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पीके की एंट्री: कांग्रेस में ‘सुपर नेता’ के रूप में शामिल होंगे प्रशांत किशोर या बनेंगे सुपर वर्कर!

पीके की एंट्री: कांग्रेस में ‘सुपर नेता’ के रूप में शामिल होंगे प्रशांत किशोर या बनेंगे सुपर वर्कर!

नई दिल्ली, हफ्ते भर से प्रशांत किशोर की कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी से मुलाकात और पार्टी की दशा-दिशा को लेकर चर्चा हो रही है। प्रशांत किशोर लगातार पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष, पार्टी के सांसद राहुल गांधी और महासचिव प्रियंका गांधी के संपर्क में बने हुए हैं। मुलाकातों का सिलसिला शुरू होने के पहले उन्होंने राहुल गांधी का भरोसा जीता, प्रियंका गांधी की सहमति पाई और अब कांग्रेस पार्टी में शामिल होने की चर्चा जोरों पर है। निर्णय कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी, राहुल गांधी और प्रशांत किशोर की रजामंदी के आधार पर ही होना है, लेकिन इतना करीब-करीब तय है कि सुपर नेता के रूप में प्रशांत किशोर को कांग्रेस में इंट्री मिलने की उम्मीदों को झटका लग सकता है। कांग्रेस पार्टी के एक पूर्व केन्द्रीय मंत्री ने कुछ इसी तरह का संकेत दिया है।

कांग्रेस पार्टी मुख्यालय 24 अकबर रोड से लेकर लुटियन जोन के कई बंगलों में प्रशांत किशोर को लेकर चर्चा हो रही है। मोती लाल नेहरू मार्ग पर रहने वाले एक नेता ने नाम न छापने की शर्त पर कहा कि इस तरह के प्रशांत किशोर राजनीतिक दलों में आते-जाते रहते हैं। एक प्रशांत किशोर के आने से कोई बहुत बड़ी बात नहीं हो जाती। वह तो कभी प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के साथ भी थे और अब जब पिछले काफी साल से साथ नहीं हैं तो भाजपा और प्रधानमंत्री मोदी की सेहत पर कोई फर्क तो पड़ा नहीं? जोरबाग में रहने वाले कांग्रेस के एक नेता तो इस मुद्दे पर बात ही नहीं करना चाहते। सूत्र का कहना है कि पहले इस मामले में एक निर्णय तो हो। सूत्र का कहना है कि कागज पर बना नक्शा और जमीन की हकीकत में बहुत कुछ बदल जाता है।

एक अन्य पूर्व केन्द्रीय मंत्री और राज्यसभा सदस्य का कहना है कि प्रशांत किशोर चुनाव प्रचार की रणनीति तैयार करने में माहिर हैं। अब वह राजनेता के तौर पर अपनी नई भूमिका में आना चाहते हैं। इसके लिए कांग्रेस पार्टी सबसे अच्छा विकल्प है। हमें खुशी होगी कि वह कांग्रेस पार्टी के एक सिपाही के रूप में कांग्रेस की सदस्यता ग्रहण करें। कांग्रेस देश की सबसे पुरानी, सबको साथ लेकर चलने वाली धर्मनिरपेक्ष पार्टी है। इसके सिवा मुझे कुछ नहीं कहना है। बार-बार कुरेदने के बाद पूर्व केन्द्रीय मंत्री ने केवल इतना भर कहा कि प्रशांत किशोर को लेकर किसी को सुपर नेता के रूप में उनके कांग्रेसी होने का मुगालता नहीं पालना चाहिए।

क्या पार्टी के आंतरिक ढांचे समेत अन्य मामलों में सुधार है?
कांग्रेस के एक पूर्व महासचिव कहते हैं कि क्या प्रशांत किशोर के साथ चर्चा और उनका कांग्रेस में शामिल होने का मसला 2024 की चुनौतियों को देखते हुए पार्टी में आंतरिक और अन्य जरूरी सुधार से जुड़ा है? अगर ऐसा नहीं है तो इस मुद्दे पर चर्चा का कोई फायदा नहीं है। यह सब समय बिताने जैसा है। उन्होंने कहा कि देश की सबसे पुरानी राजनीतिक पार्टी के सामने कुछ बड़ी चुनौतियां लगातार खड़ी हैं। अभी तक मुझे इन चुनौतियों से निबटने के किसी ठोस प्रयास की कोई आहट नहीं सुनाई दे रही है। वरिष्ठ नेता ने कहा कि जो चल रहा है, उसे सुनकर मुझे भी तकलीफ होती है। मेरी भी निष्ठा का मामला है। इससे अधिक मैं कुछ नहीं कह सकता और प्रशांत किशोर तो अभी कोई चर्चा का विषय भी नहीं हैं।

महेन्द्र जोशी कांग्रेस के वरिष्ठ नेता हैं। तमाम मामलों में बहुत संभलकर राय रखते हैं। प्रशांत किशोर के विषय पर उन्होंने बड़ी बेबाकी से कहा कि भीतर जो चल रहा है, उसकी उन्हें जानकारी नहीं है। बाहर मीडिया में जो चल रहा है सभी जानते हैं। उनकी सभी सद्इच्छाएं कांग्रेस के साथ हैं। जो भी कांग्रेस के साथ जुड़ना चाहे, वह हमेशा उसका स्वागत करते हैं। संजीव सिंह भी बिहार से आते हैं। कांग्रेस के नेता हैं। संजीव सिंह कहते हैं कि यह विषय ही उनकी समझ के दायरे से बाहर का है। जो भी कांग्रेस अध्यक्ष निर्णय लेंगी, उसका वह सम्मान करेंगे। उनकी निष्ठा पार्टी के साथ है।

कांग्रेस में किस रूप में शामिल हों प्रशांत किशोर… अलग-अलग है राय
उत्तर प्रदेश से आने वाले कांग्रेस के वरिष्ठ नेता का कहना है कि उन्होंने सामान्य कार्यकर्ता के रूप में कांग्रेस की सदस्यता ग्रहण की थी। सभी को इसी तरह से पार्टी में शामिल होना पड़ता है। कांग्रेस पार्टी के एक पूर्व महासचिव का कहना है कि वह काल्पनिक सवाल का उत्तर नहीं देते? इसके बाद वह तपाक से सवाल पूछते हैं कि क्या कांग्रेस महासचिव बनाए जाने की कोई सूचना है? इस सवाल की टोह लेने पर कई तरह के सुझाव भी सुनने को मिले।

प्रशांत किशोर के नाम पर भी कांग्रेस में तीन धड़े हैं। एक धड़ा कांग्रेस अध्यक्ष के निर्णय के साथ खड़ा है। एक धड़ा तटस्थ है और निर्णय होने पर अपनी राय देने की बात कह रहा है। एक तीसरा धड़ा भी है, जिसे प्रशांत किशोर के पार्टी में शामिल हो जाने के बाद भी कोई बड़ा सुधार या परिवर्तन नजर नहीं आ रहा है। दिल्ली प्रदेश कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता ने कहा कि प्रशांत किशोर चुनाव प्रचार अभियान के रणनीतिकार हैं। उनके लिए कांग्रेस अध्यक्ष के सलाहकार की भूमिका सबसे उपयुक्त रहेगी। कुछ कांग्रेसियों का कहना है कि उन्हें पार्टी की सदस्यता दिलाने के कुछ समय बाद चुनावी राज्य का प्रभारी बनाया जा सकता है। पहली बड़ी चुनौती गुजरात की है। इस बहाने उनके कौशल की परीक्षा भी हो जाएगी।

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