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नई दिल्ली, 27दिसंबर, 2020

किसान और सरकार के बीच घमासान जारी है. किसान कड़ाके की सर्दी में भी सड़कों पर डटे हुए हैं. आज आंदोलन का 32वां दिन है. वहीं, इस घमासान के बीच किसानों की ओर से एक अच्छी खबर भी आई है. किसानों ने सरकार की ओर से आया बातचीत का प्रस्ताव स्वीकार कर लिया है. लेकिन साथ ही वो शर्तें भी रख दी हैं, जिन्हें लेकर ये पूरा घमासान चल रहा है. अब गेंद सरकार के पाले में है. किसानों ने प्रस्ताव के साथ आंदोलन तेज करनी की चेतावनी भी दे दी है.

70 साल से किसान को सभी ने धोखा दिया

सीएम केजरीवाल ने कहा कि अन्ना आंदोलन में हमें बदनाम करते थे, वैसे ही आज किसान को राष्ट्रदोही कह रहे हैं. 70 साल से किसान को सभी ने धोखा दिया. किसानों ने सिर्फ धोखा देखा है. तीन कानून से किसान की खेती छीनना चाहते हैं और पूंजीपतियों को देना चाहते हैं. अगर किसान की खेती चली गई वो किसान कहां जाएगा. किसान अपना खेत बचाने के लिए बैठे हैं.

आखिरी और कितनी शहादत चाहिए…

सिंघु बॉर्डर पहुंचकर सीएम अरविंद केजरीवाल ने कहा कि देश का किसान दुखी है, कड़ाके की ठंड में किसान भाई, माताएं, बच्चे 32 दिनों से खुले आसमान के नीचे सोने को मजबूर हैं. 40 से ज्यादा किसानों की शहादत हो चुकी है. मैं हाथ जोड़कर केंद्र सरकार से अपील करता हूं कि इनकी मांगें पूरी कर तीनों कानूनों को वापस ले. आखिरी और कितनी शहादत चाहिए…