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चेन्नई, 10 जून 2021
तमिलनाडु में साल 1984 और 2019 के बीच मंदिर की 47,000 एकड़ जमीन लापता होने पर मंगलवार को मद्रास हाई कोर्ट से राज्य सरकार को फटकार लगने के बाद वह खोई जमीन को वापस पाने के लिए कदम उठा रही है। मद्रास उच्च न्यायालय की एक खंडपीठ जिसमें न्यायमूर्ति एन किरुबाकरण और न्यायमूर्ति टीवी थमिलसेल्वी शामिल थे, उन्होंने राज्य सरकार को हिंदू धार्मिक और धर्मार्थ बंदोबस्ती (एचआर और सीई) विभाग की ओर से कार्रवाई करने और जुलाई 5 तक सरकारी रिकॉर्ड के अनुसार लापता 47000 एकड़ मंदिर भूमि पर एक जवाबी हलफनामा दायर करने का निर्देश दिया था।

तमिलनाडु के मानव संसाधन और सीई मंत्री पीके शेखर बाबू ने आईएएनएस से बात करते हुए कहा, “मुख्यमंत्री एमके स्टालिन चाहते हैं कि मंदिर की भूमि को बहाल किया जाए और मंदिरों के हितों का ध्यान रखा जाए। हमने पाया है कि मंदिर की जमीन पर कुछ क्षेत्र में घरों का निर्माण किया गया था। हम यह सुनिश्चित करने के लिए कदम उठा रहे हैं कि ये मकान मालिक किरायेदार बन जाएं और मंदिर को किराया दें।”

एचआर एंड सीई विभाग ने पुष्टि की कि सरकार मंदिर की भूमि को बहाल करने की तैयारी में है और पहले से ही 3,43,647 एकड़ मंदिर भूमि की जानकारी सत्यापित की जा चुकी है। विभाग ने अपने पास उपलब्ध आंकड़ों और राज्य की भूमि रिकॉर्ड रजिस्ट्री में तमिलनाडु सरकार के राजस्व विभाग के साथ तुलना की है।

एचआरएंडसीई के एक वरिष्ठ अधिकारी ने आईएएनएस को बताया, “हमने एचआर एंड सीई वेबसाइट पर राज्य के हजारों मंदिरों से संबंधित शीर्षक दस्तावेजों, चिट्टों और यहां तक कि उपहार कार्यों की जानकारी पहले ही अपलोड कर दी गई है । अब लोग आसानी से मंदिरों के साथ भूमि की पूरी जानकारी हासिल कर सकते हैं।

भाजपा नेता और पार्टी प्रवक्ता केटी राघवन ने आईएएनएस से कहा, “हमें देखना होगा कि तमिलनाडु सरकार इस संबंध में कितनी गंभीर है। मद्रास उच्च न्यायालय ने मानव संसाधन और सीई विभाग को पहले ही मंदिर भूमि रिकॉर्ड की असमानता के संबंध में एक जवाबी हलफनामा दाखिल करने के लिए कहा है। राज्य सरकार के नीति नोटों में 1984 में जब यह 5.25 लाख एकड़ थी और 2019-20 में जब इसे 4.78 लाख एकड़ कर दिया गया था। जिसमें 47,000 एकड़ का अंतर देखने को मिला। यदि सरकार अतिक्रमणकारियों से मंदिर की भूमि को दोबारा प्राप्त करने के लिए कदम नहीं उठाती भाजपा राज्य भर में बड़े आंदोलन शुरू करेगी।”