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राजनीति के ‘कॉमेडी किंग’ जिनका मज़ाक उड़ाकर भी कॉमेडियन बच जाते थे! हर वर्ग में लोकप्रिय रही लालू की शैली

राजनीति के ‘कॉमेडी किंग’ जिनका मज़ाक उड़ाकर भी कॉमेडियन बच जाते थे! हर वर्ग में लोकप्रिय रही लालू की शैली

नई दिल्ली: स्टैंड-अप कॉमेडियन कुणाल कामरा और महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम एकनाथ शिंदे विवाद ने राजनीति और हास्य व्यंग्य के रिश्ते को एक बार फिर चर्चा में ला दिया है। लेकिन अगर भारतीय राजनीति में सबसे ज्यादा व्यंग्य और कॉमेडी का केंद्र कोई नेता रहा है, तो वह हैं लालू प्रसाद यादव। दिलचस्प बात यह है कि जिस दौर में उन पर कटाक्षों की बौछार होती थी, तब किसी कलाकार को धमकी नहीं दी जाती थी और न ही हमले होते थे।

हर वर्ग में लोकप्रिय लालू की शैली
1990 में बिहार के मुख्यमंत्री बनने के बाद लालू यादव ने जनता से जुड़ने का अनोखा तरीका अपनाया। वे आम बोलचाल की भाषा में संवाद करते थे, जिसमें हास्य और व्यंग्य का मिश्रण रहता था। यही कारण था कि उनके भाषण न केवल अख़बारों की सुर्खियाँ बनते थे बल्कि स्टैंड-अप कॉमेडियनों और कार्टूनिस्टों के लिए भी प्रमुख विषय बन गए।

कॉमेडियन भी हुए लालू के मुरीद
शेखर सुमन से लेकर राजू श्रीवास्तव तक कई कलाकारों ने लालू की मिमिक्री और व्यंग्य किए। शेखर सुमन ने अपने शो “मूवर्स एंड शेकर्स” में लालू पर जमकर व्यंग्य किए, तो वहीं राजू श्रीवास्तव भी उन्हें अपनी कॉमेडी का अहम हिस्सा बनाते थे। यहां तक कि 1998 में परेश रावल का ‘दंडनायक’ फिल्म में लालू जैसा लुक चर्चा का विषय बना था।

जब लालू ने खुद को बताया कॉमेडी का बादशाह
लालू प्रसाद यादव कभी भी अपने ऊपर किए गए कटाक्षों से विचलित नहीं होते थे। उनका मानना था कि वे खुद ही सबसे बड़े हास्य कलाकार हैं और उनके आगे कोई कॉमेडियन टिक ही नहीं सकता। यही वजह थी कि जब मीडिया और मनोरंजन जगत ने उन्हें ‘हास्य का पावरहाउस’ कहा, तो उन्होंने इसे सहर्ष स्वीकार किया।

मजाक भी सहनशीलता से लिया
आज जब नेताओं पर व्यंग्य करने वाले कॉमेडियन अक्सर विवादों में घिर जाते हैं, तब लालू का दौर याद आता है, जब वे मज़ाक को मज़ाक की तरह ही लेते थे। न उनके समर्थकों ने कभी किसी कॉमेडियन पर हमला किया, न ही उनके खिलाफ कोई केस दर्ज हुआ। यही वजह है कि भारतीय राजनीति में लालू प्रसाद यादव का नाम सिर्फ एक नेता के रूप में नहीं, बल्कि एक हास्यप्रिय नेता के रूप में भी लिया जाता है।

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