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मेरठ, 26 अगस्त 2021

पश्चिमी यूपी और उत्तराखंड में गुड्स एंड सर्विस टैक्स (जीएसटी) के तहत इनपुट क्रेडिट टैक्स (आईटीसी) के जरिए फर्जी तरीके से क्लेम कर सरकारी खजाने को चूना लगाया जा रहा है। केंद्रीय व राज्य की जांच एजेंसियां करोड़ों की टैक्स चोरी के मामले पकड़ चुकी हैं। सर्वाधिक मामले मुरादाबाद और गाजियाबाद में सामने आए। पश्चिमी यूपी-उत्तराखंड में 500 से अधिक कंपनियां जांच एजेंसियों की रडार पर हैं।

पिछले तीन वर्षों में एक हजार से अधिक फर्जी फर्में सामने आ चुकी हैं। 50 से अधिक लोगों को फर्जीवाड़े में गिरफ्तार किया गया। 500 करोड़ से अधिक का राजस्व वसूल कर जांच एजेसियां सरकार के खाते में जमा कर चुकी हैं। मेरठ और आसपास के जिलों में भी आईटीसी के तहत की गई टैक्स चोरी पकड़ी जा रही है। जीएसटी लागू होने के बाद फर्जी तरीके से बनाई गई फर्मों के जरिए गोरखधंधा चल रहा है।

ये फर्में रडार पर आईं

अब जांच एजेंसियां ऐसी फर्मों को चिन्हित कर रही हैं जिन्होंने पांच करोड़ रुपये से ज्यादा का आईटीसी क्लेम लिया है। सूत्रों का कहना है कि पश्चिमी यूपी और उत्तराखंड की 500 से अधिक फर्में डायरेक्ट्रेट जनरल ऑफ जीएसटी इंटेलीजेंस (डीजीजीआई) और राज्य जीएसटी के रडार पर हैं। इसके अलावा वह फर्में भी रडार पर हैं जो जीएसटी लागू होने के बाद बनाई गईं। इसके पीछे सबसे खास वजह यह है कि पांच करोड़ से ज्यादा की टैक्स चोरी पकड़े जाने पर संबंधित व्यक्ति को गिरफ्तार किया जा सकता है। अफसरों का मानना है कि टैक्स चोरी को रोकने के लिए जालसाजों को जेल भेजा जाना जरूरी है। तभी टैक्स चोरी पर अंकुश लग सकेगा। सीजीएसटी सूत्रों ने बताया कि जिन फर्मों को रडार पर लिया गया है, उनमें से कई के बैंक खाते आईटीसी क्लेम लेने के बाद बंद हो गए।

पकड़ से हो रहे दूर

ऐसे लोगों ने मोबाइल नंबर बदल दिए या बंद कर दिए। जीएसटी काउंसिल का मुख्य फोकस अब इस तरह के टैक्स चोरी के मामलों पर होगा जिनमें बिलबुक के जरिए फर्जीवाड़ा, टर्नओवर छिपाकर, रिफंड के जरिए, फर्जी बिल बनाकर और तथ्यों को छिपाकर फर्जीवाड़ा किया गया होगा। आईटीसी क्लेम के जरिए फर्जीवाड़ा करने वाले रडार पर हैं। टीमें ऐसी फर्मों को चिन्हित कर कार्रवाई कर रही हैं।

