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दिल्ली चुनाव: कम वोटिंग के पीछे क्या है ‘सरप्राइज़’ फैक्टर? मुस्लिम इलाकों में दिखी जबरदस्त भागीदारी

दिल्ली चुनाव: कम वोटिंग के पीछे क्या है ‘सरप्राइज़’ फैक्टर? मुस्लिम इलाकों में दिखी जबरदस्त भागीदारी

नई दिल्ली: दिल्ली विधानसभा चुनाव 2025 के मतदान संपन्न हो चुके हैं, और इसके साथ ही राजधानी की 70 सीटों पर 699 उम्मीदवारों की किस्मत ईवीएम में कैद हो गई है। चुनावी नतीजे 8 फरवरी को घोषित किए जाएंगे, लेकिन इससे पहले एक्ज़िट पोल और वोटिंग प्रतिशत के आंकड़े कई तरह के संकेत दे रहे हैं। इस बार 2020 की तुलना में मतदान प्रतिशत में गिरावट देखने को मिली है, जिससे यह सवाल खड़ा हो रहा है कि आखिर इसका फायदा किसे मिलेगा और नुकसान किसे उठाना पड़ेगा।

वोटिंग प्रतिशत में गिरावट: किसका नुकसान, किसका फायदा?
दिल्ली में इस बार कुल 60.4% मतदान हुआ, जो 2020 के विधानसभा चुनाव के मुकाबले 2.15% कम है। 2020 में यह 62.55% था। हालांकि, 2024 के लोकसभा चुनाव में दिल्ली में सिर्फ 58.6% वोटिंग हुई थी, यानी इस बार विधानसभा चुनाव में लोकसभा चुनाव से अधिक मतदान हुआ है। लेकिन अगर हम 2013 (68%) और 2015 (67.5%) से तुलना करें, तो यह काफी कम है।

दिल्ली के कुछ इलाकों में सुस्त वोटिंग देखने को मिली, खासतौर पर महरौली (53%) और मॉडल टाउन (53.4%) में, जहां सबसे कम मतदान हुआ। वहीं, कुछ सीटों पर मतदान प्रतिशत अधिक रहा, जिनमें मुख्य रूप से मुस्लिम बहुल क्षेत्र शामिल हैं।

मुस्लिम बहुल इलाकों में बंपर वोटिंग
दिल्ली की 11 मुस्लिम बहुल सीटों पर मतदान प्रतिशत औसतन अधिक रहा। मुस्तफाबाद में सबसे अधिक 69% मतदान हुआ, जो 2024 के लोकसभा चुनाव (66.8%) से अधिक था, हालांकि 2020 के विधानसभा चुनाव (70.8%) की तुलना में 1.8% कम रहा।

सीलमपुर में 68.7% और गोकलपुर में 68.3% मतदान हुआ, जो दिल्ली की औसत वोटिंग से काफी ज्यादा है। ऐसे में यह सवाल उठ रहा है कि क्या मुस्लिम समुदाय ने एकजुट होकर किसी खास पार्टी को समर्थन दिया है।

क्या कहता है यह ट्रेंड?
अगर हम पिछले कुछ राज्यों के चुनावों को देखें, तो यह ट्रेंड बन चुका है कि मतदान प्रतिशत कम या ज्यादा होने से सत्ता परिवर्तन की कोई गारंटी नहीं होती। उदाहरण के तौर पर, हरियाणा और झारखंड में वोटिंग प्रतिशत लगभग स्थिर रहने के बावजूद सत्ता परिवर्तन नहीं हुआ, जबकि महाराष्ट्र में वोटिंग बढ़ने के बावजूद सरकार नहीं बदली।

दिल्ली में 2013 में 65.63% मतदान हुआ था, जो 2008 (57.58%) से लगभग 8% ज्यादा था। उस चुनाव में आम आदमी पार्टी (AAP) ने पहली बार सत्ता में कदम रखा था। लेकिन इस बार गिरते मतदान के पीछे क्या वजहें हैं और इसका सीधा असर नतीजों पर कैसे पड़ेगा, यह देखना दिलचस्प होगा।

फर्जी वोटिंग का आरोप, सीलमपुर में बुर्के पर विवाद
बीजेपी ने आम आदमी पार्टी (AAP) पर सीलमपुर में फर्जी वोटिंग कराने का आरोप लगाया है। बीजेपी का दावा है कि AAP ने बुर्के की आड़ में फर्जी मतदाता बुलाए और बाहर से महिलाओं को लाकर मतदान कराया। इसके अलावा, बीजेपी ने यह भी आरोप लगाया कि कई महिलाओं को पोलिंग बूथ पर जाकर पता चला कि उनके नाम से पहले ही वोट डाला जा चुका है।

क्या कहता है दिल्ली का यह ‘सरप्राइज़ फैक्टर’?
कम मतदान से किसे नुकसान होगा, यह कहना मुश्किल है, लेकिन आमतौर पर माना जाता है कि कम टर्नआउट सत्ताधारी पार्टी के लिए नुकसानदेह हो सकता है।
मुस्लिम बहुल इलाकों में ज्यादा मतदान ने एक नया चुनावी समीकरण खड़ा कर दिया है।
बीजेपी और AAP के बीच सीधी टक्कर के बीच यह देखना दिलचस्प होगा कि कौन सी पार्टी इस चुनावी गणित का सही फायदा उठा पाती है।
अब सबकी निगाहें 8 फरवरी को आने वाले नतीजों पर टिकी हैं। क्या दिल्ली में फिर से आम आदमी पार्टी की सरकार बनेगी या बीजेपी 1993 के बाद पहली बार सत्ता में वापसी करेगी? इसका जवाब सिर्फ कुछ दिनों में मिल जाएगा।

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