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लापता लोगों के आंकड़े, सोशल मीडिया नैरेटिव और पुलिस की पड़ताल: दिल्ली पुलिस ने क्या कहा और अब तक क्या सामने आया

लापता लोगों के आंकड़े, सोशल मीडिया नैरेटिव और पुलिस की पड़ताल: दिल्ली पुलिस ने क्या कहा और अब तक क्या सामने आया

दिल्ली में महिलाओं और बच्चों के लापता होने को लेकर पिछले कुछ दिनों से सोशल मीडिया पर चिंता और डर का माहौल बनता चला गया। वायरल पोस्ट्स और ग्राफिक्स में दावा किया गया कि राजधानी में अचानक लापता लड़कियों की संख्या में बड़ा उछाल आया है। इन दावों ने लोगों के बीच असुरक्षा की भावना को और गहरा कर दिया। इसी बीच दिल्ली पुलिस ने पूरे मामले पर अपना आधिकारिक पक्ष रखते हुए स्थिति स्पष्ट करने की कोशिश की।

मामला क्या है

साल 2026 की शुरुआत के साथ ही सोशल मीडिया पर कुछ आंकड़े तेजी से वायरल होने लगे। इन आंकड़ों में दावा किया गया कि 1 जनवरी से 5 फरवरी 2026 के बीच दिल्ली में कुल 2,884 लोग लापता हुए, जिनमें से केवल 409 लोगों की ही बरामदगी हो सकी। इन संख्याओं को इस तरह पेश किया गया, जिससे यह संदेश गया कि राजधानी में हालात अचानक बिगड़ गए हैं और कानून-व्यवस्था पर सवाल खड़े हो गए हैं।

बच्चों और महिलाओं के आंकड़ों से क्यों बढ़ा डर

वायरल पोस्ट्स में यह भी कहा गया कि इसी अवधि के दौरान 616 बच्चे और 1,372 महिलाएं लापता हुईं। इन आंकड़ों को बिना किसी संदर्भ या तुलनात्मक पृष्ठभूमि के सोशल मीडिया पर साझा किया गया। इसके बाद यह नैरेटिव बनने लगा कि “दिल्ली में लड़कियां सुरक्षित नहीं हैं” और “लोग अचानक गायब हो रहे हैं।” इसका असर यह हुआ कि आम लोगों में भय और असुरक्षा की भावना तेजी से फैलने लगी।

हाइप बढ़ने पर दिल्ली पुलिस का आधिकारिक बयान

मामला तूल पकड़ता देख दिल्ली पुलिस ने आंतरिक स्तर पर समीक्षा की और फिर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर अपना बयान जारी किया। पुलिस ने कहा कि जांच में यह सामने आया है कि लापता लड़कियों को लेकर जो डर फैलाया जा रहा है, वह पूरी तरह स्वाभाविक नहीं है। पुलिस के मुताबिक, कुछ अकाउंट्स और प्लेटफॉर्म्स ने पेड प्रमोशन के जरिए डर और घबराहट फैलाने वाला कंटेंट आगे बढ़ाया।

दिल्ली पुलिस ने साफ कहा कि पैसे के लिए दहशत फैलाना बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और ऐसे लोगों या समूहों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी, जो भ्रामक सूचनाओं के जरिए सामाजिक माहौल खराब करने की कोशिश कर रहे हैं।

दिल्ली पुलिस ने स्थिति पर क्या स्पष्ट किया

इस पूरे मुद्दे पर दिल्ली पुलिस के जॉइंट कमिश्नर संजय त्यागी ने कहा कि लापता मामलों में कोई असामान्य बढ़ोतरी नहीं हुई है। उनके अनुसार, जनवरी 2026 में पिछले वर्षों की समान अवधि की तुलना में ऐसे मामलों में कमी दर्ज की गई है। उन्होंने यह भी बताया कि महानगरों में हर साल बड़ी संख्या में लोग अलग-अलग कारणों से लापता होने की रिपोर्ट दर्ज कराते हैं और अधिकतर मामलों में तय प्रक्रिया के तहत लोगों को ढूंढ लिया जाता है।

लापता होने पर पुलिस की तय SOP क्या है

दिल्ली पुलिस ने बताया कि किसी भी व्यक्ति के लापता होने की शिकायत स्थानीय थाने, ऑनलाइन पोर्टल या ERSS-112 के जरिए दर्ज कराई जा सकती है। तय Standard Operating Procedure (SOP) के तहत शिकायत मिलते ही तलाश शुरू कर दी जाती है। बच्चों से जुड़े मामलों को विशेष प्राथमिकता दी जाती है। इसके लिए हर जिले में मिसिंग पर्सन स्क्वॉड और क्राइम ब्रांच की एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट लगातार सक्रिय रूप से काम कर रही हैं।

दिल्ली पुलिस का कहना है कि सोशल मीडिया पर जो डर का माहौल बनाया गया, वह पूरी तरह वास्तविक स्थिति को नहीं दर्शाता। आंकड़ों को संदर्भ से अलग कर पेश किया गया और कुछ मामलों में जानबूझकर घबराहट फैलाई गई। पुलिस ने लोगों से अपील की है कि वे किसी भी वायरल दावे पर भरोसा करने से पहले आधिकारिक स्रोतों से जानकारी की पुष्टि करें और अफवाहों से बचें।

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