Online bahis kullanıcılarının %54’ü haftada en az bir kez canlı bahis oynamaktadır; bu oran bahsegel giriş platformunda %63’tür.

Engellemelerden etkilenmemek için bettilt sık sık kontrol ediliyor.

Bahsegel güncel giriş bahsegel bettilt

OECD raporları, kullanıcıların %52’sinin “kayıp limiti” belirleyen platformları tercih ettiğini göstermektedir; paribahis bu özelliği destekler.

bahsegel giriş bettilt bahsegel bahsegel giriş bahsegel bahsegel giriş bahsegel bettiltguncel.com bettilturk-turk.click bettilt bettilt bahsegel bahsegel bettilt bahsegel giriş

Online kumar, Türkiye yasalarına göre yasaklanmıştır; ancak bettilt giriş gibi lisanslı platformlar uluslararası erişim sağlar.

bahsegel bahsegel giriş bahsegel paribahis paribahis paribahis bahsegel tr-bettilt-guncel.vip bettilt bahsegel giriş casinomhub giriş casinomhub

परिसीमन आयोग ने दी रिपोर्ट, J&K में चुनाव का रास्ता साफ, कश्मीरी पंडितों के लिए अतिरिक्त सीटों की सिफारिश

परिसीमन आयोग ने दी रिपोर्ट, J&K में चुनाव का रास्ता साफ, कश्मीरी पंडितों के लिए अतिरिक्त सीटों की सिफारिश

नई दिल्ली। जम्मू-कश्मीर (Jammu and Kashmir) के चुनावी नक्शे को फिर से तैयार करने के लिए अधिसूचित परिसीमन आयोग (Delimitation commission) ने अपनी बहुप्रतीक्षित अंतिम रिपोर्ट सौंप दी है। विवादास्पद परिसीमन प्रक्रिया के पूरा होने से जम्मू-कश्मीर में विधानसभा चुनाव कराने का रास्ता साफ हो गया है। पूर्व राज्य जून 2018 से निर्वाचित सरकार के बिना है।

सभी पांच संसदीय क्षेत्रों में पहली बार समान संख्या में विधानसभा क्षेत्र होंगे। अनुसूचित जनजाति (एसटी) के लिए नौ सीटें आरक्षित की गई हैं। जम्मू-कश्मीर में ऐसा पहली बार किया गया है। 90 विधानसभा क्षेत्रों में से 43 जम्मू और 47 कश्मीर का हिस्सा होंगे। परिसीमन के प्रयोजनों के लिए जम्मू और कश्मीर को एक इकाई के रूप में माना गया है। जम्मू में विधानसभा की कुल सीटों की संख्या 37 से बढ़कर 43 हो गई है।

कश्मीरी पंडितों के लिए अतिरिक्त सीटों की सिफारिश 
परिसीमन आदेश के अनुसार सभी विधानसभा क्षेत्र संबंधित जिले की सीमा में रहेंगे। पटवार सर्कल सबसे निचली प्रशासनिक इकाई है, जिसे तोड़ा नहीं गया है। आयोग ने कश्मीरी पंडितों और पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर से विस्थापित लोगों के लिए विधानसभा में अतिरिक्त सीटों की सिफारिश की है। जम्मू और कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम के अनुसार 2011 की जनगणना को परिसीमन का आधार होना था, लेकिन आयोग ने कहा कि वह समाज के विभिन्न वर्गों की राजनीतिक आकांक्षाओं और पहुंच, स्थलाकृति और सीटों के आवंटन पर विचार के हिस्से के रूप में सीमा से निकटता को भी ध्यान में रखेगा। आयोग की मसौदा रिपोर्ट कुछ महीने पहले सार्वजनिक किया गया था। विपक्ष द्वारा भाजपा की मदद करने का आरोप लगाया गया था। कहा गया था कि कई क्षेत्रों में जनसांख्यिकीय बहुमत को राजनीतिक अल्पसंख्यक में बदला गया है।

