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Hijab row timeline: ह‍िजाब विवाद के पूरे मामले को इन 10 पॉइंट में समझिए, कब, कहां, क्‍या हुआ

Hijab row timeline: ह‍िजाब विवाद के पूरे मामले को इन 10 पॉइंट में समझिए, कब, कहां, क्‍या हुआ

बेंगलुरु:कर्नाटक हाईकोर्ट (Karnataka high court) ने लंबे समय से चले आ रहे ह‍िजाब विवाद (Hijab Controversy) पर अपना फैसला सुना दिया है। कोर्ट ने अपने आदेश में कहा है क‍ि ह‍िजाब इस्‍लाम का ह‍िस्‍सा नहीं है। ऐसे में अब राज्‍य में स्‍कूल और कॉलेजों में ह‍िजाब पर बैन जारी रहेगा। कोर्ट ने ह‍िजाब के पक्ष में आईं सभी दलीलें रद्द कर दी है। एक नजर इस विवाद कब, क्‍या हुआ।

कहां से शुरू हुआ विवाद
ह‍िजाब विवाद की शुरुआत देश की राजधानी नई दिल्‍ली से लगभग 2 हजार किलोमीटर दूर कर्नाटक के उडुपी जिले से हुई। अक्‍टूबर 2021 में सरकारी पीयू कॉलेज की कुछ छात्राओं ने हिजाब पहनने की मांग शुरू कर दी। इसके बाद 31 दिसंबर 2021 को छह छात्राओं को ह‍िजाब पहनने के कारण कॉलेज में नहीं जाने दिया गया। छात्राओं ने कॉलेज के बाहर प्रदर्शन शुरू कर दिया।

कॉलेज प्रशासन ने 19 जनवरी 2022 को छात्राओं, उनके माता-पिता और अधिकारियों के साथ बैठक की थी। लेकिन इस बैठक का कोई परिणाम नहीं निकला था। 26 जनवरी को एक बार फिर बैठक हुई। उडुपी के विधायक रघुपति भट ने कहा कि जो छात्राएं बिना हिजाब के स्कूल नहीं आ सकती हैं वो ऑनलाइन पढ़ाई करें। तीन फरवरी को पीयू कॉलेज में हिजाब पहनकर आने वाली छात्राओं को फिर से रोका गया। इसके बाद पांच फरवरी को कांग्रेस पार्टी के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी हिजाब पहनकर स्कूल आने वाली मुस्लिम छात्राओं के समर्थन में आए। छात्राओं ने कर्नाटक हाई कोर्ट को दरवाजा खटखटाया।

पांच फरवरी को यूनिफॉर्म का आदेश जारी हुआ
पांच फरवरी 2022 को कर्नाटक सरकार ने कर्नाटक शिक्षा अधिनियम 1983 की धारा 133(2) लागू कर दी। इसके अनुसार सभी छात्र-छात्राओं के लिए कॉलेज में तय यूनिफॉर्म पहनना अनिवार्य कर दिया। यह आदेश सरकारी और निजी, दोनों कॉलेजों पर लागू किया गया। कई राजनीतिक दलों ने राज्य सरकार के इस फैसले की आलोचना भी की। सरकार के ड्रेस कोड अनिवार्य वाले आदेश के खिलाफ लड़कियों ने हाईकोर्ट का रुख किया।

आठ फरवरी को विवाद ने ले लिया हिंसक रूप
आठ फरवरी को विवाद ने हिंसक रूप ले लिया। कर्नाटक में कई जगहों पर झड़पें हुईं। पथराव की खबरें भी सामने आईं। शिवमोगा का एक वीडियो सामने आया जिसमें एक कॉलेज छात्र तिरंगे के पोल पर भगवा झंडा लगा रहा था। मांड्या में बुरका पहने हुई एक लड़की के साथ अभद्रता की गई।

हिजाब बनाम भगवा शॉल
उडुपी जिले के एमजीएम कॉलेज में ह‍िजाब और भगवा की लड़ाई शुरू हो गई। कुछ हिजाब पहने छात्राएं कॉलेज में पहले आईं। दूसरा पक्ष भगवा पगड़ी और शॉल डालकर कॉलेज आया।

हाईकोर्ट की बड़ी बेंच के पास भेजा गया मामला
हाईकोर्ट में 10 फरवरी 2022 को जस्टिस कृष्णा दीक्षित की एकल पीठ ने मामले को बड़ी बेंच के पास भेज दिया। इससे पहले 8 फरवरी को हाई कोर्ट ने पहली सुनवाई की। इसके बाद सीएम बसवराज बोम्मई ने राज्य में सभी हाईस्कूलों और कॉलेजों को तीन दिनों के लिए बंद करने का आदेश जारी किया था। उन्होंने छात्रों और स्कूल-कॉलेज प्रबंधन से शांति बनाए रखने की अपील की थी।

हिजाब विवाद पर तुरंत सुनवाई से सुप्रीम कोर्ट का इनकार
हिजाब विवाद का मसला 11 फरवरी को सुप्रीम कोर्ट पहुंचा, जहां शीर्ष अदालत ने इस मामले में तुरंत सुनवाई से इनकार कर दिया। कोर्ट ने कहा कि मामले की सुनवाई उचित समय पर की जाएगी।

ह‍िजाब को लेकर प्रदेश सरकार का क्‍या मत था?
इस मामले के तूल पकड़ने के बाद सीएम बसावराज बोम्‍मई और माध्‍यमिक शिक्षा मंत्री बीवी नागेश ने एडवोकेट जनरल के साथ बैठक की। इसके बाद मंत्री बीवी नागेश ने कहा कि मामला पहले ही हाई कोर्ट के समक्ष है और सरकार फैसले का इंतजार कर रही है। तब तक सभी स्‍कूल और कॉलेजों को अपना यूनिफॉर्म कोड फॉलो करना चाहिए। उन्‍होंने कहा कि कर्नाटक एजुकेशन ऐक्‍ट के तहत सभी शैक्षिक संस्‍थानों को अपना यूनिफॉर्म तय करने का अधिकार दिया गया है। शर्त बस इतनी है कि यूनिफॉर्म कोड की घोषणा सत्र शुरू होने से काफी पहले करनी होगी और उसमें पांच साल तक बदलाव नहीं होना चाहिए।

तीन सवालों के जवाब देते हुए हाई कोर्ट ने सुनाया फैसला
अदालत ने तीन सवाल पूछे और फिर उनके जवाब दिए। अदालत ने कहा कि मुस्लिम महिलाओं का हिजाब पहनना इस्‍लाम में जरूरी धार्मिक रिवाज नहीं है। कोर्ट ने कहा कि स्‍कूल यूनिफॉर्म तय करने पर स्‍टूडेंट्स आपत्ति नहीं जता सकते। अदालत ने कहा कि सरकार के पास आदेश जारी करने की शक्ति है।

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