‘यह सिर्फ मुसलमानों की बात नहीं, कल सिख और ईसाइयों की बारी आएगी’: वक्फ संशोधन बिल पर बोले AIUMB महासचिव, उद्धव ठाकरे को कहा शुक्रिया

‘यह सिर्फ मुसलमानों की बात नहीं, कल सिख और ईसाइयों की बारी आएगी’: वक्फ संशोधन बिल पर बोले AIUMB महासचिव, उद्धव ठाकरे को कहा शुक्रिया

नई दिल्ली: संसद के दोनों सदनों में वक्फ संशोधन बिल पास होने के बाद देशभर में इसका विरोध तेज हो गया है। इस बीच ऑल इंडिया उलमा-मशाइख बोर्ड (AIUMB) के महासचिव बोनाई हसनी ने शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे का शुक्रिया अदा किया है। उन्होंने ठाकरे द्वारा बिल के विरोध में खड़े होने को ‘संविधान और अल्पसंख्यकों के हक में एक मजबूत आवाज़’ बताया।

हसनी ने कहा, “हम बालासाहेब ठाकरे के बेटे उद्धव ठाकरे के शुक्रगुजार हैं कि उन्होंने इस बिल का विरोध किया। हम उन तमाम सांसदों को धन्यवाद देते हैं जिन्होंने अल्पसंख्यकों की आवाज़ बनने की हिम्मत दिखाई। यह सिर्फ मुस्लिमों का नहीं, सभी माइनॉरिटी का मुद्दा है। कल को यही स्थिति सिखों और ईसाइयों के साथ भी हो सकती है।”

AIUMB महासचिव ने वक्फ संशोधन बिल को ‘काला कानून’ करार देते हुए कहा कि यह न सिर्फ मुस्लिमों की धार्मिक संपत्तियों को हड़पने का रास्ता खोलता है, बल्कि इसमें न्याय की गुंजाइश तक नहीं छोड़ी गई है। उन्होंने आरोप लगाया कि अगर कोई सरकारी अधिकारी किसी वक्फ संपत्ति को सरकारी जमीन घोषित कर दे, तो उस विवाद को केवल सरकारी अफसर ही सुलझाएंगे – और उसे किसी न्यायालय में चुनौती नहीं दी जा सकेगी।

‘हर काला कानून रात के अंधेरे में ही पास होता है’

हसनी ने कहा कि पिछले 10 साल का इतिहास देख लीजिए, हर ऐसा विवादास्पद कानून रात में ही पास किया गया है। उन्होंने आशंका जताई कि इस कानून के लागू होते ही मस्जिदों, कब्रिस्तानों और ईदगाहों को निशाना बनाया जाएगा और कोई भी अधिकारी कह सकता है कि यह जमीन सरकार की है।

“ऐसा कानून पहले कभी नहीं देखा गया,” हसनी बोले। “यह सिर्फ जमीन या संपत्ति का मामला नहीं है, यह धार्मिक आज़ादी और संवैधानिक अधिकारों का हनन है।”

कानूनी मोर्चे पर भी उठी चुनौती

वक्फ संशोधन बिल अब राष्ट्रपति की मंजूरी का इंतजार कर रहा है, लेकिन इसके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में रिट याचिका दाखिल कर दी गई है। कांग्रेस के कुछ सांसदों और मुस्लिम संगठनों ने इसे धार्मिक अधिकारों का उल्लंघन बताते हुए चुनौती दी है।

AIUMB महासचिव ने उम्मीद जताई कि शिवसेना (यूबीटी) भविष्य में भी मुस्लिम, दलित, अल्पसंख्यक और हाशिए पर खड़े समुदायों के लिए आवाज उठाती रहेगी। उन्होंने कहा कि यह वक्त संविधान की रक्षा और धर्मनिरपेक्ष भारत के मूल्यों को बचाने का है।

वक्फ संशोधन बिल को लेकर सियासत गर्म है। एक तरफ सरकार इसे पारदर्शिता और प्रशासनिक सुधार के तौर पर पेश कर रही है, वहीं विपक्ष और अल्पसंख्यक संगठन इसे अधिकारों पर हमला मान रहे हैं। आने वाले दिनों में सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई और सड़कों पर होने वाला विरोध इस कानून की दिशा तय करेगा।

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