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2008 Ahmedabad Serial Bomb Blast: 49 दोषियों में से 38 को फांसी, 11 को उम्रकैद ; इतिहास का पहला मामला, जिसमें सर्वाधिक को मृत्युदंड

2008 Ahmedabad Serial Bomb Blast: 49 दोषियों में से 38 को फांसी, 11 को उम्रकैद ; इतिहास का पहला मामला, जिसमें सर्वाधिक को मृत्युदंड

अहमदाबाद, अहमदाबाद में साल 2008 में हुए सीरियल ब्लास्ट केस (2008 Ahmedabad Serial Bomb Blast Case) में शुक्रवार (18 फरवरी, 2022) को 49 दोषियों में से 38 को फांसी की सजा का ऐलान कर दिया गया, जबकि सेशंस कोर्ट ने 11 दोषियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। यानी इन्हें मृत्यु तक जेल में रहना पड़ेगा।

स्पेशल कोर्ट ने यूएपीए (Unlawful Activities (Prevention) Act : UAPA) और आईपीसी (Indian Penal Code) के सेक्शन 302 के प्रावधानों के तहत सजा का ऐलान किया है। स्पेशल जज एआर पटेल ने फैसला सुनाने के दौरान ब्लास्ट्स में जान गंवाने वाले लोगों के परिजन को एक लाख रुपए, गंभीर रूप से जख्मी हुए लोगों को 50 हजार रुपए और हल्के तौर पर चोटिल हुए लोगों को 25 हजार रुपए मुआवजे का ऐलान किया।

कोर्ट ने 48 दोषियों पर 2.85 लाख रुपए का जुर्माना भी लगाया। जिन दोषियों को मृत्युदंड की सजा का ऐलान हुआ है, उनमें सिर्फ उस्मान अगबत्तीवाला ही आर्म्स ऐक्ट के तहत दोषी है, जबकि इस पर 2.88 लाख रुपए का फाइन लगाया गया।

मामले की सुनवाई ऑनलाइन माध्यम से हुई, जिसमें जेल में बंद सभी दोषी भी हाजिर हुए। कोर्ट ने इस केस को “रेयर ऑफ द रेयरेस्ट केस” करार दिया। सबसे रोचक बात है कि यह देश के इतिहास में पहला ऐसा मामला है, जिसमें एक केस में सर्वाधिक लोगों को फांसी की सजा सुनाई गई है। इससे पहले पूर्व पीएम राजीव गांधी की हत्या के मामले में 26 लोगों को फांसी हुई थी।

कोर्ट ने इससे पहले आठ फरवरी को 49 आरोपियों को दोषी ठहराया था, जबकि 28 बाकी को बरी कर दिया था। वहीं, पिछले साल सितंबर में 77 आरोपियों के खिलाफ मुकदमे की सुनवाई पूरी की थी। कुल 78 आरोपियों में से एक गवाह बन गया था।

दरअसल, 26 जुलाई 2008 को शाम साढ़े छह बजे सीरियल ब्लास्ट्स हुए थे। लगभग 70 मिनट के भीतर 21 धमाके हुए थे। इन ब्लास्ट्स में 200 से अधिक लोग जख्मी हुए थे, जबकि 56 लोगों की जान चली गई थी। 14 सालों में इस मुकदमे की सुनवाई हुई, जिसमें 49 लोगों को दोषी करार दिया गया।

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