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भोपाल, 29दिसंबर, 2020

कथित ‘लव जिहाद’ (Love Jihad) की घटनाओं पर अंकुश लगाने के लिए मध्य प्रदेश सरकार ने भी धार्मिक स्वतंत्रता अध्यादेश 2020 (Dharma Swatantrata Ordinance 2020) को मंजूरी दे दी है। शिवराज सिंह चौहान की अगुवाई (Shivraj Singh Chouhan) वाली कैबिनेट में सर्वसम्मति के बाद यह मंजूरी दी गई है। अब इस अध्यादेश (Ordinance) को मंजूरी के लिए राज्यपाल (Governor) को भेजा जाएगा। राज्यपाल की मंजूरी मिलने के बाद यह नया कानून (new law) पूरे प्रदेश में लागू होगा।

ऐसा माना जा रहा है कि राज्यपाल जल्द ही इस अध्यादेश पर अपनी मुहर लगा देंगी। इसके बाद इसे राजपत्र में प्रकाशित कर दिया जाएगा। इस अध्यादेश को राज्यपाल से मंजूरी के बाद 6 महीने के अंदर विधानसभा से पारित कराना पड़ेगा। ऐसे में इस बजट सत्र में इसे पेश किया जाएगा। धर्म स्वातंत्र्य अध्यादेश में 19 प्रावधान हैं। बता दें कि मध्यप्रदेश से पहले उत्तर प्रदेश में लव जिहाद के खिलाफ अध्यादेश लाया गया। यहां पर 26 नवंबर को आनंदी बेन ने मंजूरी दी थी। वहां विधानसभा सत्र नहीं होने के कारण अध्यादेश के माध्यम से लाया गया, जबकि मध्यप्रदेश में विधानसभा सत्र प्रस्तावित था, लेकिन इसके स्थगित होने के कारण अब इसे अध्यादेश के रास्ते लाया जा रहा है।

यह होगा सजा का प्रावधान

सीएम शिवराज सिंह चौहान ने धार्मिक स्वतंत्रता अध्यादेश 2020 कानून के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि ‘धर्म स्वातंत्र्य विधेयक 2020’ के पास होते ही 1968 वाला धर्म स्वातंत्र्य विधेयक समाप्त हो जाएगा। गृह मंत्री ने कहा कि इसमें कुल 19 प्रमुख प्रावधान है। साथ ही कहा, ‘नए विधेयक के तहत, किसी पर धर्म परिवर्तन के लिए किसी को 1-5 साल की कैद और न्यूनतम 25,000 रुपये का जुर्माना लगेगा।’ तो वहीं, नाबालिग युवती, महिला या अनुसूचित जाति या अनुसूचित जनजाति के व्यक्ति का जबरन धर्म परिवर्तन करने पर 50,000 रुपए के न्यूनतम दंड के साथ 2-10 साल की न्यूनतम जेल अवधि का प्रवधान है।

अपना धर्म छुपाकर अधिनियम का उल्लंघन किए जाने पर तीन साल से 10 साल की जेल अथवा अर्थ दंड कम से कम 50 हजार रुपए का न्यूनतम प्रवधान है। सामूहिक धर्म परिवर्तन, दो या दो से अधिक व्यक्तियों का एक ही समय में धर्म परिवर्तन करके अधिनियम का उल्लंघन किए जाने पर पांच से 10 साल की कारावास अथवा अर्थ दंड जो कम से कम एक लाख रुपए का प्रवधान है। कानून बनने पर कोई भी व्यक्ति दूसरे को प्रलोभन, धमकी एवं बलपूर्वक विवाह के नाम पर अथवा अन्य कपटपूर्ण तरीके से प्रत्यक्ष अथवा परोक्ष से उसका धर्म परिवर्तन अथवा धर्म परिवर्तन का प्रयास नहीं कर सकेगा। सीएम ने बताया कि प्रस्तावित अधिनियम में दर्ज़ अपराध संज्ञेय और गैरजमानती होंगे। इसकी सुनवाई के लिए सत्र ​न्यायालय ही अधिकृ​त होंगे।