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कोलकाता, 4 अप्रैल 2021

पश्चिम बंगाल में दूसरे चरण के मतदान के दौरान मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के नंदीग्राम स्थित एक बूथ पर पहुंचने के चलते माहौल तनावपूर्ण हो गया था। बूथ पर गड़बड़ी का आरोप लगाते हुए ममता बनर्जी करीब दो घंटे तक वहां रही थीं और उन्होंने चुनाव आयोग को लिखित शिकायत भी दी थी। इस दौरान बूथ के आस-पास ममता और सुवेंदु अधिकारी के समर्थकों ने हंगामा भी किया था। जिसके चलते प्रशासन को काफी मशक्कत करनी पड़ी थी। चुनाव आयोग इस घटना को गंभीरता से लिया है और ममता बनर्जी पर कार्रवाई कर सकता है।

जनप्रतिनिधित्व कानून के तहत हो सकती है कार्रवाई

चुनाव आयोग ने ममता बनर्जी की हाथ से लिखी हुई शिकायत को ‘तथ्यात्मक रूप से गलत’ बताते हुए कहा है कि टीएमसी नेता पर आदर्श आचार संहिता और जनप्रतिनिधित्व कानून के तहत कार्रवाई करने पर विचार किया जा रहा है।

पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव 8 चरणों में कराए जाने के बाद से ही ममता बनर्जी चुनाव आयोग पर हमलावर हैं। इसके बाद चुनाव आयोग के पश्चिम बंगाल पुलिस के डीजी को हटाए जाने पर भी ममता बनर्जी ने नाराजगी जताई थी। ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग पर केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के आदेश पर काम करने का आरोप लगाया था जिसे चुनाव आयोग ने खारिज किया था।

बंगाल चुनाव की सबसे हाईप्रोफाइल मानी जाने वाली सीट पर ममता बनर्जी का मुकाबला कभी उनके विश्वस्त सहयोगी रहे और अब बीजेपी नेता सुवेंदु अधिकारी से है। कड़ी टक्कर वाले इस क्षेत्र में 1 अप्रैल को मतदान के दौरान ममता बनर्जी एक बूथ पर पहुंच गई थीं। इस दौरान वहां पर टीएमसी और बीजेपी के समर्थक आमने-सामने आ गये थे जिसके चलते स्थिति तनावपूर्ण हो गई थी और ममता बनर्जी करीब दो घंटे तक बूथ पर ही रही थीं।

चुनाव आयोग कर रहा कार्रवाई की तैयारी

ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग पर चुनाव के दौरान कानून व्यवस्था लागू करने में असफल रहने का आरोप लगाया था।

घटना को लेकर रविवार को निर्वाचन आयोग ने कहा कि मतदान केंद्र पर ममता बनर्जी ने जो किया उसके चलते ‘पश्चिम बंगाल और शायद कुछ अन्य राज्यों में कानून और व्यवस्था पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की बहुत अधिक संभावना थी।

आयोग ने अपनी प्रतिक्रिया में कहा ‘यह गहरे खेद का विषय है कि एक मीडिया नैरेटिव के चलते एक कैंडीडेट, जो कि सीएम भी हैं, ने चुनाव के सबसे बड़े भागीदार वोटरों को गुमराह करने के लिए घंटों इंतजार कराया। यह सब उस समय किया गया जब मतदान प्रक्रिया चालू थी। इससे अधिक दुर्भाग्य की बात नहीं हो सकती है।’

जानिए, कितनी हो सकती है सज़ा?

चुनाव आयोग ने आगे कहा कि वह एक अप्रैल की घटना को लेकर परीक्षण किया जा रहा है कि जनप्रतिनिधत्व एक्ट की धारा 131 या फिर आदर्श आचार संहिता के तहत कोई कार्रवाई हो सकती है।

जनप्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 131 के तहत मतदान केंद्र में या उसके पास अव्यवस्थित आचरण को लेकर तीन महीने की जेल की सजा या जुर्माना अथवा दोनों हो सकता है।