चुनाव का रास्ता साफ
परिसीमन प्रक्रिया पूरी होने से जम्मू-कश्मीर में चुनाव का रास्ता साफ हो गया है। गृह मंत्री अमित शाह ने हाल ही में कहा था कि परिसीमन प्रक्रिया पूरी होने के बाद जम्मू-कश्मीर में चुनाव होंगे। बता दें कि राजनीतिक दलों ने परिसीमन प्रक्रिया में गंभीर खामियों की ओर इशारा किया है। उनका कहना है कि इन खामियों के कारण इस क्षेत्र में लोकतंत्र के लिए दीर्घकालिक और गंभीर परिणाम हो सकते हैं। उदाहरण के लिए संसद की सीटों का पुनर्निर्धारण करते समय आयोग ने पुंछ और राजौरी जिलों का विलय कर दिया है जो दक्षिण कश्मीर में अनंतनाग संसदीय क्षेत्र के साथ जम्मू संसदीय क्षेत्र का हिस्सा थे। दोनों जिलों के बीच कोई भौगोलिक संपर्क नहीं है। दोनों क्षेत्रों के बीच की दूरी जम्मू से होकर 500 किमी से अधिक है। एक वैकल्पिक मार्ग मुगल रोड है। यह सर्दियों के दौरान बंद रहता है और केवल गर्मियों के महीनों में खुलता है।

क्षेत्रीय राजनीतिक दलों ने परिसीमन प्रस्ताव को खारिज कर दिया है और आरोप लगाया है कि सीटों की सीमाओं को केवल भाजपा को अपने राजनीतिक उद्देश्यों को प्राप्त करने में मदद करने के लिए फिर से तैयार किया गया है। मसौदा रिपोर्ट  सार्वजनिक होने के बाद पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने कहा था कि बीजेपी के एजेंडे को आगे बढ़ाने के लिए परिसीमन अभ्यास किया जाता है। आयोग ने कानून और संविधान के लिए कोई सम्मान नहीं दिखाया है। विशेष रूप से बहुसंख्यक समुदाय चाहे वह राजौरी में हो, कश्मीर या चीन घाटी में हो, एक अर्थ में उन्हें वंचित कर दिया गया है।

जनसंख्या के आधार की अनदेखी हुई
महबूबा मुफ्ती ने कहा है कि क्या परिसीमन? एक जो भाजपा का विस्तार बन गया है? इसने जनसंख्या के आधार की अनदेखी की और उनकी इच्छा के अनुसार कार्य किया। हम इसे सिरे से खारिज करते हैं। हमें इस पर भरोसा नहीं है। इसकी सिफारिशें अनुच्छेद 370 को निरस्त करने की एक कड़ी हैं। आज 1947 जैसे हालात देश में धीरे-धीरे बनते जा रहे हैं। यह बहुत खतरनाक है। यह सभी धर्मों के लिए एक आम राष्ट्र है। इसकी सुंदरता इस भाईचारे में है। अगर भाजपा इसे अपने एजेंडे के अनुसार चलाती है, न कि संविधान के अनुसार, तो आने वाले समय में कोई भी सुरक्षित नहीं होगा।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Share post:

Popular

More like this
Related

योगी कैबिनेट का बड़ा फैसला: उत्तर प्रदेश बनेगा ‘ग्लोबल मैनपावर हब’

सरदार वल्लभभाई पटेल कौशल प्रशिक्षण एवं रोजगार क्षेत्र विकास...

प्रेमानंद महाराज के आश्रम पर सवाल: एक बेटे की मौत, दूसरा कहां है?

Premanand Maharaj Ashram Controversy: वृंदावन स्थित प्रेमानंद महाराज के...

ममता बनर्जी ने भी किया CJP का समर्थन, अभिजीत दिपके के साथ कौन-कौन से दल?

CJP Protest: मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे...