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RSS ने बांग्लादेश में हिंदुओं पर हो रहे अत्याचारों पर जताई चिंता, UN से दखल की मांग

RSS ने बांग्लादेश में हिंदुओं पर हो रहे अत्याचारों पर जताई चिंता, UN से दखल की मांग

बेंगलुरु: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) की अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा की बैठक में बांग्लादेश में हिंदुओं और अन्य अल्पसंख्यकों पर हो रहे अत्याचारों पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए संयुक्त राष्ट्र (UN) से हस्तक्षेप की मांग की गई। संघ ने बांग्लादेश में हिंदुओं पर हमलों को केवल राजनीतिक मुद्दा न मानते हुए इसके धार्मिक पक्ष को स्वीकार करने की आवश्यकता पर जोर दिया है।

संघ ने पारित किया प्रस्ताव, हिंदू समाज के लिए एकजुटता की अपील
बेंगलुरु में चल रही तीन दिवसीय बैठक में संघ ने बांग्लादेश में हिंदू समाज के समर्थन में एक प्रस्ताव पारित किया। प्रस्ताव में कहा गया कि बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों पर हमले को केवल राजनीतिक संघर्ष के रूप में देखना सच्चाई से मुंह मोड़ने जैसा होगा, क्योंकि अधिकतर पीड़ित हिंदू और अन्य अल्पसंख्यक समुदायों से हैं।

संघ का कहना है कि बांग्लादेश में हिंदू समाज पर होने वाले हमलों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उजागर करना जरूरी है। आरएसएस ने सभी हिंदू संगठनों से इस मुद्दे पर जागरूकता फैलाने और एकजुटता दिखाने की अपील की है।

संघ का समाधान पर जोर, केवल ज्ञापन देने तक सीमित नहीं
आरएसएस ने कहा कि वह किसी भी सामाजिक समस्या को केवल ज्ञापन देकर हल करने में विश्वास नहीं करता, बल्कि समाज की शक्ति के आधार पर समाधान खोजने की नीति पर चलता है। बैठक में इस सोच को एक उदाहरण के जरिए समझाया गया।

मध्य प्रदेश के एक गांव में बच्चों के हाथ-पैर जन्मजात जुड़े हुए थे, जिससे वे सामान्य जीवन नहीं जी पा रहे थे। संघ ने इस समस्या पर डॉक्टरों से चर्चा की और ऑपरेशन की मदद से उन्हें सामान्य जीवन देने की पहल की। पिछले चार वर्षों में संघ ने 500 से अधिक बच्चों को ऑपरेशन की सुविधा दिलाई, जिससे वे सामान्य जीवन जीने लगे।

बांग्लादेश में हिंसा केवल हिंदू विरोधी नहीं, बल्कि भारत विरोधी भी
संघ ने बांग्लादेश में हो रही हिंसा को सिर्फ हिंदू विरोधी ही नहीं, बल्कि भारत विरोधी भी बताया। बैठक में कहा गया कि पाकिस्तान और अन्य गुप्त ताकतें बांग्लादेश में हिंदुओं के खिलाफ साजिश रच रही हैं। बांग्लादेश में जानबूझकर ऐसा माहौल बनाया जा रहा है, जिससे वहां के हिंदू खुद को असुरक्षित महसूस करें और पलायन के लिए मजबूर हों।

संघ ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से बांग्लादेश में हिंदुओं पर हो रहे अत्याचारों को गंभीरता से लेने और इस पर ठोस कदम उठाने की अपील की।

संघ की बैठक में 32 संगठनों के 1480 प्रतिनिधियों की भागीदारी
आरएसएस की अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा की बैठक 21 मार्च से बेंगलुरु में शुरू हुई, जो तीन दिनों तक चलेगी। संघ प्रमुख मोहन भागवत ने इस बैठक का उद्घाटन किया। बैठक में संघ से जुड़े 32 संगठनों के करीब 1480 प्रतिनिधि शामिल हुए।

संघ की 100 वर्षों की यात्रा और भविष्य की योजनाएं बैठक का मुख्य केंद्र
बैठक के दौरान दो प्रमुख विषयों पर विशेष चर्चा हुई। पहला प्रस्ताव बांग्लादेश में हिंदुओं और अन्य अल्पसंख्यकों की स्थिति और भविष्य के उपायों पर केंद्रित था, जिसे पारित कर दिया गया।

दूसरा प्रस्ताव संघ की शताब्दी यात्रा, आगामी शताब्दी वर्ष में किए जाने वाले कार्यों और भविष्य की योजनाओं से जुड़ा था। संघ ने अपने सामाजिक और सांस्कृतिक अभियानों को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए रणनीतियों पर विचार-विमर्श किया।

संघ का आह्वान – समाज को एकजुट होकर करना होगा प्रयास
संघ ने कहा कि केवल सरकारों पर निर्भर रहने के बजाय समाज को भी अपनी भूमिका निभानी होगी। समाज में जहां भी अन्याय या असमानता दिखे, वहां संगठित होकर समाधान निकालना चाहिए।

बैठक में कहा गया कि हिंदू समाज को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी आवाज उठानी होगी, ताकि बांग्लादेश सहित दुनिया के किसी भी हिस्से में हिंदुओं पर हो रहे अत्याचारों को रोका जा सके।

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