। विज्ञान ने केवल इतना पाया कि सब कुछ आपस में जुड़ा है, लेकिन वो कनेक्टिंग फैक्टर नहीं खोज सका।

दीक्षांत में ये भी रहे मौजूद

दीक्षांत में इसरो के पूर्व अध्यक्ष के कस्तूरीरंगन, भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान सुनील गावस्कर, गायक पंडित एम वेंकटेश कुमार भी मौजूद रहे।

जनसंख्या पर क्यों होने लगी अचानक बहस?

दरअसल, भारत की जनसंख्या अगले साल तक विश्व में सबसे अधिक होने का दावा किया जा रहा है। UN रिपोर्ट में यह दावा किया गया है कि 2023 में भारत जनसंख्या के मामले में चीन को पीछे छोड़ देगा। इस रिपोर्ट के बाद देश में जनसंख्या असंतुलन को लेकर एक नई बहस भी छिड़ गई है।

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