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‘हर व्यक्ति शंकराचार्य नहीं’ बनाम 40 मुकदमे: योगी, अखिलेश और शंकराचार्य के बीच सियासी संग्राम की पूरी कहानी

‘हर व्यक्ति शंकराचार्य नहीं’ बनाम 40 मुकदमे: योगी, अखिलेश और शंकराचार्य के बीच सियासी संग्राम की पूरी कहानी

उत्तर प्रदेश की राजनीति इन दिनों केवल सत्ता और विपक्ष की बहस तक सीमित नहीं है, बल्कि यह टकराव अब धार्मिक मंचों तक भी फैल चुका है। एक ओर विधानसभा में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ समाजवादी पार्टी और उसके प्रमुख अखिलेश यादव पर तीखे हमले बोल रहे हैं, तो दूसरी ओर ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती मुख्यमंत्री पर गंभीर सवाल उठा रहे हैं।

विधानसभा में ‘ट्रिपल S’ बनाम विपक्ष के आरोप

बजट सत्र के दौरान दो घंटे से अधिक चले भाषण में मुख्यमंत्री योगी ने कानून-व्यवस्था पर अपनी सरकार का बचाव करते हुए ‘ट्रिपल S’ सेफ्टी, स्टेबिलिटी और स्पीड की गारंटी का दावा किया। उन्होंने कहा कि 2017 के बाद प्रदेश में दंगों और कर्फ्यू की घटनाओं में कमी आई है और प्रशासनिक ढांचा मजबूत हुआ है। इसी दौरान उन्होंने शंकराचार्य विवाद, वंदेमातरम् और फॉर्म-7 जैसे मुद्दों पर विपक्ष को घेरा। योगी ने स्पष्ट कहा कि हर व्यक्ति स्वयं को ‘शंकराचार्य’ नहीं कह सकता, क्योंकि सनातन परंपरा में इस पद की निर्धारित व्यवस्था और मर्यादा है। इस पर अखिलेश यादव ने पलटवार करते हुए कहा कि अगर शंकराचार्य से प्रमाण मांगा जा रहा है, तो ‘योगी’ शब्द के इस्तेमाल पर भी सवाल उठ सकते हैं।

वंदेमातरम् और फॉर्म-7 पर सियासी घमासान

मुख्यमंत्री ने वंदेमातरम् के विरोध को राष्ट्रविरोधी मानसिकता से जोड़ते हुए कड़ा रुख अपनाया। इस बयान पर सपा नेताओं ने तीखी प्रतिक्रिया दी और इसे अतिरंजित बताया। फॉर्म-7 को लेकर अखिलेश यादव ने आरोप लगाया कि वोटर सूची में छेड़छाड़ की आशंका है। मुख्यमंत्री ने इसे निराधार बताते हुए कहा कि सभी प्रक्रियाएं निर्वाचन आयोग के सत्यापन के बाद ही होती हैं और व्यवस्था पूरी तरह पारदर्शी है।

वाराणसी से उठी धार्मिक आपत्ति

विधानसभा में दिए गए बयान के बाद वाराणसी में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने मुख्यमंत्री पर सीधा निशाना साधा। उन्होंने कहा कि सनातन धर्म में शंकराचार्य वही है जो सत्य और धर्म की रक्षा करे। उन्होंने मुख्यमंत्री द्वारा दी गई परिभाषा को नई और परंपरा से अलग बताया। सबसे गंभीर आरोप लगाते हुए उन्होंने कहा कि जब योगी आदित्यनाथ मुख्यमंत्री बने, तब उनके खिलाफ दर्ज 40 से अधिक मुकदमे समाप्त हो गए। उन्होंने सवाल किया कि क्या कानून में ऐसा कोई प्रावधान है कि उच्च पद पर पहुंचते ही मुकदमे स्वतः हट जाएं?

माघ मेला विवाद से बढ़ी तल्खी

यह पूरा विवाद प्रयागराज के माघ मेले के दौरान उस घटना से जुड़ा है, जब पुलिस ने ‘नो-व्हीकल जोन’ का हवाला देते हुए शंकराचार्य को संगम तट की ओर जाने से रोका था। इस दौरान समर्थकों और पुलिस के बीच हल्की झड़प भी हुई थी। मुख्यमंत्री ने इस घटना का जिक्र करते हुए कहा था कि कानून सबके लिए समान है। साथ ही, उन्होंने 2015 में सपा सरकार के दौरान शंकराचार्य पर हुए लाठीचार्ज का उल्लेख कर विपक्ष पर दोहरे मापदंड अपनाने का आरोप लगाया।

सियासत और धर्म की रेखा धुंधली

यह पूरा प्रकरण अब केवल राजनीतिक बहस नहीं रह गया है। विधानसभा के भीतर शुरू हुआ शब्दों का संघर्ष धार्मिक मंचों तक पहुंच चुका है। एक तरफ मुख्यमंत्री कानून और मर्यादा की बात कर रहे हैं, तो दूसरी ओर शंकराचार्य धर्म और नैतिकता के मानकों पर सवाल उठा रहे हैं। आने वाले दिनों में यह टकराव किस दिशा में जाएगा, यह देखना अहम होगा। फिलहाल इतना तय है कि उत्तर प्रदेश की राजनीति में धर्म और सत्ता का यह संगम लंबे समय तक चर्चा का विषय बना रहेगा।

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