महाशिवरात्रि के अवसर पर न सिर्फ भारत बल्कि दुनियाभर में भगवान शिव की भक्ति का माहौल रहता है। शिव केवल भारत में ही नहीं, बल्कि विदेशों में भी हिंदू धर्म के सबसे लोकप्रिय देवता माने जाते हैं। भारत में हर साल लाखों विदेशी धार्मिक यात्रा पर आते हैं, जिनमें से अधिकांश वाराणसी और तिरुअन्नामलाई जैसे शिव तीर्थों की यात्रा करते हैं। सवाल यह उठता है कि आखिर विदेशी भगवान शिव की ओर इतनी गहरी आस्था क्यों रखते हैं? आइए इसे चार मुख्य कारणों से समझते हैं।
1. गुट निरपेक्ष और न्यायप्रिय देवता
भगवान शिव न केवल देवताओं बल्कि असुरों के भी आराध्य हैं। वे निष्पक्ष हैं और सभी को समान दृष्टि से देखते हैं। पौराणिक कथाओं के अनुसार, रावण और राम दोनों उनके उपासक थे, फिर भी शिव ने निष्पक्ष रूप से दोनों पर कृपा बरसाई। इस संतुलित दृष्टिकोण के कारण विदेशियों को शिव के व्यक्तित्व में आकर्षण महसूस होता है।
2. सरल पूजा और ध्यान से जुड़ाव
शिव साधना किसी कठोर नियमों से बंधी नहीं होती। वे ध्यान और तपस्या के प्रतीक हैं, जो योग और मेडिटेशन से जुड़े लोगों को विशेष रूप से प्रभावित करते हैं। पश्चिमी देशों में योग और ध्यान की लोकप्रियता बढ़ने के साथ-साथ शिव को भी एक आदर्श ध्यानयोगी के रूप में देखा जाने लगा है। उनकी पूजा विधि सरल और मुक्त है, जो विदेशियों को सहज लगती है।
3. भारतभर में एक समान मान्यता
भगवान शिव भारत के उत्तर से लेकर दक्षिण तक पूजे जाते हैं। कैलाश पर्वत से लेकर रामेश्वरम तक उनकी व्यापक उपस्थिति उन्हें अखिल भारतीय देवता बनाती है। शिव से जुड़े पौराणिक स्थल, जैसे कि वाराणसी और अरुणाचल के अरुणाचल शिव, पश्चिमी देशों के मीडिया में भी चर्चित रहे हैं, जिससे विदेशी श्रद्धालुओं की रुचि बढ़ी है।
4. रहस्यमयी और साधारण जीवनशैली
भगवान शिव का रूप जितना रहस्यमयी है, उतना ही उनका जीवन भी। वे वैरागी हैं, भस्म रमाते हैं, जटाजूट धारण करते हैं और एक बैल पर सवारी करते हैं। वे विलासिता से दूर रहते हैं, जो आध्यात्मिकता को महत्व देने वाले लोगों के लिए प्रेरणादायक है। उनकी यह रहस्यमयी छवि विदेशियों को रोमांचित करती है और वे उनकी भक्ति की ओर आकर्षित होते हैं।
भगवान शिव की लोकप्रियता केवल भारत तक सीमित नहीं है, बल्कि वे विश्वभर में श्रद्धा के केंद्र हैं। उनकी निष्पक्षता, ध्यान और योग से संबंध, अखिल भारतीय मान्यता और साधारण जीवनशैली उन्हें विदेशी भक्तों के लिए भी आकर्षण का केंद्र बनाती है। महाशिवरात्रि पर यह वैश्विक भक्ति स्पष्ट रूप से देखी जा सकती है।




