मोदी सरकार की PM-RAHAT योजना: सड़क हादसे के बाद फ्री इलाज, जानें कैसे मिलेगा 1.5 लाख तक का लाभ

केंद्र सरकार ने सड़क दुर्घटनाओं में घायल लोगों को बड़ी राहत देने के उद्देश्य से ‘पीएम-राहत’ (PM-RAHAT) योजना की शुरुआत की है। इस राष्ट्रव्यापी योजना का मकसद यह सुनिश्चित करना है कि किसी भी सड़क हादसे के बाद पीड़ित को पैसों की कमी की वजह से इलाज में देरी न हो। सरकार का फोकस विशेष रूप से उस अहम समय पर है, जिसे चिकित्सा विज्ञान में ‘गोल्डन आवर’ कहा जाता है। यानी दुर्घटना के तुरंत बाद का वह समय, जब सही और समय पर इलाज से जान बचने की संभावना सबसे अधिक होती है।

सरकार का कहना है कि कई मामलों में देखा गया है कि आर्थिक तंगी या भुगतान की अनिश्चितता के कारण अस्पतालों में इलाज शुरू करने में देरी हो जाती है। PM-RAHAT योजना इसी समस्या का समाधान करने के लिए लाई गई है, ताकि सड़क हादसे के शिकार व्यक्ति को तुरंत और कैशलेस इलाज मिल सके।


क्या है PM-RAHAT योजना?

PM-RAHAT योजना एक ऐसी केंद्रीय पहल है, जिसके तहत सड़क दुर्घटना में घायल किसी भी व्यक्ति को बिना नकद भुगतान के तत्काल चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी। इसका उद्देश्य यह है कि दुर्घटना पीड़ित के परिजन या मददगार व्यक्ति को अस्पताल पहुंचते ही भुगतान की चिंता न करनी पड़े। यह योजना देशभर में लागू होगी और किसी भी श्रेणी की सड़क, राष्ट्रीय राजमार्ग, राज्य मार्ग, जिला मार्ग या ग्रामीण सड़क पर हुई दुर्घटना के मामलों में लागू रहेगी। सरकार का दावा है कि इस व्यवस्था से न केवल इलाज में देरी कम होगी, बल्कि दुर्घटना के बाद होने वाली मौतों की संख्या में भी कमी लाई जा सकेगी।


कितनी मिलेगी आर्थिक सहायता?

योजना के तहत प्रत्येक सड़क दुर्घटना पीड़ित को हादसे की तारीख से सात दिनों की अवधि तक अधिकतम 1.5 लाख रुपये तक का कैशलेस इलाज उपलब्ध कराया जाएगा। यह राशि अस्पताल में भर्ती, आपातकालीन सर्जरी, दवाइयों और आवश्यक जांचों पर खर्च की जा सकेगी। अगर घायल की स्थिति गंभीर नहीं है, तो 24 घंटे तक उसे स्थिर करने के लिए आवश्यक इलाज दिया जाएगा। वहीं, यदि मामला जीवन-रक्षक स्थिति का है, तो एकीकृत डिजिटल सत्यापन प्रणाली के माध्यम से इलाज की अवधि 48 घंटे तक बढ़ाई जा सकती है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि गंभीर मरीजों को तत्काल और पर्याप्त चिकित्सा सुविधा मिले।


‘गोल्डन आवर’ पर विशेष जोर

चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार, सड़क दुर्घटना के बाद का पहला घंटा यानी ‘गोल्डन आवर’ बेहद महत्वपूर्ण होता है। इस दौरान यदि घायल व्यक्ति को समय पर अस्पताल पहुंचाकर सही इलाज दिया जाए, तो उसकी जान बचने की संभावना कई गुना बढ़ जाती है। सरकार का मानना है कि PM-RAHAT योजना के माध्यम से आपातकालीन प्रतिक्रिया प्रणाली को मजबूत कर इस ‘गोल्डन आवर’ का बेहतर उपयोग किया जा सकेगा।


कैसे काम करेगी यह योजना?

PM-RAHAT योजना को आपातकालीन प्रतिक्रिया सहायता प्रणाली (IRSS) 112 से जोड़ा गया है। दुर्घटना होने की स्थिति में पीड़ित, राहगीर (गुड समैरिटन) या घटनास्थल पर मौजूद कोई भी व्यक्ति 112 नंबर डायल कर सकता है। इस नंबर के जरिए नजदीकी अस्पताल और एंबुलेंस की जानकारी तुरंत उपलब्ध कराई जाएगी। सरकार का दावा है कि इस एकीकृत प्रणाली से पुलिस, एंबुलेंस सेवा और अस्पतालों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित होगा। इससे घायल व्यक्ति को कम से कम समय में चिकित्सा सुविधा मिल सकेगी।


इलाज का भुगतान कौन करेगा?

योजना के तहत अस्पतालों को मोटर वाहन दुर्घटना कोष (MVAF) के माध्यम से भुगतान किया जाएगा। यदि दुर्घटनाग्रस्त वाहन बीमित है, तो सामान्य बीमा कंपनियों के अंशदान से राशि का निपटान किया जाएगा। वहीं, हिट एंड रन या बिना बीमा वाले वाहनों से जुड़ी दुर्घटनाओं के मामलों में सरकार बजटीय प्रावधान के तहत खर्च वहन करेगी। स्वीकृत दावों का निपटारा राज्य स्वास्थ्य एजेंसी द्वारा 10 दिनों के भीतर करने का प्रावधान रखा गया है, ताकि अस्पतालों को समय पर भुगतान मिल सके।


शिकायत निवारण की व्यवस्था

योजना से जुड़ी किसी भी शिकायत के समाधान के लिए हर जिले में एक नामित अधिकारी नियुक्त किया जाएगा। यह अधिकारी जिला सड़क सुरक्षा समिति के तहत काम करेगा, जिसकी अध्यक्षता जिला कलेक्टर या समकक्ष प्राधिकारी करेंगे। इस व्यवस्था का उद्देश्य पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना है, ताकि किसी भी स्तर पर लापरवाही या देरी की स्थिति में कार्रवाई की जा सके।


क्यों अहम है यह पहल?

भारत में हर साल लाखों सड़क दुर्घटनाएं होती हैं और बड़ी संख्या में लोग अपनी जान गंवाते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि दुर्घटना के बाद समय पर और उचित इलाज मिल जाए, तो लगभग आधी मौतों को टाला जा सकता है। ऐसे में PM-RAHAT योजना को सड़क सुरक्षा और आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। सरकार को उम्मीद है कि इससे न केवल हजारों लोगों की जान बचाई जा सकेगी, बल्कि दुर्घटना पीड़ितों और उनके परिवारों पर पड़ने वाला आर्थिक बोझ भी कम होगा। कुल मिलाकर, यह योजना सड़क दुर्घटनाओं के बाद त्वरित और प्रभावी चिकित्सा सुविधा सुनिश्चित करने की दिशा में एक बड़ा और संरचनात्मक बदलाव मानी जा रही है।

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