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देहरादून, 12 नवंबर 2021

उत्तराखंड के अभिनव की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। जिसके बाद बड़ी संख्या में उन लोगों को राहत मिलने की उम्मीद जग गई है जिनसे प्राइवेट अस्पतालों ने ईलाज के नाम पर मुंह मांगे दाम वसूले। यानि देश के जिन भी प्राइवेट अस्पतालों, नर्सिंग होमों ने केन्द्र सरकार द्वारा तय की गई दरों के अतिरिक्त आपदा में अवसर तलाशते हुए लूट मचाई उन पर कड़ी कारवाई होनी तय है। सुप्रीम कोई ने याचिका पर राज्यों से जवाब तलब किया है। आपको बता दें कि पिछले दिनों पूरे भारत मे कोरोना महामारी ने अपने पैर पसार रखे थे जिससे कोई भी अछूता नहीं रहा है। भले ही कोरोना का कहर अब कम हो गया हो किन्तु पूरे देश में इसने अपने चरम पर दोनों-लहरों में त्राहिमाम मचाया और लाखों लोगों जा जीवन बर्बाद कर दिया। अबतक भारत मे 3.42 करोड़ लोगों को कोरोनो हुआ जोकि पूरे विश्व मे चिंताजनक पहले स्थान पर है। कोरोना से लोगो को जान-माल हानि के साथ-साथ आर्थिक मार भी झेलनी पड़ी है । भारत के मध्यम- वर्ग और निचले वर्ग के 90 % प्रतिशत आबादी के कई लोगों की नौकरियां-व्यापार पर खतरा मंडराया, तब भी उन्होंने अपने परिवार वालो को बचाने के लिये प्राइवेट हस्पतालों में अपना सबकुछ दांव पर लगा दिया।

 

कोरोनकाल में केंद्र सरकार द्वारा जून 2020 में ” प्राइवेट हस्पतालों के कोरोना मरीजों हेतु चार्ज सुनिश्चित किया गया था ” , किन्तु फिर भी कई राज्यो के मरीजों से लाखों रुपये के बिल वसूले गये, अतः इन सबके दृष्टिगत देश में कोरोना मरीजों को प्राइवेट हस्पतालों द्वारा ” अत्यधिक ख़र्च की प्रतिपूर्ति – आमजन को प्राइवेट हस्पतालों से पैसे वापसी” के लिये देहरादून निवासी सामाजिक कार्यकर्ता अभिनव थापर की सुप्रीम कोर्ट, नई दिल्ली में सुनवाई चल रही है जिसपर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को नोटिस जारी कर 4 सप्ताह में जवाब मांगा था।

 

उल्लेखनीय है कि ” गाइडलाइंस में कोरोना मरीजों हेतू प्राइवेट हस्पतालों में यह चार्ज प्रतिदिन का निर्धारित था – ऑक्सिजन बेड- 8-10 हजार रुपये, आई०सी०यू०- 13-15 हजार रुपये व वेंटिलेटर बेड- 18 हजार रुपये , जिसमे PPE किट, दवाइयां, बेड, जाँच इत्यादि सब ख़र्चे युक्त थे ” किन्तु फिर भी कई राज्यो के मरीजों से लाखों रुपये के बिल वसूले गये, अतः इन सबके दृष्टिगत देश में कोरोना मरीजों को प्राइवेट हस्पतालों द्वारा ” अत्यधिक ख़र्च की प्रतिपूर्ति – आमजन को प्राइवेट हस्पतालों से पैसे वापसी” के लिये माननीय उच्चतम न्यायालय में जनहित याचिका दायर करी जिससे भारत के लगभग 1 करोड़ कोरोनो-पीड़ित परिवारों को न्याय मिल सके। माननीय सुप्रीम कोर्ट के दो न्यायाधीशों वाली संयुक्त पीठ श्री ने जनहित याचिका का संजान लिया व केंद्र सरकार को नोटिस जारी कर 4 सप्ताह में जवाब दाखिल करने के आदेश दिए।

 

जनहित याचिका के अधिवक्ता दीपक कुमार शर्मा ने बताया कि माननीय सुप्रीम कोर्ट के नयायाधीश डी वाई चंद्रचूड़ व न्यायाधीश बोपन्ना की संयुक्त पीठ ने इस याचिका के ” अत्याधिक बिल चार्ज के विषय मे गंभीर चिंता व्यक्त की तथा प्राइवेट हॉस्पिटल के अत्याधिक बिल चार्ज करने की अनियमिताओं , मरीजों को रिफंड जारी करने व पूरे देश के लिये सुनिश्चित गाइडलाइंस जारी करने विषय मे स्वास्थ्य मंत्रालय, केंद्र सरकार के साथ-साथ अब सुप्रीम कोर्ट ने 9 नवम्बर को सभी राज्यों को भी 4 सप्ताह में जवाब तलब करने का आदेश कर दिया है।”

 

आपको अवगत करा दे कि इस विषय पर अभिनव थापर व उनके साथियों द्वारा एक अभियान ” लड़ाई अभी बाकी है – हिसाब अभी बाकी है” भी चलाया जा रहा है जिससे लोगों को जागरूक कर, उनके बिल एकत्रित कर, उनके बिल प्रतिपूर्ति का विषय माननीय सुप्रीम कोर्ट के संज्ञान में लाया जाएगा।

कोरोना बिल एकत्रित अभियान –

” लड़ाई अभी बाकी है – हिसाब अभी बाकी है” की हेल्पलाइन-

उत्तराखंड के सभी कोरोना पीड़ितों के लिये हेल्पलाइन नम्बर व ईमेल जारी किया, जिसपे कोई भी निवासी अपने या अपने दोस्त/रिश्तेदारों/जानकारों के private हॉस्पिटल, दवाई के बिल, कोरोना की रिपोर्ट व डिस्चार्ज summary – whatsapp या ईमेल कर सकते है:

व्हाट्सएप नम्बर – 9870807913

ईमेल id- [email protected]