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नई दिल्ली, 21 अप्रैल 2021

कांग्रेस महासचिव अजय माकन ने आरोप लगाया है कि देश को टीका नेता से टीका भिखारी बना दिया गया है और कोरोना पॉजिटिव मरीजों की जांच करने के बजाय सरकार लोगों के धैर्य की परीक्षा ले रही है।

माकन ने बुधवार को एक संवाददाता सम्मेलन को वर्चुअल माध्यम से संबोधित करते हुए आरोप लगाया कि मंगलवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का संबोधन केवल बयानबाजी था। राज्य और आम लोग प्रधानमंत्री से राहत की घोषणा की उम्मीद कर रहे थे, लेकिन हमेशा की तरह पीएम के 18 मिनट ने भाषण के सभी को निराश किया। कोई निर्देश नहीं था, गरीबों के लिए कोई सहानुभूति नहीं थी और महामारी से प्रभावित लोगों को अपने हाल पर छोड़ दिया गया।

माकन ने कहा कि भारत ने 14 मार्च, 2020 को कोरोनावायरस महामारी को ‘आपदा’ घोषित किया। दस दिन बाद, एक अरब से अधिक लोगों को दुनिया के सबसे गंभीर लॉकडाउन के तहत रखा गया था, सरकार का तर्क था कि देश की स्वास्थ्य क्षमता का विस्तार करने के लिए समय की जरूरत है। अब समय आ गया है कि हम इस दिशा में किए गए सुधारों का प्रभावी ढंग से विश्लेषण करें।

भारत ने टीबी को रोकने के लिए 1948 में टीकाकरण की शुरुआत की थी। जवाहरलाल नेहरू सरकार ने चेन्नई में पहली वैक्सीन मैन्युफैक्च रिंग यूनिट की स्थापना की। बाद में इंदिरा गांधी की सरकार ने एक गहन टीकाकरण कार्यक्रम के माध्यम से चेचक को समाप्त कर दिया जो एक बड़ी सार्वजनिक स्वास्थ्य सफलता थी।

सन् 1971 तक भारत में 19 वैक्सीन निर्माता थे और सबसे ज्यादा वैश्विक टीके भारत में बनाए गए थे। 1978 में इंदिरा गांधी ने बीसीजी, ओपीवी, डीपीटी और टाइफाइड-पैराटिफाइड टीके बनाने के लिए राष्ट्रीय प्रतिरक्षण कार्यक्रम शुरू किया था। इस फाउंडेशन ने आज वैक्सीन उत्पादन में भारत को ग्लोबल लीडर बना दिया है।

उन्होंने सवाल उठाया, “क्या प्रधानमंत्री इस बात का जवाब देने की कृपा करेंगे कि भारत दुनिया का सबसे बड़ा टीकाकरण उत्पादक है, मगर ऐसा क्यों है कि अब तक केवल 1.3 फीसदी भारतीयों को ही पूरी तरह से टीका लगाया गया है?”

कांग्रेस ने पूछा कि ऐसा क्यों है कि सबसे बड़े दवा विनिमार्ताओं में से एक होने के बावजूद हम जीवन रक्षक दवाओं की भारी कमी का सामना कर रहे हैं?