ऐसे कर रहे फर्जीवाड़ा

जीएसटी को लागू करने के पीछे की मंशा टैक्स चोरी रोकना था, लेकिन आज भी जिम्मेदार टैक्स चोरी पर लगाम नहीं लगा पा रहे हैं। पहले व्यापारी ज्यादा माल को कम दिखाकर टैक्स चोरी करता था और अब बोगस फर्म से टैक्स चोरी की जा रही है। पिछले तीन वर्षों में करीब एक हजार बोगस फर्में केंद्रीय और राज्य जीएसटी की टीमें पकड़ चुकी हैं। फर्जीवाड़ा करके फर्मों का जीएसटी में पंजीकरण करा लिया जाता है। यह फर्में सिर्फ कागजों में होती हैं। फर्जी कंपनियां को सिर्फ कागजों में बनाते हैं। कंपनियों का कहीं कोई ऑफिस नहीं होता है। इसके बाद इन बोगस फर्मों से जालसाज बड़े पैमाने पर फर्जी टैक्स इनवॉइस तैयार करते हैं। इसके बाद इनपुट टैक्स क्रेडिट क्लेम करते हैं। कामकाज के फर्जी बिल बनाए जाते हैं। बिना किसी लेन-देन के इन कंपनियों के नामों पर व्यापार दिखा कर टैक्स इनवॉइस तैयार कर लेते हैं। आईटीसी क्लेम के जरिए सरकार से रिफंड हासिल कर लेते हैं।

टैक्स चोरी के प्रमुख मामले जिनमें कार्रवाई हुई

– डीजीजीआई की मेरठ जोनल इकाई ने 16.64 करोड़ रुपये के बोगस इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) के लाभ उठाने के मामले में मैसर्स पोद्दार इस्पात प्राइवेट लिमिटेड कोटद्वार के निदेशक और प्रबंधक को गिरफ्तार किया।

– सेंट्रल जीएसटी टीम ने आठ मुखौटा कंपनियां बनाकर 285 करोड़ की टैक्स चोरी करने के आरोप में कारोबारी संजय जैन को दिल्ली के मयूर विहार से गिरफ्तार किया था। इन पर आठ फर्मों से करीब एक हजार करोड़ रुपये के फर्जी बिल काटने का आरोप था।

– मैसर्स आरपी स्टील एंड आयरन ट्रेडर्स के कारोबारी नरेश कुमार को गाजियाबाद से 44 करोड़ रुपये की जीएसटी चोरी के मामले में गिरफ्तार किया था।

– डीजीजीआई टीम ने गाजियाबाद, नोएडा और दिल्ली की फर्मों के साथ मिलकर करीब 297 करोड़ रुपये से अधिक के फर्जी खरीद-बिक्री बिल तैयार करने और फर्जी तरीके से 50 करोड़ रुपए रिफंड हासिल करने के मामले में दिल्ली के चंद्र विहार से एक सीए, एक टैक्स अधिवक्ता और उनके एक सहयोगी को गिरफ्तार किया था।

– 125 करोड़ की जीएसटी चोरी के मामले में सीजीएसटी टीम ने गाजियाबाद में छापा मारकर इनवॉइस के जरिये फर्जीवाड़ा करने वाले विकास जैन को गिरफ्तार किया था। 30 से ज्यादा फर्जी फर्मों का खुलासा हुआ था और दो करोड़ 33 लाख रुपये बरामद किए थे।

जीएसटी टीमें कार्रवाई में जुटीं

फर्जी फर्मों के जरिए आईटीसी क्लेम लेकर सरकार को चूना लगाने वाली फर्में निशाने पर हैं। जांच कर लगातार कार्रवाई की जा रही है। ऐसी फर्मों के पंजीकरण रद्द किए जा रहे हैं। केंद्र और राज्य जीएसटी टीमें आरोपियों की गिरफ्तारी और उनसे फर्जीवाड़ा कर सरकार को राजस्व की लगाई चपत भी वसूल की जा रही है।

ऐसे बनाते हैं फर्जी कंपनी

परिचित एवं अज्ञात लोगों के पैन कार्ड और आधार नम्बर लेकर उनके नाम से फर्जी फर्म बना लेते हैं। सीजीएसटी की वेबसाइट पर ऑनलाइन न सिर्फ फर्म का रजिस्ट्रेशन करा लेते हैं, बल्कि जीएसटी और टिन नम्बर भी ले लेते हैं। इतना ही नहीं, फर्जी फर्मों के नाम से बैंक खाते भी खुद ही खुलवा लेते हैं। पश्चिमी यूपी में ही नहीं दिल्ली, हरियाणा, उत्तराखंड और मध्य प्रदेश में भी फर्जी कंपनियां सामने आ चुकी हैं। जीएसटी की भाषा में इस कारनामे को टैक्सी फर्म कहते हैं।