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हरिद्वार, 5 अक्टूबर 2021

अखाड़ों की ज़मीनों पर बने फ्लैट्स में बड़े पैमाने पर स्टाम्प डयूटी चोरी का मामला पकड़ में आया, जिस पर वित्त विभाग के एडीएम की ओर से कुछ लोगों को नोटिस भी दिए गए थे. लेकिन एक महीने का समय बीत जाने के बावजूद अभी तक नोटिस का कोई जवाब प्रशासन को नहीं मिला है. अब इस मामले में शिकायतकर्ता हाईकोर्ट की शरण लेने की बात कह रहे हैं. दूसरी तरफ, जिलाधिकारी विनय शंकर पांडे का कहना है कि मामले की जल्द सुनवाई होगी.

क्या है स्टांप चोरी का खेल?
धर्मनगरी हरिद्वार में साधु संतों के अखाड़ों के पास सैकड़ों एकड़ जमीनें हैं. इन ज़मीनों को अखाड़ों के महंतों को बेचने का अधिकार नहीं है, लेकिन कई अखाड़ों के साधु संत बिल्डरों के साथ साठ-गांठ कर अखाड़ों की भूमि पर फ्लैट्स बना कर खड़े कर रहे हैं. शिकायतकर्ता जेपी बडोनी ने न्यूज़18 को बताया कि ये फ्लैट्स और कमर्शियल कॉम्पलेक्स खरीदारों को 100 रुपये के स्टांप पर लीज़ पर दिए जा रहे हैं. यानी बिना रजिस्ट्री के हो रही संपत्ति की खरीद-फरोख्त से सरकार को करोड़ों रुपए के राजस्व का नुकसान हो रहा है.

प्रशासन ने दिया था नोटिस
स्टांप चोरी का मामला पकड़ में आने पर अपर जिलाधिकारी वित्त ने करीब 20 लोगों को नोटिस देकर जवाब दाखिल करने के लिए कहा था. हालांकि 1 महीने से ज्यादा का समय बीत जाने के बाद भी प्रशासन को नोटिस का कोई जवाब नहीं मिला है. मामले पर जिलाधिकारी विनय शंकर पांडे का कहना है कि स्टाम्प चोरी प्रकरण में जांच चल रही है. यदि चोरी पाई जाती है, तो नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी.

इधर, जेपी बडोनी ने अपनी शिकायत में यह आरोप भी लगाया कि ये संपत्तियां इस धांधली के साथ आजीवन लीज़ पर दी जा रही हैं. बडोनी ने यह भी बताया कि वह कलेक्टर से मिलकर इस बारे में स्पष्ट कर चुके हैं कि 15 दिनों के भीतर कार्रवाई नहीं हुई, तो मामले को हाई कोर्ट में लेकर जाएंगे.