चर्चा में हैं पाकिस्तान के संविधान के अनुच्छेद पांच और छह, जानिए क्यों इमरान खान पर इनके उल्लंघन के लग रहे आरोप

चर्चा में हैं पाकिस्तान के संविधान के अनुच्छेद पांच और छह, जानिए क्यों इमरान खान पर इनके उल्लंघन के लग रहे आरोप

नई दिल्ली, इमरान खान की सरकार के खिलाफ लाए गए अविश्वास प्रस्ताव को पाकिस्तानी संसद के डिप्टी स्पीकर कासिम खान सूरी ने असंवैधानिक बताते हुए खारिज कर दिया। इससे इमरान सरकार फिलहाल बच गई है। पाकिस्तान के कानून मंत्री फवाद चौधरी ने सदन में संविधान के अनुच्छेद पांच को पढ़ा और विपक्ष पर राष्ट्र के साथ गद्दारी का आरोप लगाया। इसके बाद ही सूरी ने प्रस्ताव खारिज कर सदन स्थगित कर दिया। आइए समझें पाकिस्तान के संविधान में क्या कहता है अनुच्छेद पांच जिसका प्रयोग किया गया है:

-अनुच्छेद पांच कहता है कि देश के प्रति वफादारी हर नागरिक का कर्तव्य है।

-संविधान के प्रविधानों को हर नागरिक को मानना होगा।

-अविश्वास प्रस्ताव खारिज करते हुए सूरी ने कहा कि विपक्ष का प्रस्ताव कानून के मुताबिक नहीं है। किसी विदेशी ताकत को चुनी हुई सरकार को हटाने या साजिश करने का अधिकार नहीं है।

क्या अनुच्छेद पांच से संसद भंग की जा सकती है

इस पूरे प्रकरण में एक बड़ा सवाल यह है कि क्या अनुच्छेद पांच के प्रयोग से संसद भंग की जा सकती है। पाकिस्तान के जियो टीवी ने कानूनी विशेषज्ञ सरूप इजाज के हवाले से कहा है कि फिलहाल लग रहा है कि यह कदम संविधान और लोकतांत्रिक मान्यताओं के खिलाफ है। जब अविश्वास प्रस्ताव लाया जा चुका है और अटार्नी जनरल ने मतदान के लिए कह दिया है तो इसे खारिज करना संवैधानिक प्रविधानों का उल्लंघन है। इजाज का कहना है कि इस समय मामले में केवल सुप्रीम कोर्ट ही एकमात्र निर्णयकर्ता है। अदालत तब दखल दे सकती है जब सदन में कोई कार्यवाही संविधान सम्मत नहीं है। यदि सुप्रीम कोर्ट डिप्टी स्पीकर के फैसले को गलत करार देती है तो संसद भंग करने का इमरान खान का निर्णय भी रद हो जाएगा। ऐसे में फिर से अविश्वास प्रस्ताव को मतदान के लिए पेश किया जाएगा। कानूनी विशेषज्ञ और पाकिस्तान के टीवी प्रस्तोता मुनीहब फारूक ने भी इमरान खान के संसद भंग करने के फैसले को असंवैधानिक बताया है.

अनुच्छेद छह भी आया चर्चा में

पाकिस्तान मुस्लिम लीग-एन के अध्यक्ष और विपक्षी नेता शाहबाज शरीफ और पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी के प्रमुख बिलावल भुट्टो ने कहा है कि अविश्वास प्रस्ताव पर वोटिंग से इन्कार करके इमरान सरकार ने संविधान के अनुच्छेद छह का उल्लंघन किया है।

अनुच्छेद छह कहता है कि यदि कोई व्यक्ति बल अथवा किसी अन्य असंवैधानिक तरीके का प्रयोग कर संविधान का उल्लंघन करने, उपेक्षा करने और बदलने का प्रयास करता है तो वह घोर देशद्रोह का दोषी होगा। इस अनुच्छेद का अगला हिस्सा कहता है कि इस प्रकार के प्रयास में मदद करने वाला व्यक्ति भी घोर देशद्रोह का दोषी माना जाएगा। धारा 2ए कहती है कि घोर देशद्रोह के कार्य को सुप्रीम कोर्ट या हाई कोर्ट द्वारा सही नहीं ठहराया जा सकता है।

इस अनुच्छेद की अंतिम धारा में कहा गया है कि संसद को घोर देशद्रोह के दोषियों को सजा सुनाने का अधिकार होगा।

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