कभी बीजेपी के बागी रहे ये नेता वाराणसी में मोदी के हैं बेहद खास और 2014 से जीत के अहम सूत्रधार भी

कभी बीजेपी के बागी रहे ये नेता वाराणसी में मोदी के हैं बेहद खास और 2014 से जीत के अहम सूत्रधार भी

नई दिल्ली, उत्तर प्रदेश में वर्ष 2014 से बीजेपी लगातार सफलता हासिल कर रही है। बीजेपी की इस बड़ी सफलता के पीछे पीएम नरेंद्र मोदी की लोकप्रियता मानी जाती है। अगर प्रधानमंत्री मोदी सामने से बीजेपी का नेतृत्व करते हैं तो पर्दे के पीछे भी कुछ लोग काम करते हैं, जो बीजेपी की सफलता में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। ऐसे ही एक बीजेपी नेता हैं सुनील ओझा, जो पीएम मोदी के क्षेत्र काशी को देखतें हैं और उसके आस-पास के जिलों पर नजर रखतें हैं।

3 मार्च को उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के अंतिम चरण से पहले पीएम मोदी को वाराणसी में अपना रोड शो करना था। द प्रिंट की एक रिपोर्ट के अनुसार शहर के गुलाब बाग इलाके में बीजेपी के कार्यालय में काफी गहमागहमी थी। उत्तर प्रदेश के पार्टी के सह-प्रभारी सुनील ओझा उन कार्यकर्ताओं से घिरे हुए थे, जिनके पास पीएम के दौरे और 10 मार्च के बारे में सवाल थे। ओझा ने धैर्यपूर्वक सभी की बात सुनी और फिर एक बंद कमरे में बैठक करने के लिए दौड़ पड़े।

कौन हैं सुनील ओझा: सुनील ओझा गुजरात में बीजेपी के टिकट पर भावनगर से 2 बार विधायक चुने जा चुके हैं। लेकिन 2007 में जब पार्टी ने टिकट नहीं दिया, तब ओझा ने पार्टी से बगावत कर दी और निर्दलीय चुनाव लड़ा। हालांकि ओझा चुनाव हार गए। माना जाता है कि ओझा और तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी 2002 तक एक-दूसरे के करीबी हुआ करते थे, लेकिन “अवैध मंदिर निर्माण” को लेकर दोनों नेताओं के बीच मतभेद उत्पन्न हो गए।

2008 में नरेंद्र मोदी को विश्व हिन्दू परिषद् के दबाव के कारण मंदिरों के विध्वंस को रोकना पड़ा और इस ‘जीत’ का जश्न सुनील ओझा ने मनाया, जो उस समय एमजेपी (MJP) के साथ थे। उस वक़्त ओझा ने कहा था कि, “यह हिन्दुओं की जीत है। हम आज (शुक्रवार) संध्या को पथिकाश्रम मंडल में मना रहे हैं। लोगों के गुस्से के आगे मोदी को झुकना पड़ा और पीछे हटना पड़ा। उन्होंने 200 से अधिक मंदिरों को नष्ट करके काफी नुकसान किया था।

धीरे-धीरे वक़्त बीतता गया और फिर सुनील ओझा का झुकाव नरेंद्र मोदी की ओर हुआ और उन्होंने 2011 में फिर से बीजेपी जॉइन कर ली। उसके बाद वो मोदी-शाह के काफी करीबी व्यक्ति बन गये। 2014 लोकसभा चुनाव के लिए सुनील ओझा को अमित शाह के साथ यूपी का सहप्रभारी बना दिया गया। ओझा के बारे में कहा जाता है कि बीजेपी के बड़े नेताओं से मुलाकात के अलावा वो बीजेपी के छोटे से छोटे कार्यकर्ता से भी निरंतर मिलते रहते हैं और उनकी समस्याओं को सुनते हैं और उसे दूर करने का प्रयास करते हैं।

सुनील ओझा को वाराणसी में पीएम के लिए चुनावी रणनीति और चुनाव से संबंधित कार्यों का प्रबंधन करने वाले प्रमुख व्यक्ति के रूप में जाना जाता है। 2017 की तरह ही 2022 के विधानसभा चुनाव में भी बीजेपी गठबंधन ने वाराणसी की सभी 8 सीटों पर जीत का परचम फहराया और ओझा को भी इसका श्रेय जाता है। 2014 और 2019 लोकसभा चुनाव में पीएम मोदी की वाराणसी में बड़ी जीत के लिए भी सुनील ओझा ने खूब मेहनत की थी।

सुनील ओझा वाराणसी और गोरखपुर क्षेत्र के सह-प्रभारी हैं। शेष क्षेत्रों का प्रबंधन सत्य कुमार और संजीव चौरसिया द्वारा किया जाता है। गुजरात में अपने पिछले मतभेदों के बावजूद 2014 में वाराणसी में अपने चुनाव अभियान की निगरानी के लिए ओझा को पीएम मोदी ने चुना था। वह तब से इसी भूमिका में हैं।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Share post:

Popular

More like this
Related

Unlocking a Realm Beyond Gamstop Where Opportunities Flourish

Exploring Non Gamstop Adventures: A Gambling Frontier ...

Betoverende spanning met maar 10 euro in online casino’s

Spannende weddenschappen met slechts 10 euro in online casino's ...

Олимп Казино – 2026 Казахстан Ставки на спорт и Olimp Casino

Олимп Казино - 2026 Казахстан Ставки на спорт и...

Betify Casino – Avis & Bonus exclusif (2026)

Betify Casino - Avis & Bonus exclusif (2026) ...