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बिहार के सीएम नीतीश कुमार की पार्टी ने वक्फ विधेयक पर रखी अपनी राय, जेपीसी अध्यक्ष जगदंबिका पाल ने क्या कहा? यहां पढ़े

बिहार के सीएम नीतीश कुमार की पार्टी ने वक्फ विधेयक पर रखी अपनी राय, जेपीसी अध्यक्ष जगदंबिका पाल ने क्या कहा? यहां पढ़े

बिहार, केंद्र सरकार जल्द ही वक्फ संशोधन बिल को संसद में पेश कर सकती है। इससे पहले एनडीए की सहयोगी पार्टी जनता दल (यूनाइटेड) ने इस विधेयक पर अपने तीन सुझाव सरकार के समक्ष रखे हैं। जेडीयू का कहना है कि इन बिंदुओं पर विचार किया जाना चाहिए ताकि कानून का संतुलित और न्यायसंगत क्रियान्वयन हो सके। पार्टी सूत्रों के मुताबिक, सरकार ने उनके सुझावों को गंभीरता से लिया है और चर्चा के दौरान इन्हें शामिल करने का आश्वासन दिया है।

जेडीयू के तीन सुझाव

राज्य सरकार की प्राथमिकता बनी रहेजेडीयू ने कहा है कि चूंकि जमीन राज्य का विषय है, इसलिए नए वक्फ कानून में भी यही प्राथमिकता कायम रहनी चाहिए। इससे यह सुनिश्चित होगा कि राज्य सरकार को इस विषय में अपनी भूमिका निभाने का अधिकार बना रहे।

पूर्वप्रभावी लागू न हो कानूनपार्टी का दूसरा सुझाव यह है कि यह कानून पूर्वप्रभावी (रेट्रोस्पेक्टिव) तरीके से लागू नहीं होना चाहिए, बशर्ते कि वक्फ संपत्ति पंजीकृत हो। इसका मतलब यह हुआ कि जो वक्फ संपत्तियां पहले से ही रजिस्टर्ड हैं, उन पर इस कानून का कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। लेकिन अगर कोई विवादित या सरकारी जमीन वक्फ संपत्ति के रूप में दर्ज नहीं है, तो उसके भविष्य का फैसला विधेयक के तहत तय मानकों के अनुसार किया जाना चाहिए।

धार्मिक स्थलों की सुरक्षाजेडीयू का तीसरा सुझाव यह है कि अगर कोई वक्फ संपत्ति पंजीकृत नहीं है लेकिन उस पर कोई धार्मिक भवन, जैसे मस्जिद, दरगाह आदि बनी हुई है, तो उसे गिराया न जाए और उसकी वर्तमान स्थिति बनी रहे। यह सुझाव धार्मिक स्थलों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए दिया गया है।

कांग्रेस का रुख और बीजेपी की प्रतिक्रिया

वक्फ संशोधन विधेयक पर कांग्रेस नेता तारिक अनवर ने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि नीतीश कुमार इस विधेयक का संसद में विरोध करेंगे। उन्होंने कहा, “नीतीश कुमार ने हमेशा धर्मनिरपेक्ष राजनीति की है और हम चाहते हैं कि वे अपनी इस छवि को बरकरार रखें।” उन्होंने यह भी कहा कि नीतीश कुमार को भारतीय जनता पार्टी की नीतियों का समर्थन करने से बचना चाहिए।

वहीं, बीजेपी सांसद और वक्फ संशोधन विधेयक पर बनी संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) के अध्यक्ष जगदंबिका पाल ने कहा कि कई मुस्लिम धर्मगुरु इस बिल का समर्थन कर रहे हैं, जबकि ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (AIMPLB) इसका विरोध कर रहा है। उन्होंने कहा, “संशोधित कानून अभी सदन में आया ही नहीं है, लेकिन कुछ लोग इसे लेकर बेवजह विरोध कर रहे हैं। प्रधानमंत्री मोदी ‘सबका साथ, सबका विकास’ की नीति पर काम कर रहे हैं और यह विधेयक भी उसी दिशा में एक कदम है।”

विधेयक पर बढ़ती राजनीतिक सरगर्मी

वक्फ संशोधन बिल को लेकर राजनीतिक हलकों में हलचल तेज हो गई है। जहां एक ओर बीजेपी और जेडीयू इसे संतुलित कानून मानते हैं, वहीं कांग्रेस और AIMPLB इसे लेकर आशंकित हैं। आगामी सत्र में जब यह विधेयक सदन में पेश किया जाएगा, तब इस पर विस्तृत चर्चा होने की संभावना है।

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