चंडीगढ़: हरियाणा सरकार ने राज्य में वक्फ बोर्ड के कब्जे वाली जमीनों की व्यापक जांच कराने का फैसला किया है। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने विधानसभा में इस संबंध में ऐलान करते हुए कहा कि पूरे प्रदेश में किसी भी गांव की शामलात देह भूमि, जो वक्फ बोर्ड के नाम दर्ज हुई है, उसकी गहन जांच कराई जाएगी।
मुख्यमंत्री ने यह घोषणा रोहतक-गोहाना रोड पर स्थित पीर बोधी भूमि विवाद को लेकर विधानसभा में चर्चा के दौरान की। उन्होंने कहा कि इस मामले को गंभीरता से लेते हुए एक उच्च स्तरीय कमेटी का गठन किया जाएगा, जो पूरे प्रकरण की जांच करेगी।
पीर बोधी भूमि विवाद से उठा मामला
विधानसभा में कांग्रेस विधायक बीबी बत्रा ने रोहतक-गोहाना रोड पर स्थित पीर बोधी भूमि का मुद्दा उठाया था। इस पर मुख्यमंत्री सैनी ने कहा कि सरकार ने इस मामले को गंभीरता से लिया है और इसकी पूरी जांच की जाएगी। प्रारंभिक रिपोर्ट के अनुसार, 1967-68 में यह भूमि शामलात देह (गांव की साझा भूमि) के रूप में दर्ज थी, लेकिन 1990 में केंद्र सरकार ने इसे पंजाब वक्फ बोर्ड के नाम पर अधिसूचित कर दिया। बाद में यह भूमि कब्रिस्तान के रूप में दर्ज हो गई और अब वक्फ बोर्ड के कब्जे में है।
जांच के लिए उच्च स्तरीय कमेटी का गठन
मुख्यमंत्री सैनी ने ऐलान किया कि पीर बोधी भूमि की जांच के लिए रोहतक मंडल आयुक्त की अध्यक्षता में एक कमेटी गठित की जाएगी। इस कमेटी में करनाल मंडल आयुक्त और रोहतक उपायुक्त सदस्य के रूप में शामिल होंगे। यह कमेटी इस मामले से जुड़े सभी दस्तावेजों और रिकॉर्ड की गहन जांच करेगी।
हरियाणा में सभी वक्फ बोर्ड की जमीनों की होगी जांच
सीएम सैनी ने स्पष्ट किया कि सिर्फ पीर बोधी भूमि ही नहीं, बल्कि पूरे हरियाणा में उन सभी गांवों की शामलात देह भूमि की जांच कराई जाएगी, जो किसी भी तरह से वक्फ बोर्ड के नाम दर्ज की गई हैं। सरकार यह सुनिश्चित करेगी कि किसी भी गांव की साझा भूमि पर अवैध कब्जा न हो और यदि कोई अनियमितता पाई जाती है, तो उचित कार्रवाई की जाएगी।
विपक्ष ने भी जांच की मांग का किया समर्थन
इस मुद्दे पर कांग्रेस समेत विपक्षी दलों ने भी अपनी प्रतिक्रिया दी। कांग्रेस विधायक बीबी बत्रा ने कहा कि सरकार को पूरे मामले की निष्पक्ष जांच करानी चाहिए और यदि कोई गड़बड़ी पाई जाती है तो जिम्मेदार लोगों पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।
हरियाणा में वक्फ बोर्ड की संपत्तियों को लेकर यह पहली बार नहीं है जब विवाद उठा है। इससे पहले भी विभिन्न जिलों में वक्फ बोर्ड की जमीनों को लेकर कई विवाद सामने आ चुके हैं। अब सरकार के इस ऐलान के बाद यह देखना होगा कि जांच में क्या तथ्य सामने आते हैं और क्या कार्रवाई की जाती है।




