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नए संसद भवन की छत पर अशोक स्तंभ और सारनाथ में बने शेर के मुंह में क्या है फर्क, केंद्रीय मंत्री हरदीप पुरी और इतिहासकार ओमजी ने बताया

नए संसद भवन की छत पर अशोक स्तंभ और सारनाथ में बने शेर के मुंह में क्या है फर्क, केंद्रीय मंत्री हरदीप पुरी और इतिहासकार ओमजी ने बताया

नई दिल्ली, नए संसद भवन पर स्थापित अशोक स्तंभ के स्वरूप को लेकर विपक्ष केंद्र सरकार पर हमलावर है। विपक्षी दलों का आरोप है कि अशोक स्तंभ पर मौजूद शांत सौम्य शेरों की जगह संसद भवन पर आक्रोश वाले शेर की प्रतिमा लगाई गई है। हालांकि इसको लेकर केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने एक ट्वीट में कहा कि दोनों प्रतीकों में कोई अंतर नहीं है।

बता दें कि मोदी सरकार में केंद्रीय आवास एवं शहरी मामलों के मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने मंगलवार को विपक्ष पर पलटवार करते हुए कहा कि अगर आकार को छोड़ दें तो दोनों में कोई अंतर नहीं है। उन्होंने कहा कि यदि सारनाथ स्थित राष्ट्रीय प्रतीक के आकार को बढ़ा दिया जाए या फिर नए संसद भवन पर बने प्रतीक को छोटा कर दिया जाए, तो दोनों में कोई अंतर नहीं होगा।

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि दोनों आकृतियों में कोई अंतर नहीं है, चूंकि सारनाथ की आकृति बहुत छोटी और संसद के ऊपर लगी आकृति बड़ी है। इसलिए दोनों में अंतर नजर आ रहा है। बता दें कि हरदीप सिंह पुरी ने अपने ट्वीट में सारनाथ और संसद भवन के ऊपर बने राष्ट्रीय प्रतीक की फोटो शेयर की है।

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि अगर कोई व्यक्ति सारनाथ प्रतीक को नीचे से देखता है, तो उसे शेर की आकृति शांत या क्रोधित दिखाई देगी। वहीं आकृति के आकार को लेकर उन्होंने कहा कि अगर मूल प्रतीक की वास्तविक प्रतिकृति संसद की नई इमारत पर लगाई जाती तो इसे दूर से देख पाना मुश्किल है। उन्होंने कहा कि ‘विशेषज्ञों’ को यह भी पता होना चाहिए कि सारनाथ में रखा गया मूल प्रतीक जमीन पर है जबकि नया प्रतीक जमीन से 33 मीटर की ऊंचाई पर है।

वहीं इंडिया टीवी न्यूज चैनल से बात करते हुए इतिहासकार डॉ ओमजी उपाध्याय ने कहा, “सारनाथ और संसद पर लगे राष्ट्रीय प्रतीक में समानताएं हैं।” उन्होंने कहा कि कोई राजनीतिक दल किसी राष्ट्रीय प्रतीक से छेड़छाड़ करने की कल्पना भी नहीं कर सकता है। इतिहासकार ने कहा कि मूर्तियों से छेड़छाड़ की बात एकदम निराधार है।

उन्होंने कहा कि एक पत्थर पर बनी आकृति को जब आप मेटल पर उकेरते हैं तो इसमें कलात्मक अभिव्यक्ति का ही अंतर होगा, बाकी कोई छेड़छाड़ होना मुश्किल है और न ही कोई राजनीतिक दल ऐसा करने की सोचेगा। ओमजी उपाध्याय ने कहा कि भारत अपने कलात्मक कौशल के काफी प्रसिद्ध है। ऐसे में आकृति बनाने में गड़बड़ी हुई है, कहना गलत होगा।

बता दें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 11 जुलाई को दिल्ली में नए संसद भवन की छत पर राष्ट्रीय प्रतीक का अनावरण किया था। इस दौरान आयोजित समारोह में लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला और राज्यसभा के उप सभापति हरिवंश मौजूद थे।

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