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ब्रज की अनोखी होली: आग की लपटों के बीच से निकला पंडा, निभाई 5200 साल पुरानी परंपरा, 80 हजार श्रद्धालु मौजूद

ब्रज की अनोखी होली: आग की लपटों के बीच से निकला पंडा, निभाई 5200 साल पुरानी परंपरा, 80 हजार श्रद्धालु मौजूद

मथुरा जिले के फालैन गांव में होली के अवसर पर 5200 साल पुरानी परंपरा को जीवंत किया गया, जब पंडा संजू धधकती हुई होलिका की आग से गुजर गए। इस ऐतिहासिक परंपरा के तहत 12 गांव की एक साथ जलने वाली होलिका पर से पंडा दौड़ते हुए निकलता है। इस दृश्य को देखने के लिए देश-विदेश से करीब 80 हजार श्रद्धालु फालैन गांव पहुंचे और जबरदस्त उत्साह के साथ इस अद्भुत क्षण के गवाह बने।

प्रह्लाद की कथा होती है जीवंत
यह परंपरा भक्त प्रह्लाद और उनके पिता हिरण्यकश्यप की पौराणिक कथा से जुड़ी है। मान्यता है कि जिस तरह भगवान विष्णु की कृपा से प्रह्लाद जलती होलिका से सुरक्षित बाहर आ गए थे, उसी तरह फालैन गांव का पंडा भी अग्नि परीक्षा देता है। इस बार संजू पंडा ने यह परंपरा निभाई, जो पिछले पांच वर्षों से उनके बड़े भाई मोनू पंडा निभा रहे थे।

45 दिन के व्रत और अनुष्ठान के बाद अग्नि परीक्षा
पंडा संजू ने इस अनुष्ठान को पूरा करने के लिए 45 दिनों तक व्रत और कठोर तपस्या की। शुक्रवार तड़के चार बजे उन्होंने प्रह्लाद कुंड में स्नान किया, जिसके बाद उनकी बहन ने जलती होलिका के चारों ओर कलश से जल अर्पित किया। फिर संजू पंडा गीले शरीर पर सिर्फ गमछा पहनकर आए और जलती होलिका पर से दौड़ते हुए निकल गए।

80 हजार श्रद्धालु बने साक्षी
इस ऐतिहासिक घटना को देखने के लिए 12 गांवों के लोग और करीब 80 हजार श्रद्धालु मौजूद थे। जैसे ही पंडा संजू ने धधकती होलिका के बीच दौड़ लगाई, श्रद्धालु जयकारों से गूंज उठे। 30 से 35 कदमों की यह यात्रा पूरे माहौल को भक्तिमय कर गई। इसके बाद पूरे गांव में रंगों से सराबोर होकर होली का उत्सव शुरू हो गया।

अब नहीं कर पाएंगे ये काम
इस अनुष्ठान के बाद संजू पंडा कुछ नियमों का पालन करेंगे। उन्होंने बताया कि अब वह कभी गोवंश की पूंछ नहीं पकड़ सकते और न ही चमड़े से बनी किसी चीज का उपयोग कर सकते हैं। यह परंपरा सतयुग से चली आ रही है और इसे निभाने वाले व्यक्ति के लिए कुछ नियम निर्धारित किए गए हैं।

फालैन गांव की यह परंपरा ब्रज की होली का सबसे चौंकाने वाला दृश्य माना जाता है और हर साल हजारों भक्त इसे देखने के लिए उमड़ते हैं।

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