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दिल्ली-एनसीआर समेत तिब्बत और बिहार में भूकंप के लगे तेज झटके, 17 घंटे में 10 बार हिली धरती

दिल्ली-एनसीआर समेत तिब्बत और बिहार में भूकंप के लगे तेज झटके, 17 घंटे में 10 बार हिली धरती

नई दिल्ली: दिल्ली-NCR में आज सुबह भूकंप के तेज झटके महसूस किए गए। भूकंप की तीव्रता रिक्टर स्केल पर 4 मापी गई। भूकंप सुबह 5.37 बजे आया, जिसका केंद्र नई दिल्ली में जमीन से 5 किलोमीटर की गहराई पर था। झटके इतने तेज थे कि इमारतें हिलने लगीं और लोग घबराकर अपने घरों से बाहर निकल आए। पिछले 17 घंटे में तिब्बत से लेकर दिल्ली और बिहार तक 10 बार धरती हिली, जिससे लोग दहशत में आ गए।

तिब्बत से लेकर दिल्ली तक 13 घंटे में 8 बार भूकंप

तिब्बत में 16 फरवरी को अलग-अलग समय पर कई भूकंप के झटके महसूस किए गए। पहला झटका दोपहर 3:52 बजे आया, इसके बाद 8:59 बजे, 9:58 बजे और 11:59 बजे झटके महसूस किए गए। इनकी तीव्रता 3.5 से 4.5 के बीच थी। लगातार झटकों के कारण तिब्बत में लोग डरे हुए हैं।

अरुणाचल प्रदेश के पश्चिमी कामेंग में 16 फरवरी को सुबह 5:42 बजे भूकंप के हल्के झटके आए, जिसकी तीव्रता 2.8 थी। भूकंप की गहराई 10 किलोमीटर थी, जिससे कोई नुकसान नहीं हुआ।

बंगाल की खाड़ी में भी 16 फरवरी की रात 11:16 बजे भूकंप आया, जिसकी तीव्रता 4.3 दर्ज की गई और इसकी गहराई 35 किलोमीटर थी।

दिल्ली-NCR में भूकंप के तेज झटके

सुबह 5.36 बजे भूकंप के झटके महसूस किए गए।

भूकंप की तीव्रता 4.0 दर्ज की गई।

भूकंप का केंद्र नई दिल्ली के धौला कुआं के पास था।

झटकों के बाद लोग अपने घरों से बाहर निकल आए।

भूवैज्ञानिकों के अनुसार, दिल्ली हिमालय के करीब स्थित है और एक ‘भूकंपीय क्षेत्र’ में आता है। हिमालय भारतीय और यूरेशियन टेक्टोनिक प्लेटों के टकराने से बना है, जिससे इस क्षेत्र में अक्सर भूकंप आते हैं। दिल्ली में कई भ्रंश रेखाएं (Fault Lines) मौजूद हैं, जिनमें तनाव बढ़ने पर भूकंप की संभावना रहती है। इसके अलावा, दिल्ली की मिट्टी जलोढ़ और रेतीली होने के कारण भूकंप के दौरान अधिक अस्थिर हो सकती है, जिससे इमारतों को नुकसान पहुंच सकता है। यदि यहां उच्च तीव्रता का भूकंप आता है, तो बड़े पैमाने पर नुकसान हो सकता है।

भूकंप के झटके क्यों महसूस होते हैं?

भूकंप पृथ्वी की सतह के हिलने के कारण आता है। पृथ्वी की सतह टेक्टोनिक प्लेटों में विभाजित होती है, जो धीरे-धीरे गति करती रहती हैं। जब ये प्लेटें आपस में टकराती हैं, रगड़ती हैं या एक-दूसरे के नीचे खिसकती हैं, तो तनाव उत्पन्न होता है। जब यह तनाव एक निश्चित सीमा से अधिक हो जाता है, तो चट्टानें टूट जाती हैं और ऊर्जा निकलती है, जिससे भूकंप आता है।

दिल्ली किस भूकंपीय जोन में आता है?

भारत को चार भूकंपीय जोनों में बांटा गया है – जोन 2, जोन 3, जोन 4 और जोन 5। इनमें से जोन 5 सबसे अधिक खतरनाक माना जाता है, जबकि जोन 2 सबसे कम खतरनाक है। दिल्ली जोन 4 में आता है, जो इसे भूकंप के प्रति संवेदनशील बनाता है।

दिल्ली और इसके आसपास के क्षेत्र भूकंप के खतरे वाले क्षेत्रों में गिने जाते हैं। यदि यहां तेज गति का भूकंप आता है, तो भारी नुकसान की संभावना बनी रहती है।

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