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CAA जैसा बवाल न हो, वक्फ बिल पर मुस्लिमों के हर संशय को दूर कर रही मोदी सरकार

CAA जैसा बवाल न हो, वक्फ बिल पर मुस्लिमों के हर संशय को दूर कर रही मोदी सरकार

मोदी सरकार वक्फ संशोधन बिल को कानूनी अमलीजामा पहनाने की तैयारी कर रही है। इसे लेकर मुस्लिम संगठनों ने विरोध जताया है, लेकिन सरकार किसी भी सियासी विवाद से बचने के लिए हर कदम फूंक-फूंककर रख रही है। ईद के बाद यह बिल संसद में पेश किया जा सकता है, लेकिन सरकार पहले मुस्लिम समाज के सभी संशयों को दूर करने में जुटी है, ताकि सीएए जैसा कोई बड़ा आंदोलन न खड़ा हो।

मुस्लिम संगठनों का विरोध और सरकार की रणनीति
वक्फ संशोधन बिल का विरोध ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड, जमीयत उलेमा-ए-हिंद और जमात-ए-इस्लामी समेत कई संगठनों ने किया है। 17 मार्च को दिल्ली के जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन कर इन संगठनों ने सरकार को चेतावनी दी थी कि वे इस बिल के खिलाफ किसान आंदोलन की तर्ज पर बड़े प्रदर्शन करेंगे।

हालांकि, मोदी सरकार ने इस बिल पर चर्चा और बातचीत का रास्ता अपनाया है। सरकार का कहना है कि बिल पारदर्शिता लाने और वक्फ संपत्तियों के सही उपयोग को सुनिश्चित करने के लिए लाया जा रहा है। सरकार ने इस पर विपक्षी दलों और मुस्लिम संगठनों से बातचीत के लिए संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) का गठन किया था। इस समिति ने देशभर में जाकर मुस्लिम समुदाय के लोगों से बातचीत की और उनकी आपत्तियों को दर्ज किया।

CAA आंदोलन से सबक लेकर संभलकर बढ़ रही सरकार
मोदी सरकार 2019 में नागरिकता संशोधन कानून (CAA) लाई थी, जिसके खिलाफ देशभर में बड़े आंदोलन हुए थे। मुस्लिम समुदाय को डर था कि यह कानून उनकी नागरिकता छीन सकता है, जबकि सरकार लगातार सफाई देती रही कि यह नागरिकता देने का कानून है, न कि छीनने का। बावजूद इसके शाहीन बाग समेत देशभर में विरोध प्रदर्शन हुए, जिससे सरकार को राजनीतिक और सामाजिक चुनौतियों का सामना करना पड़ा।

अब वक्फ संशोधन बिल को लेकर मोदी सरकार पहले से ज्यादा सतर्क है। सरकार नहीं चाहती कि यह मुद्दा किसी बड़े आंदोलन में बदल जाए। इसलिए सरकार मुस्लिम समुदाय के प्रमुख लोगों से मुलाकात कर रही है और यह संदेश दे रही है कि इस बिल से आम मुसलमानों को फायदा होगा, खासकर गरीब और पसमांदा मुस्लिमों को।

पसमांदा मुस्लिमों के सहारे सरकार का दांव
वक्फ संपत्तियों पर अभी तक कुछ प्रभावशाली मुस्लिम परिवारों और संगठनों का ही नियंत्रण रहा है। सरकार का तर्क है कि वक्फ संशोधन बिल से पसमांदा मुसलमानों को भी इसका लाभ मिलेगा। यूपी सरकार के अल्पसंख्यक मंत्री दानिश आजाद अंसारी का कहना है कि इस्लाम में वक्फ का मूल उद्देश्य गरीबों की भलाई करना है, लेकिन अब तक इसका सही लाभ गरीब मुसलमानों को नहीं मिल पाया है।

सरकार यह संदेश दे रही है कि बिल का मकसद वक्फ संपत्तियों की सुरक्षा और पारदर्शिता बढ़ाना है, न कि किसी समुदाय के अधिकार छीनना।

