Russia Ukraine War: रूस और यूक्रेन के बीच जारी युद्ध में एक बार फिर हमले तेज हो गए हैं। मॉस्को क्षेत्र पर यूक्रेन के बड़े ड्रोन हमले के बाद रूस ने यूक्रेन के ड्नीप्रो शहर पर बड़े पैमाने पर मिसाइल हमला किया। हालिया घटनाओं में रिहायशी इलाकों के साथ ऊर्जा और परिवहन से जुड़े ठिकानों को भी निशाना बनाए जाने की जानकारी सामने आई है। ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर दोनों देशों के बीच हमले अचानक क्यों तेज हुए और इसका असर कहां-कहां दिखाई दे रहा है?
मॉस्को पर हुआ ड्रोन हमला कितना बड़ा था?
रूसी अधिकारियों के मुताबिक, मॉस्को की ओर बढ़ रहे करीब 450 ड्रोन को मार गिराया गया। इस हमले में राजधानी क्षेत्र की एक प्रमुख तेल रिफाइनरी और एक रिहायशी इमारत को निशाना बनाए जाने की बात सामने आई। मॉस्को क्षेत्र के गवर्नर आंद्रेई वोरोब्योव के अनुसार, ड्रोन हमलों में कम से कम दो लोगों की मौत हुई और 20 लोग घायल हुए। सोफिनो में एक तीन मंजिला रिहायशी इमारत को ड्रोन से नुकसान पहुंचने की जानकारी दी गई। वहीं, ओरेखोवो-जुएवो जिले में एक निजी मकान पर हुए हमले में एक बुजुर्ग व्यक्ति की मौत की बात भी सामने आई। सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो में मॉस्को के रात के आसमान में धमाके और एक जलते हुए गोदाम का दृश्य दिखाई देने का दावा किया गया।
इसके बाद रूस ने ड्नीप्रो को क्यों बनाया निशाना?
मॉस्को क्षेत्र पर हमले के दो दिन बाद रूस ने यूक्रेन के ड्नीप्रो शहर पर बड़े पैमाने पर मिसाइल हमला किया। हमले के बाद शहर में आग और धुएं का गुबार दिखाई देने की जानकारी सामने आई। दोनों घटनाओं के बीच कम समय का अंतर होने के कारण ड्नीप्रो पर रूसी हमले को मॉस्को पर हुए ड्रोन हमले के बाद की कार्रवाई के संदर्भ में देखा जा रहा है। हालांकि, उपलब्ध सामग्री में रूस की ओर से इस हमले को आधिकारिक तौर पर मॉस्को हमले का जवाब बताए जाने की पुष्टि नहीं है। इसलिए घटनाओं के क्रम को सामने रखना अधिक उचित है, जबकि हमले के उद्देश्य को लेकर अंतिम निष्कर्ष संबंधित पक्षों के आधिकारिक बयानों और स्वतंत्र पुष्टि पर निर्भर करेगा।
मॉस्को की तेल रिफाइनरी पर हमले का क्या असर?
मॉस्को के मेयर सर्गेई सोबयानिन ने बताया कि एक ड्रोन राजधानी के एक प्रमुख बुलेवार्ड के पास स्थित इमारत से टकराया। वहीं, यूक्रेनी सैन्य अधिकारियों के अनुसार, ड्रोन हमले में मॉस्को की तेल रिफाइनरी की तीन प्रमुख इकाइयों को नुकसान पहुंचा। यूक्रेन के रक्षा मंत्रालय के मुताबिक, यह रिफाइनरी मॉस्को क्षेत्र में एक तिहाई से ज्यादा ईंधन की आपूर्ति करती है। यहां पेट्रोल, डीजल और विमान ईंधन का उत्पादन होता है और इसका कुछ हिस्सा रूसी सेना को भी जाता है। ऐसे में इस तरह के ऊर्जा प्रतिष्ठान पर नुकसान की खबर केवल स्थानीय घटना तक सीमित नहीं रहती, बल्कि ईंधन की आपूर्ति और सैन्य लॉजिस्टिक्स पर संभावित असर को लेकर भी सवाल खड़े करती है। हालांकि, रिफाइनरी को हुए नुकसान और उसके वास्तविक प्रभाव से जुड़ी जानकारी यूक्रेनी अधिकारियों के दावों पर आधारित है।
यूक्रेन पर रूस के हमलों में भी हुईं मौतें
मॉस्को पर ड्रोन हमले के बीच यूक्रेन की ओर से भी रूस के हमलों में जानमाल के नुकसान की जानकारी दी गई। यूक्रेनी अधिकारियों ने बताया कि शनिवार को कीव और सूमी क्षेत्रों में रूसी हमलों में नौ लोगों की मौत हुई, जिनमें तीन बच्चे शामिल थे। दूसरी ओर, मॉस्को के मेयर सर्गेई सोबयानिन ने मॉस्को पर हुए हमले को रूस के संसदीय चुनाव को बाधित करने की कोशिश बताया। यह रूसी अधिकारी की ओर से किया गया दावा है और उपलब्ध सामग्री में इसका स्वतंत्र सत्यापन नहीं दिया गया है। इसी वजह से दोनों पक्षों की ओर से सामने आने वाले दावों को उनके स्रोत और संदर्भ के साथ देखना जरूरी है।
खेरसॉन में बस पर ड्रोन अटैक, दो लोगों की मौत
रूसी सरकारी मीडिया के मुताबिक, रूस के नियंत्रण वाले खेरसॉन क्षेत्र में रविवार को एक बस पर ड्रोन हमला किया गया। इस हमले में दो लोगों की मौत की जानकारी दी गई, जिनमें एक चुनाव अधिकारी भी शामिल बताया गया। खेरसॉन लंबे समय से रूस-यूक्रेन संघर्ष का संवेदनशील क्षेत्र रहा है और यहां ड्रोन हमलों की खबरें आती रही हैं। हालांकि, इस विशेष घटना को लेकर उपलब्ध सामग्री में रूसी सरकारी मीडिया के दावे के अलावा स्वतंत्र पुष्टि का उल्लेख नहीं है। इसलिए मृतकों और हमले से जुड़ी जानकारी को उसी स्रोत के हवाले से समझना जरूरी है।
ऊर्जा और परिवहन ढांचा क्यों बन रहा है निशाना?
रूस और यूक्रेन के बीच पिछले सप्ताह ऊर्जा और परिवहन ढांचे के साथ-साथ बड़े लॉजिस्टिक्स केंद्रों को निशाना बनाए जाने की जानकारी सामने आई है। युद्ध के दौरान ऐसे ठिकानों का महत्व इसलिए बढ़ जाता है क्योंकि ऊर्जा, ईंधन, परिवहन और लॉजिस्टिक्स सैन्य तथा नागरिक आपूर्ति व्यवस्था से जुड़े होते हैं। इसी बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया पर दावा किया था कि दोनों पक्ष ऊर्जा ढांचे पर हमले नहीं करने को लेकर सहमत हुए हैं। इसके बावजूद ऐसे ठिकानों पर हमले जारी रहने की खबरें सामने आई हैं। इससे यह सवाल भी उठता है कि ऊर्जा प्रतिष्ठानों को लेकर कथित सहमति जमीन पर किस हद तक लागू हो पाई है।
क्या रूस-यूक्रेन युद्ध फिर नए दौर में पहुंच रहा है?
मॉस्को क्षेत्र पर बड़े ड्रोन हमले और उसके बाद ड्नीप्रो पर रूसी मिसाइल हमले ने रूस-यूक्रेन युद्ध में जारी तनाव को फिर सामने ला दिया है। हालिया घटनाओं में रिहायशी इलाकों, ऊर्जा प्रतिष्ठानों और परिवहन से जुड़े ठिकानों के प्रभावित होने की जानकारी सामने आई है। हालांकि, दोनों देशों की ओर से हमलों और नुकसान को लेकर अलग-अलग दावे किए जाते हैं और हर घटना की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध नहीं है। ऐसे में मौजूदा स्थिति को समझने के लिए आधिकारिक बयानों के साथ स्वतंत्र रूप से सत्यापित रिपोर्टों को देखना जरूरी है। फिलहाल उपलब्ध सामग्री से इतना सामने आता है कि मॉस्को से ड्नीप्रो तक हालिया हमलों ने रूस-यूक्रेन संघर्ष में सैन्य टकराव को फिर चर्चा के केंद्र में ला दिया है।
पुतिन का पारा High तीसरे विश्वयुद्ध Countdown On?




