नई दिल्ली, रूस की सेनाएं यूक्रेन में आगे बढ़ती जा रही हैं। कुछ समय पहले तक रूस को खामियाजा भुगत लेने की चेतावनी देने वाले अमेरिका ने स्पष्ट कर दिया है कि वह अपनी सेनाएं यूक्रेन में नहीं भेजेगा। नाटो की तरफ से भी यूक्रेन को कोई सीधी मदद नहीं मिलने वाली है। रूस का सामना यूक्रेन को अपने ही दम पर करना है और इस बात में कोई संदेह नहीं है कि उसकी सैन्य ताकत रूस के सामने कहीं नहीं टिकती है। ऐसे में सवाल यह भी उठ रहा है आखिर पश्चिमी देशों के कदम ठिठके हुए क्यों हैं? यूक्रेन की मदद के लिए सीधे तौर पर कोई आगे क्यों नहीं आ रहा है?
पुतिन के बयान से विश्व में छिड़ी बहस : दुनियाभर में 13,080 परमाणु हथियार हैं। इनमें से अकेले 6,257 रूस के पास हैं। इस भारी-भरकम परमाणु शक्ति के साथ ही राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बयान ने दुनियाभर को सोचने पर मजबूर कर दिया है। पुतिन ने कहा, ‘सोवियत संघ के विघटन में काफी कुछ गंवाने के बाद भी आज रूस सबसे ताकतवर परमाणु शक्ति है। कई आधुनिकतम हथियारों के मामले में भी हम आगे हैं। इस बात में किसी को संदेह नहीं होना चाहिए कि हमारे खिलाफ आने वाले को हार का सामना करन पड़ेगा।’ परमाणु शक्ति संपन्न होने के पुतिन के बयान ने नई बहस को जन्म दिया है। बाइडन सैन्य कार्रवाई का विकल्प पहले से ही नहीं लेकर चल रहे हैं, फिर भी पुतिन का यह बयान कहीं न कहीं रूस को ताकतवर दिखाने की उनकी कोशिश है।