राष्ट्रीय मुस्लिम मंच के जरिए समर्थन जुटाने की कोशिश
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) से जुड़े राष्ट्रीय मुस्लिम मंच ने भी वक्फ संशोधन बिल के पक्ष में माहौल बनाना शुरू कर दिया है। मंच के नेता इंद्रेश कुमार के नेतृत्व में मुस्लिम समाज के प्रभावशाली लोगों से मुलाकात की जा रही है और रोजा इफ्तार के आयोजनों में भी इस मुद्दे पर चर्चा की जा रही है।

दिल्ली में हज कमेटी और बीजेपी अल्पसंख्यक मोर्चा द्वारा आयोजित इफ्तार पार्टियों में भी वक्फ बिल पर खुलकर चर्चा हुई। इसमें केंद्रीय अल्पसंख्यक मंत्री किरण रिजिजू, यूपी सरकार में मंत्री दानिश आजाद अंसारी, राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग के पूर्व उपाध्यक्ष आतिफ रशीद सहित कई मुस्लिम नेता शामिल हुए। इन नेताओं ने वक्फ संशोधन बिल को मुस्लिम समाज के हित में बताया और कहा कि इससे वक्फ संपत्तियों का सही इस्तेमाल सुनिश्चित होगा।

उर्दू पत्रकारों के जरिए माहौल बनाने की रणनीति
सरकार मुस्लिम समुदाय के बीच सही संदेश पहुंचाने के लिए उर्दू पत्रकारों की भी मदद ले रही है। केंद्रीय मंत्री किरण रिजिजू जल्द ही उर्दू अखबारों के पत्रकारों और मुस्लिम बुद्धिजीवियों के साथ बैठक करेंगे, ताकि बिल को लेकर मुस्लिम समाज में जागरूकता फैलाई जा सके।

सरकार का मानना है कि विपक्षी दल और कुछ संगठन वक्फ बिल को लेकर गलत धारणाएं फैला रहे हैं। इसलिए उर्दू पत्रकारों और मुस्लिम बुद्धिजीवियों को विश्वास में लेकर सरकार अपने पक्ष को मजबूती से रखना चाहती है।

संसद में लंबी चर्चा कराने की योजना
मोदी सरकार के पास लोकसभा और राज्यसभा में पर्याप्त बहुमत है, जिससे वह वक्फ संशोधन बिल को आसानी से पारित करा सकती है। लेकिन सरकार इसे जल्दबाजी में पास नहीं करना चाहती। सरकार की योजना है कि इस पर संसद में लंबी चर्चा कराई जाए, ताकि विपक्ष के हर सवाल का जवाब दिया जा सके और मुस्लिम समुदाय के सभी संशय दूर किए जा सकें।

सूत्रों के मुताबिक, सरकार 21 मार्च को लोकसभा में गिलोटिन प्रक्रिया के जरिए अनुदान मांगों को पारित कराएगी और फिर वित्त विधेयक को मंजूरी दिलाएगी। इसके बाद ईद के बाद वक्फ संशोधन बिल को पेश किया जाएगा।

क्या कहता है वक्फ संशोधन विधेयक 2024?
वक्फ संशोधन विधेयक 2024 का मकसद वक्फ संपत्तियों के डिजिटलीकरण, बेहतर ऑडिटिंग, पारदर्शिता और अवैध कब्जे हटाने के लिए कानूनी सुधार करना है। सरकार का कहना है कि इससे वक्फ संपत्तियों का सही उपयोग सुनिश्चित होगा और यह आम मुसलमानों के हित में काम करेगा।

अब देखने वाली बात होगी कि सरकार की यह रणनीति कितनी सफल होती है और क्या वह मुस्लिम समाज को भरोसा दिलाने में कामयाब होती है या फिर वक्फ बिल भी सीएए की तरह किसी बड़े आंदोलन का कारण बनता है।

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