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बिहार में क्या खास तैयारी कर रहे राहुल गांधी? 4 महीने में तीसरी बार दौरा, दलित-पिछड़ों पर ‘कांग्रेस की नजर’

बिहार में क्या खास तैयारी कर रहे राहुल गांधी? 4 महीने में तीसरी बार दौरा, दलित-पिछड़ों पर ‘कांग्रेस की नजर’

पटना (बिहार): बिहार की राजनीति में इन दिनों कांग्रेस और खासकर राहुल गांधी की सक्रियता ने हलचल मचा दी है। बीते चार महीने में राहुल गांधी तीसरी बार बिहार का दौरा करने जा रहे हैं। सात अप्रैल को होने वाला यह दौरा कांग्रेस की एक खास रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। पार्टी इस बार ‘संविधान सुरक्षा दिवस’ के नाम से इस कार्यक्रम को आयोजित कर रही है, जिसका मकसद सामाजिक न्याय और संवैधानिक मूल्यों को लेकर जनता के बीच कांग्रेस की छवि को मजबूती देना है।

दरअसल, राहुल गांधी इन दिनों बिहार में कांग्रेस संगठन को फिर से खड़ा करने की कवायद में जुटे हैं। उनका फोकस खासतौर पर दलित, महादलित और अति पिछड़ा वर्ग है। यही वजह है कि हाल ही में दिल्ली में कांग्रेस ने बिहार के सभी जिला अध्यक्षों की एक अहम बैठक बुलाई, जिसमें राहुल गांधी ने खुद शिरकत की। राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक, राहुल गांधी का यह कदम सीधे तौर पर 2025 में होने वाले बिहार विधानसभा चुनावों की तैयारी से जुड़ा हुआ है।

जिला अध्यक्षों के साथ नई शुरुआत
बिहार कांग्रेस में लंबे समय से सांगठनिक ढांचे की कमी महसूस की जा रही थी। पूर्व प्रदेश अध्यक्ष अखिलेश प्रसाद सिंह के कार्यकाल में संगठनात्मक स्तर पर कोई ठोस कदम नहीं उठाए गए। लेकिन अब विधायक राजेश कुमार के प्रदेश अध्यक्ष बनने के बाद न केवल जिला अध्यक्षों की नियुक्ति की गई, बल्कि स्क्रीनिंग कमेटी का गठन भी कर दिया गया है। राहुल गांधी ने दिल्ली में इन सभी नए जिलाध्यक्षों से सीधी मुलाकात की, जिससे पार्टी के कार्यकर्ताओं में नया जोश देखा जा रहा है।

दलितों और अति पिछड़ों पर विशेष फोकस
राहुल गांधी का ताजा बिहार दौरा इस बार पूरी तरह सामाजिक समीकरणों को साधने की दिशा में केंद्रित है। कांग्रेस की नजर 14% दलित और लगभग 36% अति पिछड़ा वर्ग की आबादी पर है, जो किसी भी चुनाव में निर्णायक भूमिका निभा सकते हैं। कांग्रेस महादलितों के जरिए जीतन राम मांझी, चिराग पासवान और पशुपति पारस को टारगेट कर रही है, जबकि अति पिछड़े वर्ग पर ध्यान देकर वह मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के प्रभाव को चुनौती देना चाहती है।

इस रणनीति के जरिए कांग्रेस बिहार में एक बार फिर जमीन पर मजबूत पकड़ बनाने की कोशिश कर रही है। राहुल गांधी के हर दौरे में यह देखा गया है कि वे गांव-गांव तक पहुंचकर स्थानीय मुद्दों को सुनते हैं और पार्टी कार्यकर्ताओं से संवाद करते हैं।

2025 का लक्ष्य: बूथ स्तर तक मजबूत संगठन
कांग्रेस प्रवक्ता ज्ञान रंजन के मुताबिक, पार्टी की वर्किंग कमेटी ने 2025 को संगठन सृजन वर्ष घोषित किया है। इसका मकसद है कि हर राज्य में कांग्रेस का ढांचा मजबूत हो और बूथ स्तर तक पार्टी की उपस्थिति दर्ज कराई जा सके। राहुल गांधी के बिहार दौरे में इसी रणनीति की बारीकियां साझा की जाएंगी। जिला अध्यक्षों को यह बताया जाएगा कि कैसे सामाजिक समीकरणों को समझते हुए संगठन को मजबूत किया जाए, स्थानीय मुद्दों पर फोकस किया जाए और कार्यकर्ताओं को फिर से सक्रिय किया जाए।

क्या सोच रहे हैं राहुल गांधी?
राहुल गांधी की लगातार बिहार यात्राएं यह संकेत दे रही हैं कि वह इस राज्य को कांग्रेस की पुनर्बहाली के लिए एक प्रयोगशाला के रूप में देख रहे हैं। बिहार में कांग्रेस की स्थिति भले कमजोर हो, लेकिन सामाजिक वर्गों में बदलाव और राजनीतिक समीकरणों की नई संरचना को देखते हुए राहुल गांधी कोई मौका छोड़ना नहीं चाहते।

साफ है कि राहुल गांधी के दिमाग में एक लंबी रणनीति है—संगठन को खड़ा करना, सामाजिक समूहों को साधना और 2025 के चुनाव में कांग्रेस को फिर से एक प्रभावशाली ताकत के रूप में पेश करना। बिहार की सियासत में राहुल गांधी की यह सक्रियता आने वाले दिनों में कई नए समीकरण गढ़ सकती है।

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