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10 साल की सजा मिलने के बाद अनंत सिंह की विधायकी छिनी, अब आरजेडी 79 MLA, पढ़ें क्‍या है सदस्‍यता छीनने वाला कानून

10 साल की सजा मिलने के बाद अनंत सिंह की विधायकी छिनी, अब आरजेडी 79 MLA, पढ़ें क्‍या है सदस्‍यता छीनने वाला कानून

नई दिल्ली, बिहार के चर्चित बाहुबली विधायक अनंत सिंह (Anant Singh) अब पूर्व विधायक हो चुके। बिहार असेंबली ने अधिसूचना जारी कर उनकी विधानसभा सदस्यता को खत्म कर दिया है। मोकामा से लगातार 5 बार विधायक रहे अनंत सिंह पर यह कार्रवाई कोर्ट द्वारा 10 साल की सजा सुनाए जाने के कारण हुई है।

क्यों हुई सजा : 2015 में पुटुस यादव नाम के एक युवक की हत्या हुई। इस मामले में पुलिस ने अनंत सिंह के सरकारी आवास परिसर में सर्च अभियान चलाया। पुलिस को वहां से हथियार और विस्फोटक बरामद हुए। तब अनंत सिंह नीतीश कुमार की जेडीयू से विधायक हुआ करते थे और राज्य में आरजेडी-जेडीयू की गठबंधन सरकार चल रही थी। फिलहाल अनंत सिंह आरजेडी के विधायक थे।

खैर, हथियार मिलने के मामले में एमपी-एमएलए की विशेष अदालत ने सुनवाई शुरू की। लंबे चले इस मामले के दौरान पुलिस ने आरोप साबित करने के लिए 13 गवाहों को पेश किया। वहीं बचाव पक्ष ने करीब 34 गवाहों के बयान दर्ज कराए। अदालत ने 14 जून को आर्म्स एक्ट की विभिन्न धाराओं में अनंत सिहं को दोषी पाया है। 21 जून को एमपी-एमएलए कोर्ट के विशेष न्यायाधीश ने 10 साल की सजा सुनाई। सजा मुकर्रर होने के बाद से ही उनके विधायकी पर तलवार लटक रही थी। अब फाइनली अनंत सिंह की विधायकी चली गई है। विधानसभा सचिवालय ने उनकी विधानसभा सदस्यता खत्म करने संबंधी आदेश जारी कर दिया है। फिलहाल सिंह पिछले 34 महीनों से एक दूसरे मामले में पटना के बेऊर जेल में बंद हैं।

क्यों गई सदस्यता? : बिहार असेंबली द्वारा जारी अधिसूचना से ही पता चलता है कि जनप्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा-8 और संविधान के अनुच्छेद 191 (1) (ई) के प्रावधानों के तहत अनंत सिंह की विधायकी खत्म हुई है। अगर किसी विधानसभा या लोकसभा सदस्य को दो साल या उससे अधिक की सजा होती है तो उन्हें विधायक या सांसद पद के लिए अयोग्य घोषित कर दिया जाता है। कानून के मुताबिक, अब अनंत सिंह सजा खत्म होने के 6 साल बाद ही चुनाव लड़ सकते हैं। 15 दिन पहले AIMIM के चार विधायकों के आने से राजद विधायकों की संख्या 76 से 80 हुई थी। लेकिन अनंत सिंह की सदस्यता जाने के बाद एक फिर यह यह राउंड फिगर डगमगा गया है।

अनंत की राजनीतिक यात्रा का अंत? : अनंत सिंह मार्च 2005 में पहली बार मोकामा विधानसभा क्षेत्र से निर्दलीय निर्वाचित हुए थे। इस सीट से उनके भाई दिलीप सिंह भी विधायक रहे थे। नवंबर 2005 और बिहार विधानसभा चुनाव-2010 में अनंत सिंह को जेडीयू से टिकट मिल गया। दोनों बार वह विधायक बनने में सफल रहे। 2015 के चुनाव में सिंह एक बार फिर निर्दलीय जीते और 2020 के चुनाव में राजद की टिकट पर जीतकर लगातार 5वीं बार विधायक बने। अब विधायकी जाने के बाद एक तरह से अनंत सिंह की राजनीतिक यात्रा पर लम्बे समय के लिए ब्रेक लग गया है। ऐसे में कयास लगाए जा रहे हैं कि क्या अनंत की राजनीतिक यात्रा का अंत हो गया? भारत में सदस्यता खोने वाले नेताओं का इतिहास बताता है कि ऐसी कार्रवाइयों से उनकी राजनीतिक यात्रा खत्म नहीं होती। अभी तो अनंत सिंह के पास हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट जाने का रास्ता खुला है। अगर उन्हें वहां भी निराशा मिलती है, तब भी राजनीतिक यात्रा खत्म होनी की संभावना कम है।

पहले भी बिहार के कई नेताओं की सदस्यता गई है, जैसे- लालू प्रसाद यादव, देवनाथ यादव, डॉ.जगदीश शर्मा आदि। लेकिन इससे उनकी राजनीतिक यात्रा खत्म नहीं हुई। उन्होंने अपनी यात्रा को जारी रखने के लिए परिवार के ही किसी सदस्य को कमान पकड़ा दी। अनंत सिंह के मामले में कहा जा रहा है कि वह अपनी पत्नी नीलम देवी को मोकामा सीट से उपचुनाव में उम्मीदवार बना सकते हैं। नीलम सिंह 2019 का लोकसभा चुनाव मुंगेर से लड़कर हार चुकी हैं।

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