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महाकुंभ में संत सम्मेलन: काशी-मथुरा के मंदिरों को मुक्त कराने की बनेगी रणनीति

महाकुंभ में संत सम्मेलन: काशी-मथुरा के मंदिरों को मुक्त कराने की बनेगी रणनीति

प्रयागराज: महाकुंभ के दौरान विश्व हिंदू परिषद (विहिप) 25 जनवरी को संतों का बड़ा सम्मेलन आयोजित करने जा रही है, जिसमें देशभर के साधु-संत भाग लेंगे। इस सम्मेलन में अयोध्या की तरह काशी और मथुरा के मंदिरों को पूरी तरह से मुक्त कराने के लिए आंदोलन की तारीखों का ऐलान किया जा सकता है। संत समाज इस सम्मेलन के जरिए अपने तीर्थों को वापस पाने के लिए रणनीति बनाएगा।

अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत रवींद्र पुरी ने कहा है कि संत समाज अब तीर्थ स्थलों पर हुए कब्जों को मुक्त कराने के लिए आगे आएगा। उन्होंने बताया कि संत सम्मेलन में साधु-संतों की रायशुमारी के बाद काशी और मथुरा को कब्जामुक्त कराने की रणनीति तैयार की जाएगी।

काशी-मथुरा के साथ संभल के लिए भी मुहिम
निरंजनी अखाड़े के महामंडलेश्वर स्वामी प्रेमानंद पुरी ने कहा है कि अब समय आ गया है जब संत समाज अपने तीर्थ स्थलों को वापस चाहता है। उन्होंने कहा कि संत सम्मेलन में इस पर चर्चा होगी और तारीख तय की जाएगी कि कब काशी, मथुरा और संभल की ओर कूच करना है।

1984 के संकल्प को पूरा करने की योजना
विश्व हिंदू परिषद के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष आलोक कुमार ने ज़ी मीडिया से बातचीत में कहा कि काशी और मथुरा 1984 से विहिप के एजेंडे में हैं। उन्होंने कहा कि महाकुंभ की धरती पर आयोजित होने वाले इस संत सम्मेलन में इन मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की जाएगी और संत समाज की राय लेकर आगे की रणनीति बनाई जाएगी।

संत सम्मेलन पर देश की निगाहें
महाकुंभ के इस संत सम्मेलन को देशभर में धार्मिक और सामाजिक स्तर पर महत्वपूर्ण माना जा रहा है। विहिप के इस सम्मेलन में काशी, मथुरा और अन्य तीर्थों को कब्जामुक्त कराने के लिए संत समाज एकजुट होकर नई रणनीति बनाएगा। सम्मेलन में यह भी तय किया जाएगा कि इन मुद्दों पर आगे कैसे बढ़ा जाए और किन तरीकों से धार्मिक स्थलों को मुक्त कराया जाए।

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